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अमेरिकी ग्लार्जिन बाजार में प्रमुख हिस्सेदारी पर नजर

Last Updated- December 11, 2022 | 7:22 PM IST

बीएस बातचीत

अपने बायोलॉजिक्स कारोबार के दमदार प्रदर्शन और अमेरिकी बाजार में इंटरचेंजेबल बायोसिमिलर इंसुलिन ग्लार्जिन की बढ़ती बाजार हिस्सेदारी से उत्साहित दवा कंपनी बायोकॉन बायोलॉजिक्स की नजर कहीं अधिक बाजार हिस्सेदारी हासिल करने पर है। बायोकॉन बायोलॉजिक्स के डिप्टी सीईओ श्रीहास ताम्बे ने सोहिनी दास से बातचीत में बताया कि किस प्रकार कंपनी अब भारत में अपनी इंसुलिन टीम को भी मजबूत कर रही है। पेश हैं मुख्य अंश:
वित्त वर्ष 2022 के दौरान कई पड़ाव दिखे। आपकी नजरों में साल कैसा रहा?
वित्त वर्ष 2022 के दौरान दमदार मांग और निर्बाध निष्पादन के कारण हमारे (बायोकॉन बायोलॉजिक्स) चौथी तिमाही के राजस्व में सालाना आधार पर 50 फीसदी के दायरे में वृद्धि दर्ज की गई और हमारे वार्षिक राजस्व में एक साल पहले के मुकाबले 24 फीसदी की वृद्धि हुई। राजस्व के मोर्चे पर इस दमदार प्रदर्शन को विकसित बाजारों के साथ-साथ उभरते बाजारों से भी रफ्तार मिली। लेकिन पिछले एक साल के दौरान वृद्धि को मुख्य तौर पर इंटरचेंजेबल बायोसिमिलर ग्लार्जिन से काफी दम मिला जिसे अमेरिकी बाजार में काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।
साल के दौरान बायोकॉन बायोलॉजिक्स के लिए कई पड़ाव दिखे। ग्लार्जिन को ऐतिहासिक मंजूरी भी ऐसी एक बड़ी उपलब्धि है। यह अपने प्रकार की पहली इंसुलिन दवा है जिसे अमेरिका औषधि नियामक यूएसएफडीए ने किसी भी अन्य इंसुलिन की जगह इस्तेमाल करने की मंजूरी दी है। इसके अलावा वित्त वर्ष 2022 के दौरान हम 5 करोड़ से अधिक रोगियों को जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति करने में सफल रहे जो हमारे लिए एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

लगातार बढ़ रहे लागत संबंधी दबाव पर आप क्या कहेंगे?
हरेक कारोबार को लागत कुशल होने की जरूरत है। हालिया भू-राजनीतिक घटनाओं और पिछले दो वर्षों के दौरान कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण वास्तव में स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। किरण मजूमदार शॉ ने बताया है कि किस प्रकार रसायन एवं ईंधन लागत में वृद्धि के कारण इनपुट लागत बढ़ गई है। इससे कारोबार का परिचालन प्रभावित हुआ है।

अमेरिका के बायोसिमिलर इंसुलिन ग्लार्जिन बाजार में आपकी नजर किस बाजार हिस्सेदारी पर है?
इंसुलिन ग्लार्जिन बाजार में सनोफी के पास मूल दवा लैंटस थी और इस बाजार में उसका वर्चस्व था। कुछ वर्ष पहले लिली द्वारा एएनडीए के तहत बासाल्गर को लॉन्च किए जाने के बाद स्थिति बदल गई। हम इंटरचेंजेबल बायोसिमिलर इंसुलिन ग्लार्जिन से लैंटस के लिए एकमात्र कंपनी हैं जबकि अमेरिकी बाजार में केवल तीन कंपनियां मौजूद हैं। जाहिर तौर पर सनोफी, लिली और बायोकॉन बायोलॉजिक्स के बीच प्रतिस्पर्धा दिखेगी। दवा विक्रेता लैंटिस को हटाकर हमारे कारोबार (लैंटस की बायोसिमिलर दवा- सेमग्ली) की ओर रुख कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2021 को हमने करीब 3 फीसदी बाजार हिस्सेदारी के साथ अलविदा किया और मार्च के अंत तक हमारी बाजार हिस्सेदारी 10 फीसदी से अधिक हो चुकी थी। हमारी नजर इस वित्त वर्ष के अंत तक अमेरिका में 15 से 20 फीसदी बाजार हिस्सेदारी पर है।

वायट्रिक्स सौदे के बाद आगे की राह क्या होगी?
वायट्रिक्स के साथ साझेदारी से हमें वैज्ञानिक एवं विनिर्माण दक्षता हासिल हुई जबकि वायट्रिक्स वाणिज्यिक मोर्चे पर है। बड़ी दवा कंपनी विज्ञान से विनिर्माण और फिर अगले मोर्चे की ओर रुख करती हैं। हमारे पास वायट्रिक्स साझेदारी के इतर एक उल्लेखनीय पोर्टफोलियो है। बाजार में अब हमारी सात दवाएं मौजूद हैं लेकिन हमारे पोर्टफोलियो में कुल 20 दवाएं (बायोसिमिलर) मौजूद हैं। वायट्रिक्स के इतर अन्य दवाओं के लिए हमारा लक्ष्य खुद के दम पर बाजार में दस्तक देना और वाणिज्यिक मोर्चे पर मौजूद रहना है। हालांकि अधिग्रहण से हमारी रणनीति को रफ्तार मिली है।

बायोकॉन खुद को एक इंसुलिन कंपनी के तौर पर स्थापित की है। ऐसे में आपके वैश्विक लक्ष्य क्या हैं?
हम वैश्विक स्तर पर नोवो नॉर्डिक और इलाई लिली जैसी कुछ कंपनियों की जमात में शामिल हैं। सनोफी इंसुलिन आरऐंडडी से पहले ही बाहर हो चुकी है। इसलिए हमारी नजर इंसुलिन के समग्र पोर्टफोलियो पर है जिसमें बेसल इंसुलिन, रैपिड-ऐक्टिंग इंसुलिन और रीकंबिनेंट मानव इंसुलिन शामिल हों।

First Published - May 2, 2022 | 1:04 AM IST

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