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इलेक्ट्रॉनिक्स योजना में देसी फर्मों का दिखा दम, घरेलू कंपनियों से आए 90% आवेदन

इलेक्ट्रॉनिक पुर्जा विनिर्माण के लिए कुल 1 लाख करोड़ रुपये से अ​धिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए

Last Updated- October 05, 2025 | 10:01 PM IST
semiconductor

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सेवाएं (ईएमएस) प्रदान करने वाली स्वदेशी कंपनियां केंद्र सरकार की लगभग 22,805 करोड़ की इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा विनिर्माण योजना के तहत प्रमुख आवेदक के रूप में उभरी हैं। इन कंपनियों में डिक्सन टेक्नॉलजीज (इंडिया), दिल्ली की अंबर एंटरप्राइजेज, बेंगलूरु की एक्वस, वाहन कलपुर्जा फर्म संवर्धन मदरसन, मैसूरु की केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार लगभग 90 फीसदी आवेदन भारतीय कंपनियों से आए हैं जो उनकी आक्रामक निवेश योजनाओं को दर्शाते हैं।

अंबर ने योजना के तहत प्रोत्साहन के लिए योग्य दो परियोजनाओं में लगभग 4,200 करोड़ रुपये का निवेश करने के प्रस्ताव किया है। वह उत्तर प्रदेश के जेवर में हाई-डेंसिटी इंटरकनेक्ट सेमीकंडक्टर सब्सट्रेट यूनिट लगाएगी जिसका उपयोग मोबाइल उपकरणों, वाहन इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स में किया जाता है।

अंबर ने कोरिया सर्किट के साथ समझौता किया है, जिसकी इस इकाई में 30 फीसदी हिस्सेदारी होगी। कोरिया सर्किट तकनीकी सहायता प्रदान करेगी। दूसरी परियोजना कर्नाटक के होसुर में मल्टीलेयर प्रिंटेड सर्किट बोर्ड विनिर्माण इकाई होगी जिसमें करीब 1,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

इसी तरह डिक्सन ने लगभग 4,000 करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ पांच सेगमेंट में आवेदन किए हैं। वह चीन की फर्म एचकेसी ओवरसीज की साझेदारी में लगभग 2,000 करोड़ रुपये का डिस्प्ले मॉड्यूल सब-असेंबली प्लांट लगा रही है। इसमें चीनी फर्म की 26 फीसदी हिस्सेदारी होगी। लगभग 1,000 करोड़ रुपये के कैमरा मॉड्यूल सब-असेंबली संयंत्र की भी योजना है। डिक्सन ने कुनशान क्यू टेक माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स (इंडिया) की 51 फीसदी हिस्सेदारी लगभग 550 करोड़ रुपये में खरीदी थी। इस इकाई में पहले से ही उत्पादन चालू है।

मैकेनिक्स (एनक्लोजर) में डिक्सन करीब 500 करोड़ रुपये निवेश करेगी और इसके लिए उसने चोंगकिंग युहाई प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग के साथ समझौता किया है जिसकी 26 फीसदी हिस्सेदारी होगी। लीथियम-आयन सेल विनिर्माण में भी कंपनी करीब 500 करोड़ रुपये लगाएगी। इसके लिए डिक्सन वै​श्विक तकनीकी साझेदार तलाश रही है।

एनक्लोजर ने अब तक सबसे अधिक निवेश प्रतिबद्धताओं को आकर्षित किया है। रिपोर्ट के अनुसार टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भी एनक्लोजर में लगभग 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने की योजना बना रही है।

मुनोथ इंडस्ट्रीज पहले से ही लीथियम-आयन बैटरी बना रही है। कंपनी इलेक्टॉनिक्स पुर्जा योजना के तहत करीब 500 करोड़ रुपये निवेश कर रही है।

First Published - October 5, 2025 | 10:01 PM IST

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