ईंधन एवं ऊर्जा कीमतों में तेजी से मार्जिन को हो रहे नुकसान को देखते हुए डालमिया सीमेंट ने बायोमास और औद्योगिक कचरे का उपयोग करने की पहल शुरू की है ताकि ईंधन कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव के प्रभाव से बचा जा सके। कंपनी वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2024 के बीच अपने पूंजीगत खर्च के लिए 10,000 करोड़ रुपये जुटाने की भी तैयारी कर रही है।
डालमिया सीमेंट (भारत) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी महेंद्र सिंघी ने कहा, ‘अब हम लगभग ऋण मुक्त हो चुके हैं। इस पूंजीगत खर्च में आंतरिक संसाधनों से जुटाई गई रकम और ऋण दोनों शामिल होंगे।’ कंपनी का शुद्ध ऋण बनाम एबिटा अनुपात 30 सितंबर 2021 के अनुसार 0.48 गुना था।
सिंघी ने कहा, ‘हमारी कुल ईंधन खपत में हमने ग्रीन ईंधन (बायोमास एवं औद्योगिक अपशिष्ट) के उपयोग को 12 फीसदी तक बढ़ा दिया है और अगले साल तक इसे 20 फीसदी तक बढ़ाने की योजना है। इसका उद्देश्य चरणबद्ध तरीके से जीवाश्म ईंधन के उपयोग को घटाना है।’
कंपनी का ग्रीन ईंधन वास्तव में एक औद्योगिक अपशिष्ट है जो रसायन, फार्मा एवं वाहन इकाइयों से पायरो-प्रॉसेसिंग के जरिये प्राप्त होता है। इससे कोयले पर निर्भरता घटाने में मदद मिलती है। सिंघी ने यह नहीं बताया कि ईंधन में इस बदलाव से लागत में कितनी बचत होगी। उन्होंने कहा, ‘कुल मिलाकर ग्रीन ईंधन की लागत हमारे उपयोग वाले सामान्य ईंधन की लागत के मुकाबले करीब 60 फीसदी कम होती है।’ कंपनी के ग्रीन ईंधन में बदलाव की प्रक्रिया फिलहाल शुरुआती चरण में है।
कोयले की ऊंची लागत के बावजूद कंपनी बेहतर इनवेंट्री के कारण सितंबर तिमाही का प्रबंधन करने में समर्थ रही। धीरे-धीरे ग्रीन ईंधन को अपनाने से अधिक इनपुट लागत के मोर्चे पर कंपनी को राहत मिलेगी। सितंबर तिमाही के दौरान डालमिया सीमेंट का एबिटा एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 11 फीसदी घटकर 621 करोड़ रुपये रहा।
जहां तक बिजली लागत में बढ़ोतरी का सवाल है तो सिंघी ने कहा कि मौजूदा क्लिंकर संयंत्रों में सुधार करने और नई प्रौद्योगिकी को अपनाने से बिजली की खपत में कमी आई है। सिंघी ने कहा, ‘हमारी प्रति टन बिजली की खपत 67 यूनिट प्रति टन थी जो अब घटकर 62 यूनिट प्रति टन रह गई है। यह न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर सबसे कम खपत है।’ इसके अलावा कंपनी अपनी समग्र विनिर्माण प्रक्रिया में सीसे के उपयोग में भी कमी ला रही है। इससे भी बिजली खपत को कम करने में मदद मिलेगी।