facebookmetapixel
Advertisement
भूराजनीतिक तनाव और IPO की चिंता के बीच IT शेयरों में गिरावटनिर्यात प्रोत्साहन मिशन की योजनाओं की समीक्षा संभव, कई योजनाओं को नहीं मिल रही पर्याप्त प्रतिक्रियाआशा भोसले का नया नगमा और खामोश सुरों की वापसी, निधन के बाद बढ़े डिजिटल व्यूजबिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचाने पर जोर, चार दिन में रेक लोडिंग 370 से बढ़कर 444 हुईअगस्त में वित्तीय क्षेत्र को मिला एफपीआई निवेश का एक तिहाई से ज्यादा हिस्साभारत को तेज विकास के लिए निर्यात, निवेश और विनिर्माण पर देना होगा जोर: आचार्यभारत के यात्री वाहन बाजार में पहली बार वैकल्पिक ईंधन वाहनों की बिक्री पेट्रोल से आगेबड़े कारोबारी समूह के निवेश से पश्चिम बंगाल में औद्योगिक गतिविधियों को मिलेगी रफ्ताररिश्वत के आरोपों पर PVR आईनॉक्स की शुरुआती जांच पूरी, कोई सबूत नहीं मिलामिंडा कॉर्प की वैश्विक बाजार में पकड़ मजबूत करने की तैयारी, निर्यात लक्ष्य 1,500 करोड़ रुपये

आउटसोर्सिंग में छोटे अनुबंधों का बड़ा खेल

Advertisement
Last Updated- December 05, 2022 | 4:23 PM IST


आईटी और आउटसोर्सिंग कंपनियां अब कम कीमत में छोटी अवधि के अनुबंधों की राह पर चल निकली हैं। परामर्श सेवा और शोध क्षेत्र की कंपनी डेटामॉनिटर के आंकड़े तो कम से कम इस बात की तस्दीक कर रहे हैं। इसकी ताजा रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में जनवरी 2007 से जनवरी 2008 तक होने वाले अनुबंधों में 41 फीसदी 3 से 5 साल और 36 फीसदी 5 से 10 साल के लिए हुए हैं। छोटी अवधि और कम लागत में होने वाले अनुबंधों में परिचालन का जोखिम बंट जाता है और इसमें व्यापार की मांग के  अनुसार नए संबंध भी बनते हैं। इसके साथ ही परामर्श देने वाली कंपनियों का मानना है कि आने वाले कुछ महीनों में आई टी कंपनियों के हिस्से में कुछ बड़े सौदे आ सकते हैं। इन कंपनियों का अनुमान है कि नये होने वाले अनुबंध 33.3 करोड़ डालर यानी करीब 1340 करोड़ रुपये के हो सकते हैं। डेटामॉनिटर ने इस साल होने वाले अनुबंधों के रुझान को भी दिखाया है। पिछले साल के आखिर में यह न्यूनतम स्तर पर आ गया था लेकिन चालू साल की पहली तिमाही में यह संभल भी गया। उदाहरण के तौर पर आई टी कंपनियों के सौदों में जनवरी 2008 में काफी तेजी देखी गई। इस महीने होने वाले सौदों में पिछले महीने की तुलना में 43 फीसदी का इजाफा हुआ। जनवरी 2008 में प्रोएक्टिव कम्युनिकेशन को मिला 60 अरब रुपये का अनुबंध सबसे बड़ा सौदा साबित हुआ। इस रिपार्ट में यह भी कहा गया है कि जनवरी 2008 में होने वाले अनुबंधों में केवल 5 अनुबंध 10 साल के लिए किये गये। इस दौरान होने वाले पूरे 144 अनुबंधों में 52 फीसदी 3 से 5 साल की अवधि के लिए हुए। आईबीएम, ईडीएस, एटीएेंडटी और एटोस ओरिजन जनवरी 2008 में सबसे ज्यादा अनुबंध पाने वाली कंपनियां रहीं। जनवरी 2008 में पिछली जनवरी के मुकाबले 13 फीसदी सौदे अधिक हुए। जनवरी में होने वाले सौदों में 62 फीसदी सौदे 100 करोड़ रुपये से कम के हुए, 24 फीसदी सौदे 40 से 100 करोड़ रुपये के बीच हुए और 22 फीसदी 40 करोड़ रुपये से कम के हुए। डेटामॉनिटर इंडिया के एक वरिष्ठ विश्लेषक कहते हैं कि आई टी और आउटसोर्सिंग कंपनियां वैश्विक स्तर पर महीने दर महीने के प्रदर्शन और अस्थायी दौर से प्रभावित हो रही हैं। इसके ठीक उलट महीने दर महीने के प्रदर्शन के आधार पर भारतीय कंपनियों में स्थिरता बनी हुई है और उनका मुनाफा भी बढ़ रहा है। अमेरिकी मंदी भी आई टी सेवाओं के बाजार को प्रभावित कर रही है लेकिन भारतीय कंपनियां इसके प्रभाव से बच निकलने में सफल रहेंगी। वैसे एशिया प्रशांत क्षेत्र में आई टी कंपनियों द्वारा किये गये सौदों में जनवरी 2008 में जनवरी 2007 की तुलना में 67 फीसदी का इजाफा हुआ है। जबकि इसी दौरान उत्तरी अमेरिकी कंपनियों के सौदों में संख्या की दृष्टि से कमी आई है। जनवरी 2007 में आई टी कंपनियों को बड़े सौदे सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और टेलीकॉम कंपनियों से मिले। इस दौरान हुए 10 बड़े सौदों में से 9 इन्हीं कंपनियों से मिले थे।

Advertisement
First Published - February 28, 2008 | 7:26 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement