एडटेक दिग्गज बैजूस (Byju’s) के सीएफओ अजय गोयल ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए ऑडिट पूरा करने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता (Vedanta) में वापस लौट जाएंगे।
कंपनी ने जारी किया बयान
कंपनी की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, शैक्षणिक जगत के दिग्गज प्रदीप कनकिया को वरिष्ठ सलाहकार के रूप में नियुक्त किया है। कंपनी के अध्यक्ष (वित्त) नितिन गोलानी को कंपनी के वित्त कार्य को संभालने के लिए भारत के मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) के रूप में अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।
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गोयल ने दी इस्तीफे की जानकारी
अजय गोयल ने कहा, ‘‘ मैं बैजूस के संस्थापकों तथा सहकर्मियों को तीन महीने में वित्त वर्ष 2022 का ऑडिट तैयार करने में मदद करने के लिए धन्यवाद देता हूं। मैं Byju’s में एक छोटे लेकिन प्रभावशाली कार्यकाल के दौरान मिले समर्थन की सराहना करता हूं।’’
कंपनी वित्त वर्ष 2022 के लिए वित्तीय परिणाम घोषित करने के लिए लंबे समय से कुछ मंजूरी का इंतजार कर रही है।
Vedanta के बोर्ड ने अजय गोयल को किया नियुक्त
वेदांता के बोर्ड ने मंगलवार, 24 अक्टूबर को कहा कि उसने 30 अक्टूबर, 2023 से कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) के रूप में अजय गोयल की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है।
वेदांता के संरचित री-हायरिंग प्रोग्राम ‘घरवापसी’ के हिस्से के रूप में, गोयल ने कंपनी में वापसी की। वेदांता ने इसकी सूचना एक फाइलिंग में दी।
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6 महीने बाद दे दिया Byju’s के CFO पद से इस्तीफा
गोयल ने एडटेक प्रमुख में शामिल होने के बमुश्किल 6 महीने बाद Byju’s के सीएफओ के पद से इस्तीफा दे दिया है।
Vedanta की CFO Sonal Shrivastava ने दिया इस्तीफा
Vedanta Limited अपने पुनर्गठन के दौर से गुजर रही है। इस बीच अरबपति अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) द्वारा नियंत्रित खनन उद्योग की इस दिग्गज कंपनी की मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) सोनल श्रीवास्तव (Sonal Shrivastava) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
ब्लूमबर्ग ने मामले से परिचित सूत्रों के हवाले से बताया था कि जून में कंपनी में शामिल हुईं सोनल श्रीवास्तव ने अग्रवाल को पिछले महीने कंपनी छोड़ने के अपने फैसले के बारे में सूचित किया था।
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Vedanta का होगा विभाजन, बनेगी 6 लिस्टेड कंपनियां
पिछले महीने वेदांत लिमिटेड ने खुद को छह लिस्टेड कंपनियों में विभाजित करने की योजना को मंजूरी दी थी। अग्रवाल को उम्मीद है कि इस कदम से निवेशक सीधे प्रमुख व्यवसायों की ओर आकर्षित होंगे और इसके घटक भागों के मूल्यांकन में सुधार होगा। इस बदलाव से अनिल अग्रवाल के लिए अपनी मूल कंपनी के ऋण भार को कम करने के लिए कुछ संपत्तियों को बेचना भी आसान हो जाएगा।