इंडिगो अब एकमात्र ऐसी विमानन कंपनी है जो आश्चर्यजनक रूप से देश के 60.4 प्रतिशत घरेलू मार्गों पर अकेले ही परिचालन कर रही है। एक दशक पहले उसके पास सिर्फ 22.3 प्रतिशत घरेलू मार्ग थे। इस तथ्य से यह बात जाहिर होती है कि उसके परिचालन संकट ने देश भर में हवाई यात्रा को क्यों पंगु बना दिया है। विमानन क्षेत्र का विश्लेषण करने वाली फर्म सिरियम की ओर से साझा किए गए 10 वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि जो पहले प्रतिस्पर्धी वितरण था वह कैसे एक ही हाथ में चला गया।
देश के कुछ सबसे व्यस्त मार्गों पर यह दबदबा साफ दिखता है। चेन्नई-कोयंबत्तूर और कोलकाता-हैदराबाद मार्गों पर गौर करें। इन मार्गों पर पिछले महीने कुल मिलाकर 927 निर्धारित उड़ानें (क्रमशः 472 और 455) हुईं या फिर चेन्नई-तिरुचिरापल्ली और अहमदाबाद-हैदराबाद सेक्टर को लें, जिनमें संयुक्त रूप से 688 उड़ानें (क्रमशः 360 और 328) दर्ज की गईं। इन सभी प्रमुख मार्गों पर खास बात यह है कि महीने भर में करीब 1,615 मासिक उड़ानों में से हरेक उड़ान इंडिगो की थी। किसी दूसरी कंपनी की एक भी उड़ान नहीं थी।
लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था। नवंबर 2015 में देश के घरेलू हवाई नेटवर्क में 355 अलग-अलग विशिष्ट मार्ग शामिल थे और इंडिगो उनमें से 79 पर अकेली थी। हालांकि इंडिगो तब भी सबसे बड़ी उड़ान कंपनी थी, लेकिन उसे फिर भी एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी अन्य विमानन कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा, जिनका अपने अपने विशेष क्षेत्रों में दबदबा था। आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2015 में एयर इंडिया 49 मार्गों पर जबकि स्पाइसजेट 41 मार्गों पर अकेली परिचालक थी।
प्रतिशत के लिहाज से देखा जाए तो नवंबर 2015 में भारत में लगभग 22.3 प्रतिशत घरेलू मार्गों पर केवल इंडिगो उड़ान भरती थी, 13.8 प्रतिशत पर केवल एयर इंडिया और 11.5 प्रतिशत पर स्पाइसजेट की उड़ानें थीं।
इसके 10 साल बाद जहां नवंबर 2025 तक अलग-अलग विशिष्ट घरेलू मार्गों की कुल संख्या लगभग तीन गुना बढ़कर 1,004 हो गई, वहीं इंडिगो का खास मार्ग नेटवर्क, जहां वह अकेली सिरमौर है, पिछले महीने तक लगभग आठ गुना बढ़कर 606 मार्गों तक फैल गया। इस भारी असंतुलन से जाहिर होता है कि पिछले 10 वर्षों में घरेलू हवाई बाजार के विस्तार का एक बड़ा हिस्सा एक ही विमानन कंपनी द्वारा किया गया है और हर 10 में से 6 घरेलू मार्ग पर कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है।
स्पाइसजेट और एयर इंडिया के खास क्षेत्र बड़े स्तर पर सिकुड़ चुके हैं। सिरियम के आंकड़ों के अनुसार पिछले महीने एयर इंडिया केवल 6 मार्गों पर और स्पाइसजेट 11 मार्गों पर अकेली परिचालक थी। प्रतिशत के लिहाज से देखा जाए तो नवंबर 2015 में भारत में लगभग 60.4 प्रतिशत घरेलू मार्गों पर केवल इंडिगो की उड़ानें थीं, 3 प्रतिशत पर केवल एयर इंडिया समूह (जिसमें एयर इंडिया एक्सप्रेस भी शामिल है) की और 1.1 प्रतिशत पर केवल स्पाइसजेट की उड़ानें थीं।