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Adani की ऊंची बोली के बाद केएसके महानदी के लिए अन्य दावेदावों ने भी दांव बढ़ाए

आईबीसी व्यवस्था से जुड़े सूत्रों ने केएसके महानदी को लेकर दिलचस्पी जगाने का श्रेय अदाणी समूह को दिया है।

Last Updated- October 26, 2024 | 8:38 AM IST
Gautam Adani
Representative Image

केएसके महानदी पावर के अधिग्रहण के लिए अदाणी समूह की तरफ से 12,500 करोड़ रुपये की बोली लगाए जाने के बाद अन्य बोलीदाता भी अपनी पेशकश संशोधित करने के लिए प्रेरित हुए हैं और इसका अंतिम आंकड़ा बहुत अधिक हो सकता है। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

केएसक महानदी पावर के ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) की तरफ से बोली को चुनौती देने वाली व्यवस्था शुरू किए जाने के बाद गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) की पूरी वसूली हो जाने की उम्मीद है। हालांकि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत संचालित कार्यवाही में ऐसा हो पाना लगभग दुर्लभ है।

आईबीसी व्यवस्था से जुड़े सूत्रों ने केएसके महानदी को लेकर दिलचस्पी जगाने का श्रेय अदाणी समूह को दिया है। अदाणी समूह ने इस संकटग्रस्त कंपनी के लिए 12,500 करोड़ रुपये की शुरुआती ऊंची बोली लगाई है। यह बोली दूसरे स्थान पर मौजूद बोलीदाता की तुलना में 4,800 करोड़ रुपये यानी 62 प्रतिशत अधिक है। इसका नतीजा यह निकला है कि एनटीपीसी समेत 10 मौलिक बोलीदाताओं में से छह ने अब अदाणी समूह की लगाई बोली के आसपास के संशोधित प्रस्ताव पेश किए हैं। यह मजबूत प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है जिससे परिसंपत्ति मूल्य भी बढ़ेगा।

उद्योग के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि यह अधिकतम मूल्य हासिल करने पर आईबीसी के जोर को दर्शाता है। अदाणी की प्रतिस्पर्धी बोली केएसके महानदी के 10,000 करोड़ रुपये के कथित नकद भंडार और 4,000 करोड़ रुपये की व्यापार प्राप्तियों को जोड़कर करीब 27,000 करोड़ रुपये हो जाती है। इसका मतलब है कि कर्जदाताओं को बकाया कर्ज के 92 प्रतिशत की वसूली हो सकती है।

छत्तीसगढ़ में स्थित केएसके महानदी की स्थापित क्षमता 1,800 मेगावाट है। करीब 29,330 करोड़ रुपये के कर्ज बोझ वाली इस परियोजना को 2019 में दिवाला समाधान प्रक्रिया में लाया गया था। अदाणी पावर की 12,500 करोड़ रुपये की बोली प्रतिस्पर्धी संस्थाओं के बीच सबसे ऊंची पेशकश थी।

इस प्रक्रिया में जेएसडब्ल्यू एनर्जी, जिंदल पावर, वेदांता, एनटीपीसी और कोल इंडिया जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल थीं। लेकिन उनकी बोलियां 6,500 करोड़ रुपये से 7,700 करोड़ रुपये के बीच थीं। इसके बाद कर्जदाताओं की समिति ने बोली चुनौती व्यवस्था अपनाने का फैसला किया। नई व्यवस्था के तहत बाकी दावेदारों ने बढ़ी हुई बोलियां लगाई हैं।

First Published - October 26, 2024 | 8:38 AM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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