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Adani मामले से सौर ऊर्जा क्षेत्र में चिंता, सेकी की भूमिका पर उठे सवाल

एक ऊर्जा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'पूरे उद्योग को सदमा लगा है और वहां अविश्वास दिख रहा है।'

Last Updated- November 24, 2024 | 10:13 PM IST
Concern in solar energy sector due to Adani case, questions raised on role of SECI अदाणी मामले से सौर ऊर्जा क्षेत्र में चिंता, सेकी की भूमिका पर उठे सवाल

पिछले सप्ताह अदाणी समूह और न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध एज्योर पावर के खिलाफ अमेरिका में लगाए गए आरोपों के बाद भारतीय सौर ऊर्जा क्षेत्र उसके प्रभाव से निपटने की तैयारी कर रहा है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) द्वारा नीलाम की गई 12 गीगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजना अदाणी समूह और कई राज्यों के साथ इस विवाद के बीच में है। मगर सौर ऊर्जा उद्योग भी इस गंभीर मामले में सहमा हुआ है।

एक ऊर्जा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘पूरे उद्योग को सदमा लगा है और वहां अविश्वास दिख रहा है।’ उन्होंने कहा कि भारत में इस घटनाक्रम के अलावा अमेरिका के अगले राष्ट्रपति के रूप में डॉनल्ड ट्रंप की जीत भी भारत में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की रफ्तार और वित्तीय लागत को भी प्रभावित कर सकती है।

ऊर्जा क्षेत्र के सौदों और निवेशों पर परामर्श एक कानूनी फर्म के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘यह अक्षय ऊर्जा क्षेत्र और भारत के लिए काफी नुकसानदेह है।’ अधिकारी ने कहा कि हालिया घटनाक्रम को देखते हुए तमाम निवेशकों के बीच काफी चर्चा हुई है लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उद्योग के कई वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने देश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण पर ताजा घटनाक्रम के संभावित प्रभाव पर चिंता जताई है। उन्होंने परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया में सेकी की भूमिका के बारे में भी आशंका जताई है।

एक प्रमुख ऊर्जा कंपनी के वरिष्ठ कार्याधिकारी ने कहा, ‘सेकी के एलओए का मानक काफी सख्त था। सरकार के समर्थन को देखते हुए घरेलू और वैश्विक फाइनैंसिंग एजेंसियां उस पर काफी भरोसा कर रही थीं। मगर हालिया घटनाओं के मद्देरजर सेकी की भूमिका धुंधली होती दिख रही है। हमें डर है कि ब्याज दर भी बढ़ सकती है।’ अपने प्रकार की इस पहली निविदा का उद्देश्य एक सौर ऊर्जा संयंत्र के साथ-साथ एक सौर विनिर्माण इकाई स्थापित करना भी था।

अदाणी ग्रीन और एज्योर पावर ही इसके दो विजेता थे और दोनों ने 2.92 रुपये प्रति यूनिट की बोली लगाई थी जो सेकी द्वारा निर्धारित 2.93 रुपये प्रति यूनिट की अधिकतम शुल्क दर से कम है। सेकी को जब इन परियोजनाओं के लिए कोई खरीदार नहीं मिल पाया तो दोनों कंपनियों ने कथित तौर पर कई राज्यों से संपर्क किया और रिश्वत की पेशकश की। न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले के यूनाइटेड स्टेट्स अटॉर्नी को दिए गए दस्तावेज में ऐसा बताया गया है।

जिन राज्यों पर सवाल उठाया गया है उनमें आंध्र प्रदेश भी शामिल है। उसने इन कंपनियों द्वारा समझाए जाने के बाद 2.49 रुपये प्रति यूनिट भाव पर उस परियोजना से बिजली खरीदने के लिए सहमति जताई थी। 15 सितंबर 2021 को जारी एक पत्र के अनुसार, सेकी ने आंध प्रदेश ऊर्जा विभाग को 2.49 रुपये प्रति यूनिट भाव पर उस परियोजना से बिजली खरीदने का आग्रह किया था।

पत्र में कहा गया है, ‘डेवलपरों ने देश भर में सौर परियोजनाओं के लिए हाल में जारी निविदाओं में सौर बिजली शुल्क दर में कटौती और प्रस्तावित क्षमता के मद्देनजर सेकी के व्यापार मार्जिन सहित 2.49 रुपये प्रति यूनिट की दर पर 9 गीगावॉट की पेशकश की है।’

बिज़नेस स्टैंडर्ड ने भी वह पत्र देखा है। उसमें कहा गया है, ‘सेकी में हमारा मानना है कि यह परियोजना आंध्र प्रदेश सरकार की निविदा के लिए उपयुक्त विकल्प होगी। साथ यह लागत सहित अपने सभी घोषित उद्देश्यों को हासिल करेगी और आर्थिक लिहाज से भी सस्ती होगी। इसके अलावा आंध्र प्रदेश आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने में भी मदद करेगा।’

केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बारे में कहा कि संशोधित शुल्क दर के बारे में सभी राज्यों को जानकारी देना और ग्राहकों की तलाश करना सेकी की सामान्य गतिविधियां हैं। उन्होंने अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा कि मुकदमा में सेकी कोई पक्ष नहीं है और अमेरिकी जांच एजेंसियों द्वारा भी उसका नाम नहीं लिया गया है।

अधिकारी ने कहा, ‘यह बात बिल्कुल साफ है कि सेकी की भूमिका के बारे में कोई भी सबूत नहीं है। सेकी को इस बात से भी कोई सरोकार नहीं है कि राज्य किस शुल्क दर के साथ बिजली खरीद अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत होते हैं। सेकी न तो कोई नियामक है और न ही कोई जांच एजेंसी। वह तो महज एक वाणिज्यिक कंपनी है।’ उन्होंने कहा कि अगर निविदा शर्तों का उल्लंघन हुआ है तो कार्रवाई अवश्य की जाएगी। सेकी के प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर जानकारी के लिए भेजे गए ईमेल का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं दिया।

First Published - November 24, 2024 | 10:13 PM IST

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