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अगस्त की जबरस्त बारिश ने मानसून को बनाया सुपरहिट

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Last Updated- December 07, 2022 | 6:06 PM IST

देश के आंतरिक इलाके, महाराष्ट्र तथा गुजरात और राजस्थान के काफी बड़े हिस्से में मानसून ने जुलाई में काफी बेरुखी दिखाई।


जुलाई महीने में इन इलाकों में सूखे की स्थिति पैदा हो गई लेकिन अगस्त मध्य तक हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। अगस्त का तीसरा हफ्ता बीतते-बीतते मानसून ने देश में इतनी बारिश कराई कि पांच साल का रेकॉर्ड बन गया। मानसून के लिहाज से यह साल पांच साल में सर्वश्रेष्ठ बन चुका है।

इसका परिणाम भी सकारात्मक रहा है। चिंता जतायी जा रही थी कि मौजूदा खरीफ सीजन में उत्पादन में खासी कमी हो जाएगी। लेकिन जुलाई अंत और अगस्त के पहले पखवाड़े तक आते-आते खरीफ उत्पादन में कमी की यह आशंका गलत साबित होने लगा है। हालांकि दलहन का उत्पादन कम होने की पूरी गुजांइश जतायी जा रही है।

जानकारों के मुताबिक, जब इसकी बुआई का ‘पीक टाइम’ था तब अपर्याप्त बारिश के चलते मौसम में काफी कम नमी थी। परिणाम यह हुआ कि दलहन का रकबा इस साल काफी घटा है। मोटे अनाज का उत्पादन भी इस साल घटने की संभावना है। हालांकि चावल उत्पादन में खासी बढ़ोतरी होने से खाद्यान्न उत्पादन में होने वाली कमी को पाट लिए जाने की उम्मीद जतायी जा रही है।

कपास के उच्च उत्पादकता, कीटाणुरोधी और ट्रांसजेनिक गुणों वाले बीटी बीजों की वजह से रकबे में कमी होने के बावजूद इसके उत्पादन में थोड़ी ही कमी होने की संभावना है। वैसे भी अन्य फसलों की तुलना में कपास का रकबा बहुत कम है। इसके अलावा खबर है कि गुजरात सहित कई राज्यों में इसकी दुबारा बुआई की गई।

तिलहन का उत्पादन संतोषजनक रहने की उम्मीद की जा रही है। अनुमान जताया गया था कि मूंगफली के कुल उत्पादन में कमी होगी पर सोयाबीन की अच्छी फसल से तिलहन का कुल उत्पादन पहले जितना ही रहने की उम्मीद है। गन्ना उत्पादन भी इस साल घटने की उम्मीद है। लेकिन जानकारों के अनुसार, गन्ने की खेती के लिए यह सामान्य सी बात है। हरेक तीन साल पर गन्ने के रकबे और उत्पादन में कमी आती है। अगस्त शुरुआत तक देश के जलभंडारों में पानी का स्तर जहां न्यून स्तर पर था, वहीं तीन हफ्ते बाद जलस्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

8 अगस्त तक देश के कुल 81 जलभंडारों में पानी औसत स्तर से 8 फीसदी नीचे था। महज 6 दिन बाद इन जलाशयों के भंडार में 13 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। 14 अगस्त की स्थिति यह रही कि इन जलाशयों के स्तर सामान्य औसत से 5 फीसदी ज्यादा रहे। फिर भी पिछले साल की तुलना में पानी के ये भंडार 22 फीसदी कम हैं। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल 14 अगस्त को जलाशयों में तकरीबन 95 अरब घन मीटर पानी सुरक्षित था जबकि इस साल इन जलाशयों में केवल 74.3 अरब घन मीटर पानी ही जमा है।

वैसे अभी मानसून के विदा होने में कुछ हफ्ते बाकी हैं लिहाजा उम्मीद की जा रही है कि जलाशयों के जलस्तर में सुधार होगा। मौसम विभाग का कहना है कि उड़ीसा और पड़ोसी राज्यों के ऊपर चक्रवात जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। इससे अगले कुछ दिनों में कई राज्यों में मूसलाधार बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा देश के अन्य इलाकों के बारे में भी अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले दो दिनों में जमकर बारिश होगी। ऐसे में जलभंडारों के जलस्तर में सुधार होने की पूरी गुंजाइश है।

1 जून से 13 अगस्त के बीच हुई बारिश के बारे में मौसम विभाग ने कहा है कि 1 जून से 13 अगस्त के बीच 588.1 मिलीमीटर बारिश हुई है। सामान्यत: इन दिनों 575 मिलीमीटर बारिश हुआ करती है। इस तरह इस साल औसत से 2 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी है। महत्वपूर्ण बात कि इस बार 1 जून से मध्य अगस्त तक देश के  कुल 612 जिलों में से 77 फीसदी में औसत या औसत से अधिक बारिश हुई है। पिछले 5 साल में मानसून की यह सबसे अच्छी स्थिति है। इस साल केवल 3 फीसदी जिले ऐसे हैं जहां बहुत कम बारिश हुई है।

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First Published - August 23, 2008 | 4:47 AM IST

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