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तो क्या महंगी हो जाएगी Sugar? चीनी मिल महासंघ का बड़ा खुलासा

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मुश्किल में है सरकारी नीतियां, क्योंकि चीनी उत्पादन में 16% से ज्यादा की गिरावट आई है- NFCSF

Last Updated- March 16, 2025 | 6:59 PM IST
Sugar prices in India at lowest level in 1-1/2 years due to adequate supply भारत में चीनी की कीमतें पर्याप्त आपूर्ति के कारण 1-1/2 साल में अपने सबसे निचले स्तर
प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत का चीनी उत्पादन चालू सत्र 2024-25 में अब तक 16.13 प्रतिशत घटकर 2.37 करोड़ टन रह गया है, जिससे उच्च प्रारंभिक अनुमानों के आधार पर तैयार की गई सरकारी नीतियों के लिए चुनौतियां पैदा हो गई हैं। सहकारी संस्था एनएफसीएसएफ ने रविवार को यह जानकारी दी।

राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ (NFCSF) ने चीनी उत्पादन आंकड़ों में ‘अस्पष्टता’ पर चिंता व्यक्त की है, क्योंकि 2024-25 गन्ना पेराई सत्र (अक्टूबर-सितंबर) शुरू में अनुमानित उत्पादन से काफी कम उत्पादन के साथ समाप्त होने वाला है। उद्योग निकाय ने बयान में कहा कि सत्र शुरू होने के बाद से चीनी उत्पादन अनुमानों को बार-बार संशोधित कर नीचे लाया गया है, जिससे सरकारी नीतियों के लिए चुनौतियां पैदा हो रही हैं, जो 3.33 करोड़ टन के प्रारंभिक अनुमान के आधार पर तैयार की गई थीं।

एनएफसीएसएफ ने कहा, “उद्योग के एक वर्ग ने केंद्र सरकार को 3.33 करोड़ टन चीनी उत्पादन का अनुमान पेश किया। उसके आधार पर केंद्र सरकार ने अपनी नीतियां बनानी शुरू कर दीं।” केंद्र सरकार ने प्रारंभिक उत्पादन अनुमान के आधार पर जनवरी, 2025 में 10 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी, लेकिन अब वास्तविक उत्पादन के आंकड़े कम होने के कारण आपूर्ति-मांग में असंतुलन का सामना करना पड़ रहा है।

एनएफसीएसएफ के आंकड़ों के अनुसार, भारत के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में उत्पादन चालू सत्र में 15 मार्च तक घटकर 78.6 लाख टन रह गया, जबकि एक साल पहले यह एक करोड़ टन था। देश के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में उत्पादन 88.5 लाख टन से घटकर 80.9 लाख टन रह गया, जबकि इसी अवधि में कर्नाटक का उत्पादन 49.5 लाख टन से घटकर 39.1 लाख टन रह गया।

एनएफसीएसएफ के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल ने कहा कि अधिकांश राज्यों में पेराई सत्र मार्च के अंत तक समाप्त हो जाएगा, जबकि उत्तर प्रदेश की मिलें अप्रैल के मध्य तक चलेंगी। पाटिल ने पेराई अवधि, विशेष रूप से महाराष्ट्र में कम होने पर चिंता जताई, जहां पेराई सत्र केवल 83 दिनों तक चला जबकि आर्थिक रूप से व्यवहार्य अवधि 140-150 दिन है।

(एजेंसी इनपुट के साथ) 

 

 

 

 

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First Published - March 16, 2025 | 6:48 PM IST

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