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रीपो रेट में कटौती के बाद रुपये में कमजोरी, डॉलर के मुकाबले 89.99 पर टिकी

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बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने आगे और गिरावट रोकने के लिए 90.07 प्रति डॉलर पर डॉलर की बिक्री के जरिये विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया

Last Updated- December 05, 2025 | 10:44 PM IST
rupees

रीपो दर में भारतीय रिजर्व बैंक की 25 आधार अंकों की कटौती के बाद रुपये ने शुरुआती बढ़त गंवा दी। नीतिगत दर की घोषणा से पहले स्थानीय मुद्रा 89.70 पर कारोबार कर रही थी। हालांकि अंत में यह डॉलर के मुकाबले 89.99 पर टिकी। एक दिन पहले यह 89.98 पर बंद हुई थी।

आईएफए ग्लोबल के संस्थापक और सीईओ अभिषेक गोयनका ने कहा, अधिक उदार और विकासोन्मुखी रुख भारत के ब्याज दरों के लाभ को कम करता है, जिससे विदेशी निवेश कम रह सकता है और रुपया अल्पावधि में कुछ हद तक कमजोर रह सकता है। हालांकि आरबीआई ने बाजार हालात को सुचारु बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है। इससे अस्थिरता का प्रबंध करने के लिए उसके निरंतर हस्तक्षेप का संकेत मिलता है जबकि उसने घरेलू नकदी प्रचुर बनाए रखी है।

उन्होंने कहा, कुल मिलाकर एमपीसी का झुकाव स्पष्ट रूप से कम मुद्रास्फीति वाले दौर में वृद्धि को समर्थन देने की ओर है, लेकिन इसका यह भी अर्थ है कि रुपया वैश्विक जोखिम मनोबल, तेल कीमतों और पूंजी निवेश के प्रति संवेदनशील बना रहेगा। बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने आगे और गिरावट रोकने के लिए 90.07 प्रति डॉलर पर डॉलर की बिक्री के जरिये विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया।

आरबीआई गवर्नर ने नीतिगत समीक्षा के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत के पास पर्याप्त नकदी भंडार है, चालू खाते का घाटा करीब 1 फीसदी पर प्रबंधनीय है और मज़बूत फंडामेंटल के बल पर अच्छे पूंजी निवेश की उम्मीद है। कुल मिलाकर देश के बाह्य क्षेत्र की स्थिति बहुत अच्छी है। उन्होंने कहा, बाह्य क्षेत्र के मामले में हम बहुत ही आरामदायक स्थिति में हैं। मुझे उम्मीद नहीं है कि चालू खाते का घाटा 2 फीसदी या उससे अधिक के स्तर तक बढ़ेगा। कुल मिलाकर बाह्य क्षेत्र स्थिर और सहज बना हुआ है।

28 नवंबर को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 686 अरब डॉलर रहा जो करीब 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है। अमेरिकी व्यापार समझौते पर (जिसने विदेशी मुद्रा बाजार की धारणा को प्रभावित किया है) गवर्नर ने कहा कि भारत काफी हद तक घरेलू मांग से चलने वाली अर्थव्यवस्था है और उच्च टैरिफ के प्रभाव को पहले ही आरबीआई के अनुमानों में शामिल कर लिए गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘बहुत ज्यादा असर नहीं हुआ है क्योंकि आप जानते हैं कि हमारी मांग अधिकतर घरेलू है। निश्चित रूप से कुछ सेक्टर इससे प्रभावित हो रहे हैं। हम उन सेक्टोरं के बारे में जानते हैं और हमने कुछ राहत पैकेज दिए हैं। भारत सरकार ने भी राहत पैकेज दिया है। मुझे लगता है कि यह हमारे लिए एक अवसर है और निर्यातकों ने पहले ही अपनी उत्पादकता और विविधीकरण सहित अन्य चीजों पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। हमें आगे चलकर इससे और मजबूती से उबरने में सक्षम होना चाहिए।’

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First Published - December 5, 2025 | 10:00 PM IST

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