facebookmetapixel
Advertisement
अमेरिका-ईरान डील से भारत को मिलेगा बड़ा फायदा? गोल्डमैन सैक्स ने बढ़ाया GDP ग्रोथ का अनुमानआइसलैंड में गूंजी भारतीय आमों की मिठास, निर्यात की संभावना तलाशने में जुटी सरकारExplainer: नौकरी और फ्रीलांसिंग दोनों से हुई कमाई? नोटिस से बचने के लिए समझ लें टैक्स के नियमअब बच्चों से सीख रहे हैं माता-पिता! UPI से निवेश तक Gen Z संभाल रही है परिवार की फाइनेंस क्लासOPS पर सरकार का बड़ा फैसला! 2004 के बाद नौकरी वालों को भी मिलेगी पुरानी पेंशन? जानिए पूरा मामलाअयोध्या राम मंदिर दान विवाद: चंपत राय व अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा, पुलिस ने 8 आरोपियों को किया गिरफ्तारSEBI ने नहीं मानी अनिल अंबानी की बात, ₹6,526 करोड़ के मामले में सेटलमेंट की अर्जी खारिजबारिश ने दिया धोखा तो महंगी हो जाएंगी दाल, सब्जियां और तेल! जानिए कितना बढ़ सकता है असरChatGPT बनाने वाली OpenAI का IPO टला! अब 2027 तक करना पड़ सकता है इंतजार, जानिए क्यों बदला प्लानदक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, कोस्पी 8% से ज्यादा टूटा; 20 मिनट के लिए रोकनी पड़ी ट्रेडिंग

संशोधित विधेयक पर होगा विचार

Advertisement
Last Updated- December 05, 2022 | 9:18 PM IST

वायदा बाजार आयोग ने उम्मीद जाहिर की है कि संसद के अगले सत्र में वायदा अनुबंध को लेकर संशोधित विधेयक पर विचार किया जाएगा।


गत सात अप्रैल को इस मामले में एफएमसी को अधिकार देने वाली अधिसूचना की अविध समाप्त हो गई। एफएमसी के अध्यक्ष बीसी खटुआ ने बताया कि इस विधेयक को संसद की लगभग मंजूरी मिल चुकी है और इसे फिर से जारी करने के पहले इसमें कुछ तकनीक सुधार की जरूरत है।


 आमतौर पर ऐसा होता है कि अगर इससे जुड़ी अधिसूचना की अवधि समाप्त होने के बाद संसद सत्र के छह सप्ताह तक इस संशोधित विधेयक को अपनी मंजूरी नहीं दी जाती है तो यह अधिसूचना बेकार मानी जाती है। खटुआ ने बताया कि हालांकि इस अधिसूचना की अवधि समाप्त होने से निवेशकों के निवेश में कोई कमी नहीं दर्ज की गई है। और न ही निवेशकों के विश्वास में कोई कमी आयी है।


उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा भी नहीं है कि इस दौरान नियामक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती है या नियामक के अधिकारों में कोई कमी आ जाती है। इस साल जनवरी महीने में कैबिनेट एफएमसी को स्वायत्तता देने के लिए अधिसूचना जारी करने का फैसला किया था। ताकि इससे निवेशकों में विश्वास जग सके। इधर नियामक भी जिंस कारोबार के विभिन्न क्षेत्रों के लिए दिशा निर्देश तय करने के संबंध में मसौदा तैयार कर रहा है।


खटुआ ने इस बात से इनकार किया कि कृषि व गैर कृषि वस्तुओं के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत है। खटुआ सवाल करते हैं कि जिन वस्तुओं के वायदा कारोबार पर रोक लगा दी गई है क्या उनके मूल्यों में बढ़ोतरी दर्ज नहीं की गई है। क्या इससे इन चीजों के मूल्य को नियंत्रित कर लिया गया है?


गेहूं व उड़द जैसी वस्तुओं के वायदा कारोबार पर रोक लगा दी गई है। कृषि से जुड़ी या उद्योग से जुड़ी वस्तुओं की कीमत मांग व पूर्ति के सिध्दांत से तय होती है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि महंगाई के लिए वायदा कारोबार जिम्मेदार है।

Advertisement
First Published - April 12, 2008 | 12:17 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement