वैश्विक कालीमिर्च बाजार इस समय 2006 के संकट के बाद सबसे गंभीर दौर से गुजर रहा है। सभी उत्पादक इलाकों में दिन प्रतिदिन कालीमिर्च की कीमतें धराशायी हो रही हैं। इस समय भारत में इसकी कीमतें 2006 के बाद गिरकर सबसे कम स्तर, 10,200 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई हैं। जून 2006 में एएसटीए […]
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जायफल और जावित्री की भारी कमी की वजह से कीमतों पर दबाव बना हुआ है। ताजा फसलों की आपूर्ति में कमी आने का भी असर पड़ रहा है और बेहतरीन गुणवत्ता वाली जावित्री की कीमत 510-540 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। छिलके वाले जायफल की कीमत बढ़कर 170 रुपये प्रति किलो हो गई है […]
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इस बार मिर्च का मौसम तीन महीने देरी से शुरू होने के आसार हैं। इसकी प्रमुख वजह यह है कि पिछले साल बुआई के दौरान देर से बारिश हुई थी। सामान्यतया जनवरी के तीसरे सप्ताह में मिर्च आनी शुरू हो जाती है। इस समय गुंटूर के बाजार में करीब 30,000 से 40,000 बोरी मिर्च प्रतिदिन […]
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होली पर भी मंदी का रंग सिर चढ़ कर बोल रहा है। रंगों का बाजार फीका नजर आ रहा है। पिछले साल के मुकाबले रंगों के कारोबार में 30 फीसदी की कमी आने का अनुमान है। बिक्री में कमी को देखते हुए कई कारोबारियों ने रंग के कारोबार से अपना हाथ खींच लिया है। रंगों […]
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पांच साल पहले प्रयोग के तौर पर की गई शुरुआत इस साल होली के मौके पर उत्तर प्रदेश के बाजारों में अपना रंग दिखा रही है। हर्बल गुलाल और प्राकृतिक रंगों की मांग बढ़ रही है। परंपरागत किराना किरानों की दुकानों में इस बार रसायनिक रंगो से ज्यादा मांग हर्बल गुलाल और टेसू के रंगों […]
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भारतीय समुद्री बंदरगाहों पर कोई ऐसी व्यवस्था नहीं है, जिससे निर्यात या आयात किए जाने वाले माल में खतरनाक रेडियोएक्टिव तत्वों की पहचान की जा सके। इसी कमजोरी के चलते भारतीय बंदरगाहों से निर्यात किए जाने वाले तमाम निर्यात सौदों में अमेरिका और यूरोपीय संघ के बंदरगाहों पर 2007 से ही रेडियोएक्टिव तत्व पाए जा […]
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अगर चीन से आयात होने वाले एल्युमीनियम पर 10 प्रतिशत से कम आयात शुल्क लगाया जाता है, तो भारत के एल्युमीनियम उत्पादकों को संरक्षण देने की सरकार की नीति पर पानी फिर सकता है। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और विश्लेषकों का मानना है कि 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाए जाने पर ही सही मायने में […]
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मंदी के इस दौर में भी सोयाबीन की खली के निर्यातकों के चेहरे पर मुस्कुराहट है। इसकी कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बाद भी निर्यात मांग में कोई कमी नहीं आई है। सोयाबीन की खली का निर्यात गत चार महीनों में (अक्टूबर, 2008 -जनवरी, 2009) 3000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है। […]
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आनुवांशिक रूप से परिवर्धित चावल के बीजों का परीक्षण किया जा रहा है। ये बीज कम पानी में भी उगाए जा सकते हैं। इन परिवर्धित बीजों (जीएम)का व्यावसायीकरण करने में कम से कम 8 साल लग जाएंगे। यह कहना है कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड (एएसआरबी)के चारूदत्ता दिगंबराव माई का। पहले से ही पॉली हाउस में […]
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यूरोप को निर्यात किए जाने वाले निर्यात में एक बार फिर रेडियोएक्टिव स्टील का मामला सामने आया है। इसके चलते इंजीनियरिंग के सामानों के 2300 करोड़ डॉलर के निर्यात पर संकट के बादल छा गए हैं। यह मामला सबसे पहले 2007 में सामने आया था, जो अब एक गंभीर मसला बन गया है। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट […]
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