ब्रांडेड ईंधन की बिक्री (खासकर डीजल) में इस साल के दौरान करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसकी प्रमुख वजह ज्यादा उत्पाद शुल्क और मांग में आई सामान्य कमी है। जून 2008 में सरकार ने नान-ब्रांडेड डीजल और पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 1 रुपये प्रति लीटर कम कर दिया था। वहीं ब्रांडेड […]
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यूपोपियन संसद के सदस्यों (एमईपी) की एक रिपोर्ट से भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर हो रही बातचीत खटाई में पड़ सकती है। सीईपीए में कर मुक्त सामान व सेवाओं और निवेश का मसला शामिल है। इस रिपोर्ट में सीईपीए में मानवाधिकारों और लोकतंत्र के मसले को शामिल करने […]
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चीनी मिलों को ‘एडवांस लाइसेंसिंग’ के तहत आयातित कच्ची चीनी के बदले चीनी निर्यात करने की चिंता अभी से सताने लगी है। उनका कहना है जब बीज नहीं बचेंगे तो अगले साल गन्ने के उत्पादन में और कमी आएगी। लिहाजा घरेलू खपत के लिए ही चीनी की कमी रहेगी तो वे निर्यात कहां से करेंगे। […]
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मंदी की आह ने देश के प्लास्टिक कारोबारियों के भी कान खड़े कर दिये है। कच्चे माल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी और मांग में आ रही कमी से पिछले छह महीनों के दौरान ही प्लास्टिक कारोबार 20 से 25 फीसदी तक सिमट गया है। पिछले एक साल के दौरान प्लास्टिक के कच्चे माल पॉलिमर […]
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वैश्विक कालीमिर्च बाजार इस समय 2006 के संकट के बाद सबसे गंभीर दौर से गुजर रहा है। सभी उत्पादक इलाकों में दिन प्रतिदिन कालीमिर्च की कीमतें धराशायी हो रही हैं। इस समय भारत में इसकी कीमतें 2006 के बाद गिरकर सबसे कम स्तर, 10,200 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई हैं। जून 2006 में एएसटीए […]
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तिलहन की फसल खराब होने की वजह से इस बार इसके उत्पादन लक्ष्य में 18 फीसदी की गिरावट होने की अंशका व्यक्त की गई है। उत्पादन कम होने से तिलहन का आयात तो बढ़ेगा, लेकिन मंदी के चलते खाद्य तेलों की कीमतों में कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला है। तिलहन में सबसे ज्यादा कमी […]
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सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से दिए जाने वाले खाद्यान्न पर सब्सिडी बढ़ी है। लेकिन यह गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) के तबके के लिए नहीं बल्कि गरीबी रेखा से ऊपर (एपीएल) जीवनयापन करने वाले लोगों को लाभ पहुंचा रही है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के 5 साल के कार्यकाल के दौरान बढ़ी […]
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सरकार ने मंदी की मार झेल रहे 77,000 करोड़ रुपये के रत्न और आभूषण क्षेत्र को निराश कर दिया है। कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को वाणिज्य सचिव गोपाल पिल्लई से मुलाकात की, लेकिन उनकी तरफ से कोई भी सकारात्मक संकेत नहीं मिला। कारोबारियों से बातचीत करने के बाद पिल्लई ने कहा कि हम […]
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किसी भी मुश्किल दिनों में सरकार के लिए यह बहुत सामान्य बात होती है कि वह चीनी, कपास और जूट का भंडार तैयार करने के लिए पैसे खर्च करे। चीनी के मामले में दो सीजन पहले ऐसा हो चुका है। इसके अलावा सरकारी एजेंसियां न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उत्पादों की खरीद में भी शामिल […]
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गुजियां नहीं बनेगी, लोग पकवान नहीं खाएंगे तो खाद्य तेल कौन खरीदेगा। खाने-पीने के लिए मशहूर होली पर्व के अवसर पर इस बार खाद्य तेल व्यापारियों की तबियत रंगीन नजर नहीं आ रही है। पहले से ही मंदी का दौर झेल रहे कारोबारियों में होली के दौरान और सुस्ती छा गयी है। क्योंकि उठाव में […]
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