facebookmetapixel
Advertisement
अच्छे दिनों में राजकोषीय गुंजाइश न बनाना भारत की बड़ी भूल, आर्थिक संकट में विकल्प हुए सीमितEditorial: फेड चीफ के सख्त रुख और ब्याज दर बढ़ने के डर से सहमा ग्लोबल मार्केटफार्मा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क के सिस्टम में बड़ी सेंधमारी, हैकर्स ने मांगी 2.5 करोड़ डॉलर की फिरौतीमहंगाई दर को लेकर सतर्क रहना जरूरी, नीतिगत दरों में बदलाव के लिए करना होगा इंतजार: RBIटेलीग्राम बैन पर केंद्र सरकार के फैसले को दिल्ली HC की मंजूरी, कोर्ट ने कहा: यह कदम अनुचित नहींमुकेश अंबानी का बड़ा बयान: आयातित ऊर्जा पर निर्भरता लंबे समय के लिए ठीक नहीं, ग्रीन एनर्जी में निवेश बढ़ाएगी RILईशा अंबानी का मेगा प्लान: ₹1 लाख करोड़ के राजस्व लक्ष्य के साथ देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनी बनेगी RCPLमुकेश अंबानी का बड़ा ऐलान: जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा AI कंप्यूट प्लेटफॉर्म बनाएगी रिलायंसGold Price Crash: फेड के सख्त रुख और मजबूत डॉलर से टूटा सोना, लगातार तीसरे सप्ताह आई भारी गिरावटReliance Stocks: JIO IPO से चमकेगी रिलायंस की किस्मत, शेयरों की रेटिंग में बड़े सुधार के संकेत

घटेंगी ईंधन की कीमतें!

Advertisement
Last Updated- December 08, 2022 | 1:07 AM IST

महंगे पेट्रोल-डीजल से परेशान लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।


पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने कहा कि सरकार शुक्रवार को होने वाली ओपेक की बैठक के प्रभावों का आकलन करने के बाद पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की कीमतों की समीक्षा करेगी।

सरकार अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर नजर रखे हुए है और प्रस्तावित ओपेक की बैठक में निर्णय के बाद देखेंगे कि तेल की कीमतों में क्या रुख रहेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें जुलाई के 147 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से घटकर करीब आधे के स्तर पर आ गई हैं।

देवड़ा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में कमी आने के बावजूद पेट्रोल, डीजल, केरोसीन और एलपीजी के मामले में सरकार को घाटा हो रहा है, क्योंकि रुपये और डॉलर की कीमतों का संतुलन बिगड़ा है। इसके चलते कीमतें घटाने पर तेल कंपनियों का राजस्व घाटा बढ़ जाएगा।

Advertisement
First Published - October 23, 2008 | 11:00 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement