मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के अधिकांश सदस्यों ने महंगाई दर पर बारीकी से निगरानी की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कीमतों में तेजी और वृद्धि के पहलुओं को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। जून की शुरुआत में दरें तय करने वाली समिति की समीक्षा बैठक में एकमत से नीतिगत दर 5.25 प्रतिशत बनाए रखने और तटस्थ रुख बरकरार रखने का फैसला किया गया था।
आज जारी ब्योरे के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, ‘हमें आने वाले महीनों में महंगाई दर के सामान्यीकरण के प्रति सतर्क और सावधान रहना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि संघर्ष और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान सहित कई कारणों से महंगाई दर और वृद्धि के अनुमान को लेकर अनिश्चितता बहुत ज्यादा है।
उन्होंने कहा, ‘हालांकि मौद्रिक नीति के लिए महंगाई दर का परिदृश्य अधिक प्रासंगिक है, लेकिन वर्तमान महंगाई दर ध्यान देने योग्य है, खासकर जब दृष्टिकोण साफ न हो।’ उन्होंने कहा कि मुख्य महंगाई दर भी नियंत्रण में बनी हुई है, जिससे संकेत मिलते हैं कि अंतर्निहित महंगाई दर का दबाव धीमा बना हुआ है।
डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि नीति चक्र को उलटने के बारे में निर्णय लेने से पहले आने वाले महीनों में वैश्विक स्थिति और मौसम से संबंधित अनिश्चितताओं को देखने के लिए कुछ और इंतजार करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि इस समय नीतिगत सख्ती का कोई मामला नहीं बनता है, क्योंकि वृद्धि सुस्त रहने का अनुमान है और महंगाई दर भी अभी तक व्यवस्थित नहीं हुई है। उन्होंने कहा, ‘चल रहे आपूर्ति के झटके से आर्थिक समस्या और बढ़ सकती है।’
एक और आंतरिक सदस्य इंद्रनील भट्टाचार्य ने अनिश्चितताओं की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, ‘मौजूदा परिदृश्य में महंगाई के अनुमान को लेकर कुछ अनिश्चितताएं हैं। थोक महंगाई बढ़ी है और खुदरा महंगाई दर पर इसके असर के लिए इंतजार करने की जरूरत है।’
बाहरी सदस्य राम सिंह ने कहा कि आने वाले आंकड़ों से साफ हो सकेगा कि अधिक इनपुट लागत के दूसरे दौर का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर पर क्या असर पड़ा है। सिंह ने कहा, ‘महंगाई दर के अपेक्षाओं के अनियंत्रित होने का कोई जोखिम नहीं है। मेरी दीर्घकालिक नीतिगत प्राथमिकता वृद्धि को समर्थन देने को लेकर है।’ उन्होंने कहा कि इसे लेकर सदस्यों का रुख नरम माना जाता है।
सिंह ने आगे कहा, ‘अगर महंगाई संबंधी जोखिम अनुकूल रूप से हल होता है और खाद्य महंगाई दर स्थिर रहती है, कच्चे तेल की वैश्विक कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे स्थिर होती है और फेडरल रिजर्व आक्रामक निर्णय लेने से बचता है तो मेरी राय में मौद्रिक नीति समिति को वृद्धि के समर्थन में बने रहने के लिए जगह होगी।’
एक अन्य बाहरी सदस्य नागेश कुमार ने कहा कि इस समय के अत्यधिक अनिश्चितता वाले आर्थिक माहौल में मौद्रिक नीति की किसी भी प्रतिक्रिया के पहले इसके प्रभाव को लेकर अधिक स्पष्टता आने का इंतजार करने की जरूरत है।
कुमार ने कहा, ‘वृद्धि सुस्त रहने के अनुमानों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी रहेगी।’
रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2027 में सकल घरेलू उत्पाद में 6.6 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो 2025-26 की 7.6 प्रतिशत वृद्धि दर से 100 आधार अंक कम है। मौद्रिक नीति की बैठक के बाद जारी आंकड़ों से पता चला कि वित्त वर्ष 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
महंगाई दर के जोखिमों पर बाहरी सदस्य सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि कम बारिश के अनुमान और कृषि उत्पादन की संभावित कमी को देखते हुए कीमतों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। भट्टाचार्य ने कहा, ‘महंगाई दर और वृद्धि को लेकर दोतरफा जोखिमों को देखते हुए नीतिगत त्रुटि की संभावना बनी हुई है।’