ITR Filing 2026: अगर आपने इनकम टैक्स रिटर्न भर दिया है और सोच रहे हैं कि आपका काम पूरा हो गया, तो ऐसा नहीं है। रिटर्न फाइल करने के बाद उसका e-Verification करना भी उतना ही जरूरी है। यदि तय समय के भीतर e-Verification नहीं किया जाता है तो आपका दाखिल किया गया ITR अमान्य माना जा सकता है। ऐसे में न सिर्फ रिफंड अटक सकता है, बल्कि आपको दोबारा पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। यही वजह है कि आयकर विभाग हर टैक्सपेयर को रिटर्न फाइल करने के तुरंत बाद उसका e-Verification करने की सलाह देता है।
देशभर में लाखों लोग हर साल ऑनलाइन इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते हैं। डिजिटल सिस्टम ने ITR फाइल करना पहले की तुलना में काफी आसान बना दिया है। हालांकि, बड़ी संख्या में लोग एक ऐसी गलती कर बैठते हैं जो आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकती है। यह गलती है रिटर्न दाखिल करने के बाद उसका सत्यापन यानी e-Verification नहीं करना।
आयकर विभाग के अनुसार, केवल ITR भर देने से रिटर्न की प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाती। जब तक टैक्सपेयर अपने रिटर्न का वेरिफिकेशन नहीं करता, तब तक उसे वैध नहीं माना जाता। इसलिए रिटर्न भरने के बाद अगला और सबसे महत्वपूर्ण कदम e-Verification है।
e-Verification एक ऑनलाइन प्रक्रिया है जिसके जरिए टैक्सपेयर यह पुष्टि करता है कि उसके द्वारा दाखिल किया गया इनकम टैक्स रिटर्न सही है और उसी ने उसे जमा किया है। यह पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है और इसके लिए किसी दस्तावेज को डाक से भेजने की जरूरत नहीं पड़ती।
पहले टैक्सपेयर्स को ITR-V पर हस्ताक्षर करके उसे बेंगलुरु स्थित सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर भेजना पड़ता था। अब अधिकांश लोग ऑनलाइन ही e-Verification कर सकते हैं, जिससे समय भी बचता है और रिटर्न की प्रोसेसिंग भी जल्दी शुरू हो जाती है।
कई लोग रिटर्न भरने के बाद उसे सबमिट कर देते हैं और समझते हैं कि उनका काम पूरा हो गया। लेकिन यदि e-Verification नहीं किया गया तो आयकर विभाग उस रिटर्न को अधूरा मानता है।
इसका सीधा मतलब है कि आपका ITR वैध नहीं माना जाएगा। ऐसी स्थिति में रिफंड मिलने में परेशानी हो सकती है और कानून के अनुसार रिटर्न दाखिल नहीं करने जैसी स्थिति भी बन सकती है। इसलिए रिटर्न फाइल करने के बाद e-Verification को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है।
मौजूदा नियमों के अनुसार, ITR दाखिल करने की तारीख से 30 दिनों के भीतर उसका e-Verification करना जरूरी है।
पहले यह समय सीमा 120 दिन थी, लेकिन अब इसे घटाकर 30 दिन कर दिया गया है। इसलिए टैक्सपेयर्स को सलाह दी जाती है कि वे रिटर्न फाइल करने के तुरंत बाद उसका सत्यापन भी कर दें। आखिरी दिन का इंतजार करना सही नहीं माना जाता।
आयकर विभाग टैक्सपेयर्स को कई विकल्प देता है ताकि हर व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार रिटर्न सत्यापित कर सके।
यह सबसे आसान और सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका है। यदि आपका मोबाइल नंबर आधार से जुड़ा हुआ है तो OTP के जरिए कुछ ही मिनटों में e-Verification पूरा किया जा सकता है।
ध्यान रहे कि OTP उसी मोबाइल नंबर पर आएगा जो आधार से लिंक है। यदि मोबाइल नंबर अपडेट नहीं है तो यह तरीका काम नहीं करेगा।
यदि आपका बैंक e-Filing सुविधा का समर्थन करता है तो नेट बैंकिंग के माध्यम से भी e-Verification किया जा सकता है।
इस प्रक्रिया में लॉग इन करने के बाद आपको इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड यानी EVC मिलता है, जिसकी मदद से रिटर्न सत्यापित हो जाता है।
यदि आपका बैंक खाता e-Filing पोर्टल पर प्री-वैलिडेटेड है और EVC के लिए सक्षम किया गया है, तो आप बैंक खाते के जरिए भी इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड प्राप्त कर सकते हैं।
यह कोड आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल पर भेजा जाता है।
जिन निवेशकों का डिमैट खाता e-Filing पोर्टल पर पहले से प्री-वैलिडेटेड और EVC सक्षम है, वे भी उसी खाते के जरिए अपना ITR सत्यापित कर सकते हैं।
यदि डिमैट खाता निष्क्रिय है तो इस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा।
कुछ बैंक ATM के माध्यम से भी EVC जारी करने की सुविधा देते हैं। यह एक ऑफलाइन विकल्प है, जिसके जरिए प्राप्त कोड को पोर्टल पर दर्ज करके e-Verification पूरा किया जा सकता है।
कंपनियों और कुछ विशेष श्रेणी के करदाताओं के लिए डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट भी e-Verification का विकल्प है।
हालांकि, यदि आपने ITR दाखिल करते समय ‘e-Verify Later’ का विकल्प चुना है तो बाद में DSC के जरिए सत्यापन नहीं किया जा सकेगा।
EVC यानी इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड एक 10 अंकों का अल्फा-न्यूमेरिक कोड होता है। इसे आयकर विभाग सत्यापन के दौरान जारी करता है।
यह कोड केवल 72 घंटे तक वैध रहता है। यदि इस अवधि में इसका उपयोग नहीं किया जाता तो नया EVC जनरेट करना पड़ता है।
सफलतापूर्वक e-Verification होने के बाद स्क्रीन पर एक सफलता संदेश और ट्रांजैक्शन आईडी दिखाई देती है।
इसके साथ ही आपके e-Filing पोर्टल पर पंजीकृत ईमेल पते पर पुष्टि का ईमेल भी भेजा जाता है। यह इस बात का प्रमाण होता है कि आपका ITR सफलतापूर्वक सत्यापित हो चुका है।
यदि आपने तय समय के भीतर e-Verification नहीं किया तो आपका रिटर्न अमान्य माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में आपको ‘Condonation of Delay’ के लिए आवेदन करना होगा।
इस आवेदन में आपको देरी का उचित कारण बताना होगा। केवल आवेदन करने से रिटर्न वैध नहीं हो जाएगा। जब तक आयकर विभाग आपकी देरी को मंजूरी नहीं देता, तब तक आपका ITR सत्यापित नहीं माना जाएगा।
यदि किसी कारणवश आप समय पर e-Verification नहीं कर पाए हैं तो आयकर विभाग आपको देरी माफ करने के लिए आवेदन करने का अवसर देता है।
इस प्रक्रिया को Condonation of Delay कहा जाता है। आवेदन स्वीकृत होने के बाद ही आप अपना ITR सत्यापित कर सकते हैं।
ऐसी स्थिति में आधार OTP का उपयोग नहीं किया जा सकता।
आपको पहले आधार में मोबाइल नंबर अपडेट कराना होगा या फिर नेट बैंकिंग, बैंक EVC, डिमैट EVC अथवा अन्य उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल करना होगा।
नहीं। जिस बैंक खाते या डिमैट खाते से EVC लेना है, वह सक्रिय होना चाहिए। साथ ही उसे e-Filing पोर्टल पर प्री-वैलिडेटेड और EVC सक्षम भी होना जरूरी है।
कुछ मामलों में अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता या प्रतिनिधि करदाता आपकी ओर से भी e-Verification कर सकता है।
इसके लिए वह आधार OTP, नेट बैंकिंग या प्री-वैलिडेटेड बैंक अथवा डिमैट खाते से EVC का उपयोग कर सकता है। सत्यापन पूरा होने के बाद दोनों पक्षों को ईमेल के माध्यम से पुष्टि भेजी जाती है।
यदि आपने ITR-V भेजा था और वह किसी कारण से अस्वीकार हो गया है तो उसका कारण e-Filing डैशबोर्ड पर देखा जा सकता है।
इसके बाद आप दोबारा ITR-V भेज सकते हैं या फिर ऑनलाइन e-Verification का विकल्प चुन सकते हैं।
रिटर्न का सत्यापन अनिवार्य है, लेकिन इसका तरीका आपकी पसंद पर निर्भर करता है।
आप या तो ऑनलाइन e-Verification कर सकते हैं या फिर हस्ताक्षर किया हुआ ITR-V निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भेज सकते हैं। हालांकि, ऑनलाइन e-Verification सबसे तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक तरीका माना जाता है।
ऑनलाइन सत्यापन होने से कागजी प्रक्रिया की जरूरत नहीं पड़ती। ITR-V डाक से भेजने का झंझट खत्म हो जाता है। रिटर्न की प्रोसेसिंग जल्दी शुरू होती है। रिफंड मिलने की प्रक्रिया भी तेज हो सकती है। साथ ही कई विकल्प उपलब्ध होने से हर टैक्सपेयर अपनी सुविधा के अनुसार सत्यापन कर सकता है।
यदि आपने इस साल अपना ITR दाखिल किया है तो केवल रिटर्न सबमिट करके न रुकें। यह जरूर जांच लें कि उसका e-Verification भी सफलतापूर्वक पूरा हो गया है या नहीं। यदि ऐसा नहीं हुआ है तो 30 दिन की समय सीमा समाप्त होने से पहले सत्यापन कर लें। छोटी सी लापरवाही आपके रिटर्न को अमान्य बना सकती है और रिफंड समेत कई जरूरी प्रक्रियाओं में देरी हो सकती है। इसलिए ITR फाइलिंग का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण e-Verification को कभी नजरअंदाज न करें।