facebookmetapixel
Advertisement
छात्रों के विरोध के आगे झुकी सरकार! कैसे PM मोदी के 12 साल के कार्यकाल में इस्तीफा देने वाले दूसरे केंद्रीय मंत्री बने प्रधानपश्चिम एशिया संकट व तेल की बढ़ती कीमतों के बीच अगले हफ्ते कैसा रहेगा शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट का हाल?नीट पेपर लीक, परीक्षा रद्द, आंदोलन और अब शिक्षा मंत्री का इस्तीफा…..3 मई से लेकर अब तक क्या-क्या हुआ?शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, खुद अपने पोस्ट में लेटर जारी करके दी जानकारीफ्लैट खरीदने के बाद पुराने मेंटेनेंस बकाया का आ गया बिल? जानिए क्या कहता है कानून और क्या करें नए खरीदार360% का मोटा डिविडेंड! IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी का निवेशकों को तोहफा, रिकॉर्ड डेट फिक्सक्या ईरान पर सबसे बड़े हमले की तैयारी में अमेरिका? ट्रंप बोले: हम ‘लॉक्ड एंड लोडेड’, पर बातचीत भी जारी‘उदारीकण के बाद अहसास हुआ कि हमें इनोवेशन करना होगा, न कि दिल्ली में इंतजार’, नारायण मूर्ति ने बयां की 1991 से पहले की दुश्वारियां1991 से अब तक का सफर: अविश्वास से निकलकर भरोसे पर आधारित आर्थिक नीति बनाने की जरूरत‘बंगाल को मिली तबाही और निराशा की विरासत’, बोले स्वप्न दासगुप्ता: निवेश लाने के लिए करेंगे अतिरिक्त प्रयास

Meta का भारत पर बड़ा दांव, Jamnagar में Data Center से AI क्रांति की तैयारी

Advertisement

Meta ने Jamnagar में Data Center निवेश के जरिए भारत की डिजिटल और AI क्षमता पर लंबे समय के भरोसे का संकेत दिया है।

Last Updated- June 29, 2026 | 9:01 AM IST
Meta
Representative image

मेटा के उपाध्यक्ष (बुनियादी ढांचा) संतोष जनार्दन के लिए जामनगर में डेटा सेंटर में किया गया हालिया निवेश एक और बुनियादी ढांचा परियोजना से कहीं अधिक मायने रखता है। मुंबई में जन्मे और अहमदाबाद में पले-बढ़े कंपनी के वैश्विक बुनियादी ढांचा प्रमुख इस कदम को घर वापसी जैसा बताते हैं। लेकिन निजी जुड़ाव को छोड़ भी दें तो जनार्दन इस निवेश को भारत पर व्यापक दांव के तौर पर देखते हैं। यह ऐसे समय में हो रहा है जब आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक में सबसे बड़े बदलावों में से एक को आगे बढ़ा रही है। मुंबई में शिवानी शिंदे के साथ बातचीत में उन्होंने भारत की बढ़ती अहमियत, डेटा सेंटर के बदलते आर्किटेक्चर और डेटा सेंटर में किए गए हाल के निवेश के बारे में चर्चा की। प्रमुख अंश …

मेटा की बुनियादी ढांचा कार्य-योजना में भारत कितना अहम है?

हालांकि भारत में हमारी मौजूदगी लंबे समय से है, लेकिन पिछले साल हमने जो बड़े काम किए, उनमें से एक था ‘प्रोजेक्ट वॉटरवर्थ’। भारत इसका एक बहुत बड़ा हिस्सा है। डेटा सेंटर एक और बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धता है। मात्र वित्तीय प्रतिबद्धता से कहीं ज्यादा, यह उन चीजों पर हमारे भरोसे को भी दिखाता है जिन्हें हम मानते हैं कि भारत सही दिशा में कर रहा है। यह बात भी बहुत कम लोग जानते हैं कि आज मेटा के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा हमारे अपने सिलिकॉन पर आधारित है। इस काम का एक बड़ा हिस्सा बेंगलूरु में हमारी टीमों की तरफ से आता है। वे सिलिकॉन और फाउंडेशनल चिप डेवलपमेंट के कई काम करती हैं। हम भारत की विकास गाथा का हिस्सा बनना चाहते हैं और मुझे लगता है कि हालात इसके लिए बिल्कुल सही हैं।

तकनीक के नजरिये से भारत पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने के मामले में मेटा की रणनीति में क्या बदलाव आया है?

मैं पूरी तरह से सहमत नहीं हूं कि यह ऐसा कोई बहुत बड़ा बदलाव है जिसमें हमने अचानक तय कर लिया कि भारत अहम है। हम काफी समय से लगातार इस दिशा में चल रहे हैं। भारत में कुछ चीजें एक साथ आ रही हैं। पहला, भारत के भीतर की ही चीजें। यह जनसंख्या लाभ वैश्विक मंच पर अद्वितीय है। डिजिटल की गहरी पैठ, मोबाइल अपनाने की दमदार दर है। हमने प्रभावी ढंग से तकनीकी परिवर्तन की एक पूरी पीढ़ी को पार कर लिया है। बहुत सारी प्रतिभा छिपी हुई है और इंजीनियरिंग के लिहाज से तो काफी प्रतिभा है। सरकार भी तकनीक को बढ़ावा दे रही है। आप व्हाट्सऐप पर ट्रेन के टिकट खरीद सकते हैं, व्हाट्सऐप पर सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच सकते हैं और अनोखे तरीकों से डिजिटल सेवाओं के साथ जुड़ सकते हैं। साथ ही कंपनियां नियामकीय स्पष्टता और नीतिगत स्थिरता चाहती हैं, जिससे आपको आत्मविश्वास मिलता है। ये सब चीजें एक साथ हैं और उन चीजों से मेल खाती हैं, जो कंपनियां करना चाहती हैं। बुनियादी ढांचे में निवेश 15 से 20 साल के लिए किया जाता है। आपको विश्वास होना चाहिए कि माहौल स्थिर रहेगा।

तकनीकी नजरिये से देखें, तो हम अपने डेटा केंद्रों से दुनिया की सेवा करते हैं। परंपरागत रूप से बात करें, तो भारत की सेवा के लिए आपको भौतिक रूप से भारत में होने की जरूरत नहीं है। लेकिन जो चीज बदल रही है, वह यह है कि हमारे पास अच्छी तरह से जुड़ा वैश्विक नेटवर्क है। बुनियादी ढांचा निवेश बहुत अधिक है, अरबों डॉलर का और एक बार जब आप प्रतिबद्धता जताते हो हैं, तो यह दशकों के लिए होती है। भारत उन मापदंडों पर बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। साथ ही मेटा की कंप्यूटिंग की जरूरतें तेजी से बढ़ रही हैं और एआई एक प्रमुख उत्प्रेरक है। जब ये दोनों चीजें एक साथ आती हैं, तो भारत निवेश के लिए बहुत ही आकर्षक जगह बन जाता है।

क्या जामनगर में आ रहा नया डेटा सेंटर मौजूदा उत्पादों की पूर्ति करेगा या यह एआई वर्कलोड के लिए समर्पित होगा?

दोनों के लिए होगा। जैसा कि मार्क (जकरबर्ग – मेटा प्लेटफॉर्म्स के मुख्य कार्य अधिकारी) कहते हैं मेरा काम भविष्य को सक्षम करना है, यह ठीक से जाने बिना ही कि भविष्य कैसा होगा। यह 15 से 20 साल का निवेश है। डेटा सेंटर कंपनी में हम में से कई लोगों से भी अधिक समय तक चलेगा। हमें इसमें लचीलापन लाने और वैकल्पिक क्षमता बनाने की आवश्यकता है। हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इस पर लगभग सब कुछ किया जा सके। मैं आपको इतना बता सकता हूं कि हम किसी भी चीज को बाहर नहीं कर रहे हैं। चाहे वह प्रशिक्षण हो, अनुमान हो, एजेंट हो या भविष्य के वर्कलोड, हम चाहते हैं कि बुनियादी ढांचा इन सभी में मदद करे।

क्या भविष्य में विस्तार की गुंजाइश है? क्या रिलायंस आपकी खास साझेदार होगी?

हम विस्तार कर सकते हैं। जब आप कोई बड़ा निवेश करते हैं, तो आप दौड़ने से पहले चलना सीखते हैं।  साझेदार के तौर पर रिलायंस किसी भी रूप में विशिष्ट नहीं है। जामनगर हमारे लिए स्वाभाविक जगह है। अगर हम चाहें तो हमारे पास इस इकाई को 1 गीगावॉट स्तर तक करने का विकल्प भी है। यह साझेदारी की चर्चाओं का अहम हिस्सा था।

Advertisement
First Published - June 29, 2026 | 9:01 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement