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ITR filing: फॉर्म 16 से गायब रह सकती हैं ये 10 तरह की कमाई, ITR फाइल करते समय भूलना पड़ सकता है भारी

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एक्सपर्ट के मुताबिक, केवल फॉर्म 16 के भरोसे ITR न भरें। बैंक ब्याज, डिविडेंड और किराये जैसी 10 कमाइयों को टैक्स नोटिस और जुर्माने से बचने के लिए AIS से जरूर मिलाएं

Last Updated- June 19, 2026 | 4:39 PM IST
Income Tax
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

ITR Filing 2026: देश के लाखों नौकरीपेशा लोगों के लिए जून का महीना बेहद अहम होता है क्योंकि इसी दौरान उन्हें अपनी कंपनियों से फॉर्म 16 मिलता है। नॉन-ऑडिट मामलों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने की सामान्य आखिरी तारीख 31 जुलाई होती है, जिसमें अब लगभग 40 दिनों का समय बचा है। ऐसे में नौकरीपेशा तबका काफी उत्सुकता से इस डॉक्यूमेंट का इंतजार करता है ताकि वे समय पर अपना टैक्स रिटर्न जमा कर सकें।

लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसी उत्सुकता के बीच सैलरी पाने वाले कर्मचारी अक्सर एक बेहद आम और गंभीर गलती कर बैठते हैं। बहुत से टैक्सपेयर्स को ऐसा लगता है कि टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए अकेले फॉर्म 16 ही काफी है और इसके मिल जाने के बाद उन्हें किसी दूसरे डॉक्यूमेंट को खंगालने की कोई जरूरत नहीं है।

टैक्स के जानकारों के मुताबिक, यह धारणा न सिर्फ गलत है बल्कि भविष्य में बड़ी मुसीबत का सबब भी बन सकती है। असलियत यह है कि फॉर्म 16 आपकी कमाई का पूरा हिसाब-किताब सामने नहीं लाता है, खासकर उस स्थिति में जब आपके पास सैलरी के अलावा भी आमदनी के अन्य जरिए हों। फॉर्म 16 बुनियादी रूप से एम्प्लॉयर कंपनी से कर्मचारी को जारी किया जाने वाला एक सर्टिफिकेट है, जो यह बताता है कि साल भर में आपको कितना वेतन दिया गया और उस पर कितना टैक्स यानी TDS काटा गया।

यह डॉक्यूमेंट मुख्य रूप से दो हिस्सों में बंटा होता है, जहां पार्ट-ए में एम्प्लॉयर और कर्मचारी के पैन, टैन और सरकारी खजाने में जमा किए गए टैक्स का लेखा-जोखा होता है, वहीं पार्ट-बी में सैलरी का पूरा ब्रेकअप, क्लेम की गई छूट और टैक्स का कैलकुलेशन होता है। चूंकि यह केवल नौकरी से होने वाली आय तक सीमित होता है, इसलिए इसमें बैंक ब्याज, डिविडेंड या प्रॉपर्टी से होने वाली दूसरी कमाई दर्ज नहीं हो पाती है।

टैक्स क्रेडिट और आर्थिक लेनदेन को समझने के नए औजार

फॉर्म 16 की इस सीमा को समझने के बाद टैक्सपेयर्स को उन सरकारी टूल्स की तरफ देखना चाहिए जो उनकी वास्तविक आर्थिक स्थिति की जानकारी देते हैं। इसके लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से फॉर्म 26AS जारी किया जाता है, जो एक तरह से आपका सलाना टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट होता है। इस फॉर्म में आपके परमानेंट अकाउंट नंबर यानी पैन से लिंक हर उस टैक्स की जानकारी होती है जो किसी बैंक, कंपनी या एम्प्लॉयर द्वारा काटा गया है। इसमें एडवांस टैक्स, सेल्फ-असेसमेंट टैक्स और हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शंस का पूरा ब्योरा दर्ज होता है। असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए टैक्स रिटर्न फाइल करने से ठीक पहले फॉर्म 16 का मिलान फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट यानी AIS के साथ करना बेहद जरूरी हो गया है।

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि AIS, फॉर्म 26AS के मुकाबले कहीं ज्यादा विस्तृत जानकारी देता है। फॉर्म 26AS जहां सिर्फ टैक्स कटौती (TDS) और टैक्स पेमेंट की जानकारी दिखाता है, वहीं AIS में अलग-अलग संस्थानों की ओर से सरकार को दी गई आपकी छोटी-बड़ी सभी आर्थिक गतिविधियों का पूरा ब्योरा होता है। जब कोई टै्सपेयर इन दोनों डॉक्यूमेंट को फॉर्म 16 के साथ मिलाकर देखता है, तब उसे ऐसी आय के बारे में भी पता चलता है जो कंपनी के सैलरी रिकॉर्ड में शामिल नहीं थी, लेकिन सरकार के रिकॉर्ड में पहले से दर्ज होती है।

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सैलरी के अलावा होने वाली वो दस गुप्त कमाइयां

अक्सर टैक्सपेयर अनजाने में कई ऐसी कमाइयों को छिपा जाते हैं या भूल जाते हैं जिन पर नियमानुसार टैक्स बनता है। ऐसी मुख्य रूप से दस तरह की आमदनी हैं जो किसी भी कर्मचारी के फॉर्म 16 में दिखाई नहीं देती हैं। इनमें सबसे पहली और आम कमाई है सेविंग्स बैंक अकाउंट से मिलने वाला ब्याज। लोग अक्सर सोचते हैं कि बचत खाते में पड़े पैसों पर आने वाला थोड़ा-बहुत ब्याज टैक्स के दायरे से बाहर है, जबकि इसे रिटर्न में दिखाना जरूरी होता है। इसी तरह फिक्स्ड डिपॉजिट या रेकरिंग डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज भी फॉर्म 16 से पूरी तरह नदारद रहता है, भले ही बैंक ने उस पर TDS काटा हो या न काटा हो।

तीसरी बड़ी आमदनी शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड से मिलने वाला डिविडेंड यानी डिविडेंड है, जिसे कंपनियां सीधे आपके खाते में भेजती हैं। इसके अलावा जब आप कोई शेयर या म्यूचुअल फंड यूनिट्स बेचते हैं, तो उससे होने वाला कैपिटल गेन भी चौथी ऐसी श्रेणी है जो नौकरी के सैलरी सर्टिफिकेट में नहीं आ सकती।

पांचवें नंबर पर आती है किसी प्रॉपर्टी या मकान से मिलने वाली रेंटल इनकम यानी किराये की कमाई। अगर कोई नौकरीपेशा व्यक्ति अपने खाली पड़े मकान से किराया वसूल रहा है, तो उसे इसकी जानकारी खुद ही अपने ITR में देनी होगी।

इस सूची में छठी आमदनी है फ्रीलांसिंग या कंसल्टेंसी के जरिए होने वाली कमाई। कई लोग नौकरी के साथ-साथ छोटे-मोटे स्वतंत्र प्रोजेक्ट्स भी करते हैं, जिसका भुगतान सीधे उनके खाते में आता है। सातवीं महत्वपूर्ण श्रेणी है पिछले सालों के इनकम टैक्स रिफंड पर मिलने वाला ब्याज। टैक्स डिपार्टमेंट जब आपको पुराना टैक्स वापस करता है, तो उस पर ब्याज भी देता है, जो पूरी तरह कर योग्य होता है।

इसके अलावा आठवीं श्रेणी में फैमिली पेंशन, नौवीं में साल भर के दौरान मिले कुछ खास टैक्सेबल गिफ्ट्स और दसवीं श्रेणी में विदेशों से होने वाली कोई भी इनकम या विदेशी निवेश से आने वाला रिटर्न शामिल है। इन सभी दस स्रोतों को फॉर्म 16 में जगह नहीं मिलती, लेकिन इन्हें टैक्स रिटर्न में दिखाना कानूनी रूप से आवश्यक है।

Also Read: ITR Filing 2026: शेयर, म्युचुअल फंड और प्रॉपर्टी से हुई कमाई पर कैसे भरें टैक्स, जानें आसान तरीका

अंडर-रिपोर्टिंग से बचने के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह

यदि कोई टैक्सपेयर सिर्फ अपने फॉर्म 16 के आधार पर आंखें बंद करके ITR फॉर्म सबमिट कर देता है, तो वह अनजाने में अपनी आय को कम करके आंकने यानी अंडर-रिपोर्टिंग का दोषी बन सकता है। टैक्स एक्सपर्ट्स कहना है कि टैक्सपेयर्स को फॉर्म 26AS और AIS का इस्तेमाल केवल एक गाइड की तरह करना चाहिए और इसे अंतिम सच नहीं मान लेना चाहिए। टैक्सपेयर्स को इन सरकारी ब्योरों का मिलान अपने खुद के बैंक स्टेटमेंट्स और व्यक्तिगत आर्थिक रिकॉर्ड के साथ करना चाहिए। उनके अनुसार, कई बार AIS में भी कुछ गलतियां हो सकती हैं, इसलिए खुद के डॉक्यूमेंट ही सबसे प्रामाणिक साबित होते हैं।

इन तीनों ब्योरों के बीच का अंतर ही आपको टैक्स डिपार्टमेंट के नोटिसों से बचाता है। जब टैक्स डिपार्टमेंट का कंप्यूटर आपके द्वारा फाइल रिटर्न और उनके पास मौजूद AIS डेटा में कोई अंतर पाता है, तो वह तुरंत ऑटोमेटेड नोटिस जारी कर देता है। इस तरह के नोटिसों, ब्याज की देनदारी और भारी-भगकम जुर्माने से बचने का एकमात्र तरीका यही है कि आप रिटर्न सबमिट करने का बटन दबाने से पहले खुद ही इन सभी आंकड़ों का मिलान कर लें।

भविष्य की सुरक्षा के लिए इन डॉक्यूमेंट्स को रखें सुरक्षित

टैक्स एक्सपर्ट के किसी भी संभावित सवाल या स्क्रूटनी का सामना करने के लिए सिर्फ रिटर्न भर देना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके पीछे के साक्ष्यों को सहेजकर रखना भी उतना ही जरूरी है। एक्सपर्ट टैक्सपेयर्स को सलाह देते हैं कि वे साल भर के बैंक स्टेटमेंट्स, बैंकों से मिलने वाले इंटरेस्ट सर्टिफिकेट्स, कंपनियों के डिविडेंड स्टेटमेंट्स और ब्रोकरेज हाउस से मिलने वाली कैपिटल गेन्स रिपोर्ट्स को सुरक्षित रखें। इसके साथ ही अगर मकान किराये पर दिया है तो रेंट एग्रीमेंट, कंसल्टेंसी के काम के लिए जारी किए गए इनवॉइस और विदेशी संपत्तियों या निवेश से जुड़े डॉक्यूमेंटों की फाइल अलग से बनाकर रखनी चाहिए।

ये सभी डॉक्यूमेंट न सिर्फ आपको सही तरीके से ITR भरने में मदद करते हैं, बल्कि भविष्य में अगर टैक्स असेसमेंट के दौरान आयकर अधिकारी किसी आय के स्रोत के बारे में सवाल करते हैं, तो आप तुरंत ये कागजात उनके सामने पेश कर सकते हैं। सही तरीके से मिलान (रीकंसिलेशन) की प्रक्रिया अपनाकर हर नौकरीपेशा व्यक्ति यह सुनिश्चित कर सकता है कि उसका टैक्स रिटर्न पूरी तरह सही है और उसने नियमों के मुताबिक अपनी पूरी  आय पर टैक्स दिया है।

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First Published - June 19, 2026 | 4:39 PM IST

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