बाजार नियामक सेबी ने पांच कंपनियों मौर्या उद्योग, विशाल फैब्रिक्स, 7एनआर रिटेल, जीबीएल इंडस्ट्रीज और दार्जिलिंग रोपवे में कथित पंप ऐंड डंप स्कीम के लिए 222 लोगों और फर्मों को चार से सात साल के लिए बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है। नियामक ने इन इकाइयों पर कुल 47.7 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
सेबी ने जिन दूसरी इकाइयों पर रोक लगाई है, उनमें वॉल्यूम बनाने वाले, कीमतों पर असर डालने वाले, ऑपरेटर, बेचने वाले और कुछ मामलों में कंपनियों के प्रवर्तक और उनसे जुड़ी फर्में शामिल हैं। सेबी ने कई सालों तक बड़े पैमाने पर चले इस घोटाले में हेरफेर करने वालों से गैर-कानूनी या गलत तरीके से की गई कमाई को वापस जमा करने का भी आदेश दिया है। नियामक ने इस मामले में जून 2023 में अंतरिम आदेश जारी किया था।
394 पन्नों के अंतिम आदेश में सेबी ने हनीफ शेख को प्राइस और वॉल्यूम में हेरफेर करने की साज़िश का मास्टरमाइंड और मुख्य फायदा उठाने वालों में से एक बताया है। शेख पर 7 साल की रोक लगाई गई है और 10 करोड़ रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया गया है।
नियामक ने पाया कि हेरफेर शुरू होने से पहले इन शेयरों में कोई खास लिक्विडिटी, कोई बड़ी कॉरपोरेट घोषणा या प्रदर्शन में कोई सुधार नहीं था। लेकिन 2017 और 2020 के बीच इन शेयरों की कीमत और वॉल्यूम में असामान्य उतार-चढ़ाव देखा गया। उदाहरण के लिए, राजस्व में गिरावट और नुकसान के बावजूद मौर्या उद्योग के शेयर की कीमत में भारी उछाल आई।
इस तरीके में आपस में ट्रेडिंग करके जुड़ी हुई कंपनियों के जरिए नकली तरीके से वॉल्यूम बनाना शामिल था। इसके बाद, भरोसे का माहौल बनाने और दूसरे निवेशकों को लुभाने के लिए बड़े स्टॉक ब्रोकरों के नामों जैसे दिखने वाले हेडर के साथ थोक में एसएमएस भेजकर शेयर खरीदने की सलाह दी गई। कुछ वेबसाइटों के जरिये भी इन शेयरों को खरीदने की सलाह का प्रसार किया गया। इस तेजी और उसके बाद कीमतों में उछाल की वजह से शेयर बेचने वालों को बढ़े हुए दामों पर शेयर बेचने का मौका मिल गया।
शेयर बेचने वालों ने इस मुनाफे को ट्रेड के लिए पैसा लगाने वालों या कुछ मामलों में प्रवर्तकों और उनसे जुड़ी कंपनियों तक भी पहुंचाया। नियामक ने पाया कि मौर्या उद्योग के मामले में हेराफेरी से हुए गैर-कानूनी मुनाफे का असली फायदा उठाने वाले प्रवर्तक और उनके नियंत्रण वाली कंपनियां थीं। इसके अलावा, कंपनी के 62 कर्मचारी भी इस स्कीम में शामिल थे। बाद में उन्होंने बिक्री से मिली रकम प्रवर्तकों को हस्तांतरित कर दी। आरबीआई में पंजीकृत एनबीएफसी गोयनका बिजनेस फाइनैंस की भी कीमतों में हेरफेर और नकली वॉल्यूम बनाने में अहम भूमिका पाई गई।