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ITR Deadline: सिर्फ 31 तारीख ही नहीं, जुलाई के महीने में टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी हैं ये तारीखें भी

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जुलाई का महीना टैक्सपेयर्स के लिए बेहद अहम है। इसमें 31 जुलाई की ITR डेडलाइन के अलावा TDS भुगतान और कई अन्य जरूरी फॉर्म भरने की तारीखें शामिल हैं

Last Updated- June 30, 2026 | 7:35 PM IST
Income TAX
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

नौकरीपेशा लोगों, आम नागरिकों और देश के तमाम टैक्सपेयर्स के लिए आने वाला जुलाई का महीना बहुत ही जरूरी रहने वाला है। इस महीने में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की अंतिम तारीख तो पास आ ही रही है, साथ ही टैक्स से जुड़े कई अन्य जरूरी काम भी निपटाने हैं। वैसे तो सबसे बड़ी और मुख्य तारीख 31 जुलाई है, जो करोड़ों भारतीयों के लिए ITR फाइल करने की आखिरी डेडलाइन है। लेकिन इसके अलावा भी पूरे महीने में एम्प्लॉयर्स, टैक्स काटने वाली संस्थाओं (Deductors) और कंपनियों के लिए TDS पेमेंट, फॉर्म सबमिशन और सर्टिफिकेट जारी करने से जुड़ी कई जरूरी तारीखें तय की गई हैं। समय पर इन कामों को न करने से अतिरिक्त ब्याज, पेनाल्टी और कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

7 जुलाई: TDS पेमेंट और डिक्लेरेशन से जुड़ी डेडलाइन

जुलाई महीने की शुरुआत होते ही सबसे पहला बड़ा टैक्स टास्क 7 जुलाई को पड़ेगा। यह तारीख मुख्य रूप से टैक्स डिडक्टर्स और सरकारी कार्यालयों के लिए जरूरी है।

  • जिन टैक्स डिडक्टर्स को असेसिंग ऑफिसर (AO) की तरफ से तिमाही आधार पर TDS जमा करने की इजाज मिली हुई है, उन्हें अप्रैल से जून 2026 की तिमाही का TDS 7 जुलाई तक हर हाल में जमा करना होगा।
  • इसके साथ ही, जून 2026 के महीने के लिए मंथली TDS और TCS का भुगतान भी इसी तारीख तक करना जरूरी है।
  • जो सरकारी कार्यालय टैक्स की कटौती या कलेक्शन करते हैं, उन्हें बिना किसी इनकम टैक्स चालान का इस्तेमाल किए उसी दिन यह राशि केंद्र सरकार के खाते में जमा करानी होगी।
  • इसके अलावा, जून 2026 में खरीदारों से मिले फॉर्म 127 के डिक्लेरेशन और जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही के लिए मिले फॉर्म 121 के डिक्लेरेशन को पोर्टल पर अपलोड करने की अंतिम तारीख भी 7 जुलाई ही है।

15 जुलाई: TDS सर्टिफिकेट और विदेशी लेनदेन की रिपोर्टिंग

महीने का दूसरा हफ्ता बीतते ही 15 जुलाई को कई अन्य जरूरी कंप्लायंस पूरे करने होंगे। यह तारीख उन बिजनेस और वित्तीय संस्थानों के लिए काफी अहम है जो विदेशी लेनदेन या टैक्स कटौती का काम संभालते हैं।

  • सरकारी कार्यालयों ने जून महीने में बिना चालान के जो TDS या TCS जमा किया था, उन्हें 15 जुलाई तक फॉर्म 137 सबमिट करना होगा।
  • स्टॉक एक्सचेंजों को जून 2026 के दौरान क्लाइंट कोड में किए गए बदलावों (Modifications) के मामलों के लिए फॉर्म 1 जमा करना होगा।
  • मई 2026 में काटे गए स्पेसिफाइड टैक्स के लिए TDS डिडक्टर्स को फॉर्म 132 सर्टिफिकेट जारी करना होगा।
  • विदेशी लेनदेन के मामले में अधिकृत डीलर्स को अप्रैल-जून 2026 की तिमाही के दौरान किए गए विदेशी प्रेषण (Foreign Remittances) के लिए फॉर्म 147 भरना होगा।
  • यही नियम इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) की पात्र यूनिट्स पर भी लागू होता है, जिन्हें इसी तिमाही के विदेशी लेनदेन के लिए फॉर्म 148 फाइल करना है। साथ ही, स्पेसिफाइड फंड्स और स्टॉक ब्रोकर्स को नॉन-रेसिडेंट इनवेस्टर्स के मामलों में फॉर्म 92 सबमिट करना होगा।

Also Read: Explainer: जमीन बेचने से हुई कमाई? जानें ‘लैंड सेल’ को लेकर क्या हैं टैक्स के नियम, नहीं तो होगी मुश्किल

30 जुलाई: Challan-cum-statement की आखिरी तारीख

जुलाई के आखिरी दिनों में आने से ठीक पहले 30 तारीख को भी एक जरूरी काम निपटाना होगा। जिन संस्थाओं या टैक्सपेयर्स ने जून 2026 के दौरान कुछ स्पेसिफाइड TDS कटौतियां की हैं, उन्हें 30 जुलाई तक फॉर्म 141 में चालान-सह-विवरण (Challan-cum-statement) फाइल करना होगा। यह फॉर्म टैक्स कटौती और उसे सरकारी खजाने में जमा करने की पूरी जानकारी देता है, जो TDS प्रक्रिया को सही तरीके से पूरा करने के लिए जरूरी है।

31 जुलाई: आम नागरिकों के लिए ITR और जरूरी फॉर्म्स की डेडलाइन

जुलाई की आखिरी तारीख यानी 31 जुलाई देश के करोड़ों व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स के लिए साल का सबसे बड़ा दिन होता है। यह डेडलाइन मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है जिन्हें अपने खातों का टैक्स ऑडिट कराने की जरूरत नहीं होती है। इनमें शामिल हैं:

  • नौकरीपेशा कर्मचारी (Salaried Individuals)
  • पेंशनभोगी (Pensioners)
  • अन्य ऐसे लोग जो बिना टैक्स ऑडिट के अपनी आय घोषित करते हैं। आम तौर पर ITR-1 (सहज) और ITR-2 फॉर्म भरने वाले टैक्सपेयर्स इसी कैटेगरी में आते हैं।

सिर्फ इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरना ही नहीं, बल्कि कुछ खास मामलों में 31 जुलाई तक दूसरे जरूरी फॉर्म भी जमा करने होते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति को एरियर (बकाया) या एडवांस सैलरी मिली है और वह धारा 89 के तहत टैक्स में राहत लेना चाहता है, तो उसे फॉर्म 10E भरना होगा। वहीं, जिन टैक्सपेयर्स का अधिसूचित विदेशी देशों में रिटायरमेंट बेनिफिट अकाउंट है, उन्हें धारा 89A के तहत टैक्स राहत पाने के लिए फॉर्म 10-EE जमा करना जरूरी है।

विकलांगता से जुड़ी टैक्स छूट (सेक्शन 80DD और 80U) का दावा करने के लिए मेडिकल अथॉरिटी से जारी फॉर्म 10-IA सर्टिफिकेट जरूरी है। वहीं, पेटेंट से मिलने वाली रॉयल्टी इनकम पर सेक्शन 80RRB के तहत टैक्स छूट के लिए फॉर्म 10CCE जमा करना होता है। रॉयल्टी इनकम से जुड़ी दूसरी टैक्स कटौतियों के लिए फॉर्म 10H या फॉर्म 10CCD देना भी जरूरी है।

इसके अलावा ट्रांसफर प्राइसिंग, चैरिटेबल फंड, वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (क्रिप्टो) और कैपिटल गेन्स से जुड़े कई अन्य फॉर्म भी इसी तय तारीख तक जमा करने होते हैं। आखिरी समय में वेबसाइट पर तकनीकी दिक्कत या जरूरी दस्तावेजों की कमी से बचने के लिए टैक्सपेयर्स को फॉर्म 16, बैंक स्टेटमेंट और निवेश से जुड़े सभी सबूत पहले से तैयार रख लेने चाहिए।

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First Published - June 30, 2026 | 7:31 PM IST

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