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धान की बुआई में सुधार, पर दलहन-तिलहन नुकसान में

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Last Updated- December 07, 2022 | 4:02 PM IST

चार महीने के मॉनसून सीजन में पहले दो महीने बारिश के लिए तरस रहे देश के दक्षिणी क्षेत्र को बारिश में हुई क्रमिक वृध्दि से काफी राहत मिली है। इससे खरीफ फसल के अच्छे होने के अनुमानों में भी इजाफा हुआ है।


यही नहीं, बाजार की धारणा भी बारिश के कारण बदली है। इसे पिछले कुछ दिनों में खाद्य तेलों, खास तौर से सोयाबीन, और कई अन्य बागवानी वाले फसल की कीमतों में आई गिरावट के रुप में देखा जा सकता है। धान की बुआई, खास तौर से उत्तरी क्षेत्रों में, पिछले साल के मुकाबले इस साल बेहतर है।

मानसूनी बारिश में आई तेजी से देश के दक्षिणी हिस्से में भी धान की बुआई रफ्तार पकड़ रही है। हालांकि, मोटे अनाज, दाल और तिलहन अभी भी जुलाई के प्रहले तीन सप्ताहों में हुई अनियमित बारिश से पहुंचे नुकसान से उबर नहीं पाए हैं।

सोयाबीन तिलहन की एकमात्र प्रमुख फसल है जिसके खेती के क्षेत्र में इस बार बढ़ोतरी हुई है। इस साल 31 जुलाई तक 87.7 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती की गई जबकि पिछले साल इसी अवधि में 79.3 लाख हेक्टेयर में खेती की गई थी। मूंगफली और सूरजमुखी को अनियमित बारिश से सबसे अधिक नुकसान हुआ है।

हालांकि, इन फसलों की बुआई चल रही है और इसकी सही तस्वीर बाद में सामने आएगी। मुख्य चिंता दालों की है। जुलाई के अंत तक 21 लाख हेक्टेयर में इसकी खेती की गई थी। दलहन के सभी फसलों, जिसमें अरहर, उड़द और मूंग शामिल हैं, के खेती के क्षेत्र में कमी आई है। चिंता की बात यह है कि मॉनसून में सुधार होने के बावजूद खेती के क्षेत्र में आई कमी की पर्याप्त भरपाई नहीं हो सकती है।

दुखद बात यह भी है म्यांमार में भी दालों के अच्छे उत्पादन की आशा नहीं है। उल्लेखनीय है कि भारत भारी मात्रा में म्यांमार से दालों का आयात करता है। इन सब कारणों से आने वाले महीनों में दालों की कीमतों में तेजी बनी रह सकती है। नकदी फसलों में कपास और गन्ना दोनों की बुआई कम हुई है।

कपास की खेती के क्षेत्र में लगभग 10 लाख हेक्टेयर की कमी देखी जा रही है जिसकी वजह महाराष्ट्र और उसके आस पास के क्षेत्रों में जुलाई के तीसरे सप्ताह तक हुई कम बारिश है। गन्ने की खेती के क्षेत्र में अनियमित बारिश और अन्य फसलों की ओर किसानों के रुख के कारण कमी आई है।

पिछले सीजन हुई कम वसूली से किसान इस सीजन र्में गन्ने की जगह अन्य फसलों, जिसमें धान भी शामिल है, का रुख कर रहे हैं। कपास की बुआई में एक खास बात इस साल यह रही कि तकरीबन 99 प्रतिशत क्षेत्र में ट्रांसजेनिक, कीड़े-मकोड़ों से सुरक्षित बीटी-कॉटन हाइब्रिड बीजों का इस्तेमाल किया गया है।

वर्तमान मानसून सीजन में देश के प्रमुख जलाशयों, खास तौर से दक्षिण के जलाशयों में, पर्याप्त पानी नहीं भरने से परेशानी हो सकती है। एक अगस्त को देश के 81 महत्वपूर्ण जलाशयों, जिस पर सेंट्रल वाटर कमीशन नियमित तौर पर निगाह रखती है, में पानी का कुल भंडार पिछले वर्ष के की समान अवधि के मुकाबले 42 प्रतिशत कम था।

लेकिन पिछले सप्ताह हुई अच्छी बारिश और अगले सप्ताह की गई अच्छी बारिश की भविष्यवाणी से इनमें से कुछ जलाशयों में पानी की कमी में सुधार आने की उम्मीद है। 1 अगस्त 81 में से केवल 45 जलाशयों में 80 प्रतिशत से अधिक पानी था और अन्य 17 जलाशयों में 50 से 80 प्रतिशत पानी की कमी थी।

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First Published - August 8, 2008 | 11:24 PM IST

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