facebookmetapixel
Advertisement
बैंकिंग सेक्टर में कौन देगा बेहतर रिटर्न? मजबूत ग्रोथ और कम NPA के दम पर ये 4 शेयर बने ब्रोकरेज की पसंदUsername फीचर पर सरकार की सख्ती के बीच WhatsApp ने दी सफाई, जारी किए FAQsमहंगे भाव ने बदली किसानों की पसंद, मक्का छोड़ फिर सोयाबीन की खेती की ओर लौटे किसानबड़े डेवलपर्स कराएंगे मुनाफे का सौदा! मोतीलाल ओसवाल ने Lodha, DLF समेत 4 शेयरों पर दिए 39% तक अपसाइड के टारगेटरोज UPI से पेमेंट करते हैं? जानिए इससे Credit Score पर पड़ता है असर या नहींऑटो शेयर खरीदने की सोच रहे हैं? जून सेल्स के बाद Eicher, TVS और Bajaj Auto पर ब्रोकरेज की राय जान लीजिएIndian Passport Ranking 2026: भारत की रैंकिंग में मामूली सुधार, चीन ने लगाई लंबी छलांग; जानिए टॉप पर कौनFintech Stocks: Paytm, PhonePe से लेकर Upstox तक… निवेशकों के लिए क्या हैं बड़े संकेत?शुरुआती कारोबार में रुपया 26 पैसे मजबूत, डॉलर इंडेक्स भी नरमIndia’s EV Transition: चीन से पीछे, लेकिन दुनिया को चौंका सकता है भारत, EV पर SBI की बड़ी रिपोर्ट

अब पैसा कमाने के भी काम आएगा इसबगोल, NCDEX ने लॉन्च किया फ्यूचर ट्रेडिंग

Advertisement

गुजरात देश के इसबगोल उत्पादन में 80 प्रतिशत का योगदान देता है। इसके बाद राजस्थान और मध्य प्रदेश का स्थान है।

Last Updated- April 19, 2023 | 11:47 PM IST
NCDEX

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) ने बुधवार को इसबगोल (Isabgol) के सीड का फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट (future contract) शुरू करते हुए गुजरात के उंझा को इसका वितरण केंद्र बनाया है।

NCDEX ने बयान में कहा, कॉन्ट्रैक्ट मई से अगस्त, 2023 तक चार माह में ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हैं और एक्सचेंज कॉन्ट्रैक्ट शुरू करने वाले कैलेंडर के अनुसार नए कॉन्ट्रैक्ट बाद में जोड़ देगा।

NCDEX के मुख्य कारोबार अधिकारी, कपिल देव ने कहा ने कहा, ‘‘विदेशी एक्सपोर्ट खेप में वृद्धि के साथ इसबगोल भारत की एग्री एक्सपोर्ट वस्तुओं में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। निर्यातकों और व्यापारियों के लिए इस कृषि उपज के उतार-चढ़ाव भरे वातावरण में मूल्य जोखिम का प्रबंधन करने के लिए समान रूप से मजबूत तंत्र होना जरूरी था।’’

बयान में कहा गया है कि इसबगोल सीड कॉन्ट्रैक्ट एक अनिवार्य वितरण-आधारित अनुबंध होगा और उंझा आधार केंद्र पर माल एवं सेवा कर (GST) को छोड़कर इसमें गोदाम में कीमतों पर कारोबार किया जाएगा तथा इसकी दैनिक मूल्य सीमा छह प्रतिशत होगी।

NCDEX ने कहा कि भारत सालाना 1,50,000 से 2,00,000 टन इसबगोल के सईद का उत्पादन करता है, जो वैश्विक उत्पादन का 80 प्रतिशत है। गुजरात देश के इसबगोल उत्पादन में 80 प्रतिशत का योगदान देता है। इसके बाद राजस्थान और मध्य प्रदेश का स्थान है।

Advertisement
First Published - April 19, 2023 | 7:18 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement