facebookmetapixel
Advertisement
35 साल बाद सुधारों की नई जरूरत: अब निर्यातकों और आयातकों पर भरोसा जताने का आया समयजेन-ज़ी की चिंगारी कैसे देशभर में फैली, अनोखे आंदोलन ने झुकाई सरकारपेपर लीक पर सरकार का सख्त संदेश, संसद में कल पेश होगा संशोधन विधेयकउदारीकरण के 35 साल: सुधारों ने खोले अवसरों के द्वार, बोले सुनील मित्तल- आजादी के दिन जैसा था 1991 का बजट भाषणपरीक्षा सुधारों पर प्रधानमंत्री मोदी का बड़ा ऐलान, नंदन नीलेकणि की अगुवाई में बनेगी हाई पावर टास्क फोर्सभारत ने बनाया पहला स्वदेशी टर्बोजेट इंजन, मिसाइल तकनीक में आत्मनिर्भरता की बड़ी छलांगदूसरी और तीसरी तिमाही में रिटर्न 1% से ऊपर रहने की उम्मीद: बैंक ऑफ बड़ौदा2030 तक दोगुना होगा माइनिंग और कंस्ट्रक्शन कैपेक्स, भारत बनेगा ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हबEPFO की UPI सेवा में देरी, अब अगस्त में शुरू हो सकती है PF क्लेम की नई सुविधाभारत की शिक्षा व्यवस्था को नौकरशाही में फेरबदल नहीं, प्रणालीगत सुधारों की जरूरत

सरकार के नए निर्देश के बाद बासमती का आधा निर्यात हो सकता है प्रभावित

Advertisement

सरकार ने सफेद गैर-बासमती चावल के संभावित ‘अवैध’ निर्यात को रोकने के लिए 1,200 डॉलर प्रति टन से कम दाम के बासमती चावल के निर्यात की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है

Last Updated- August 27, 2023 | 10:50 PM IST
Principal Commodity export: Now the export of principal commodity started increasing, export of non-basmati rice also improved from before अब बढ़ने लगा प्रमुख कमोडिटी का निर्यात, गैर बासमती चावल का निर्यात भी पहले से सुधरा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1,200 डॉलर प्रति टन से अधिक मूल्य के बासमती चावल का ही निर्यात करने की अनुमति देने से भारत के इस जिंस के सालाना निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। यह कयास इस क्षेत्र के दिग्गज कारोबारियों ने जताया है।

भारत ने वित्त वर्ष 23 में करीब 46 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया था। निर्यातकों के अनुसार बासमती चावल का औसत एफओबी (फ्री ऑन बोर्ड) मूल्य 1050 डॉलर प्रति टन है। आमतौर पर तीन फार्म में बासमती चावल का निर्यात होता है – कच्चा या ब्राउन, स्टीम और परमल। इसमें कंपनियों का 50 फीसदी से अधिक निर्यात परमल का होता है और इसका एफओबी मूल्य सीमा 1200 डॉलर से कम है।

भारत से बासमती चावल के नामचीन निर्यातकों में से एक जीआरएम ओवरसीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अतुल गर्ग के अनुसार, ‘लिहाजा 1200 डॉलर की सीमा लगाने का बासमती चावल के निर्यात पर महत्त्वपूर्ण असर होगा। इसका दीर्घकालिक असर इस पर निर्भर करेगा कि निर्यात नीति में बदलाव के प्रति निर्यातकों, घरेलू किसानों और सरकार की प्रतिक्रिया कैसी रहती है।

सरकार ने अपने हालिया आदेश में प्रीमियम बासमती चावल की आड़ में सफेद गैर-बासमती चावल के संभावित ‘अवैध’ निर्यात को रोकने के लिए 1,200 डॉलर प्रति टन से कम दाम के बासमती चावल के निर्यात की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है।

वाणिज्य मंत्रालय के रविवार को जारी बयान के मुताबिक उसने व्यापार संवर्द्धन निकाय एपीडा को 1200 डॉलर प्रति टन से नीचे के अनुबंधों को पंजीकृत नहीं करने का निर्देश दिया है। मौजूदा 1,200 डॉलर प्रति टन से नीचे के अनुबंधों को स्थगित रखा गया है। भविष्य के लिए एपीडा के चेयरमैन की अगुवाई में समिति गठित की जाएगी।

Advertisement
First Published - August 27, 2023 | 10:50 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement