facebookmetapixel
Advertisement
Dividend Stocks: टाटा पावर और LIC समेत ये 31 कंपनियां अगले हफ्ते बांटेंगी मुनाफा, देखें पूरी लिस्टट्रंप ने की पीएम मोदी की जमकर तारीफ, बोले: 150 करोड़ लोगों का यह नेता है असली ‘टफ कुकी’NEET UG 2026: नागपुर के छात्र को मिला अबू धाबी का परीक्षा केंद्र, NTA की लापरवाही से परिवार परेशानBonus Stocks Alert: अगले हफ्ते इन 2 कंपनियों के निवेशकों की चमकेगी किस्मत, मिलेंगे मुफ्त में शेयरOMC को भारी चपत: तेल कंपनियों को लगा ₹22,000 करोड़ का बड़ा झटका, बाजार से कम दाम पर बेची रसोई गैसCrude Oil Import: पश्चिम एशिया संकट की भारी चपत, बराबर तेल खरीदने के बाद भी 81.5% बढ़ा भारत का खर्चRBI Regulatory Action: विदेश से जुटाई उधारी की रोज देनी होगी जानकारी, RBI ने बैंकों को दिया कड़ा निर्देशबैंकिंग सेक्टर में हलचल! वारी रिन्यूएबल्स के बड़े सौदे को हरी झंडी, HSBC इंडिया ने दिए ₹1,255 करोड़देश के बड़े कैंसर अस्पताल HCG ऑन्कोलॉजी हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड, नियमों की अनदेखी को लेकर हुई कार्रवाईAmazon ने तय समय से पहले हासिल किया बड़ा लक्ष्य, भारत में बनी ‘वॉटर पॉजिटिव’ कंपनी

नुकसान में किसान

Advertisement
Last Updated- December 07, 2022 | 11:05 PM IST

गैर-बासमती चावल के निर्यात पर पाबंदी के कारण हरियाणा और पंजाब के चावल किसानों को पिछले साल के मुकाबले 30 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ रहा है।


हरियाणा के अंबाला शहर में तो किसानों ने उम्दा किस्म के गैर-बासमती चावल के निर्यात पर पाबंदी हटाने की मांग को लेकर लगातार एक महीने से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि निर्यात पर पाबंदी के नाम पर मंडी में उन्हें औने-पौने दाम पर चावल बेचना पड़ रहा है।

चावल की नयी फसल बाजार में आने के कारण चावल के भाव में और गिरावट की उम्मीद जतायी जा रही है। किसानों के मुताबिक, पिछले साल जिस चावल की बिक्री 2500 रुपये प्रति क्विंटल हो रही थी उसे 1700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचा जा रहा है।

वहीं 1800 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिकने वाला चावल 1100 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गया है। किसानों का कहना है कि ये सब अर्द्ध-बासमती श्रेणी के चावल हैं और विदेशों में उनकी खासी मांग है।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय समन्वय समिति के संयोजक चौधरी युद्धबीर सिंह कहते हैं कि सरकार की नीति के कारण हरियाणा और पंजाब के किसानों को जबरदस्त घाटा हो रहा है। सरकार खुद भी मान रही है कि चावल की आपूर्ति मांग के मुकाबले काफी अधिक है। इसलिए निर्यात की इजाजत देने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।

चावल के थोक व्यापारी भी इस बात से सहमत नजर आ रहे हैं कि नई फसल के आते ही उम्दा किस्म के बासमती चावल की कीमत 50-55 रुपये प्रति किलोग्राम हो जाएगी। पिछले साल इसकी कीमत 90 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर चली गयी थी।  गैर-बासमती चावल में इस माह कम से कम 10 फीसदी की गिरावट की संभावना है।

Advertisement
First Published - October 8, 2008 | 11:40 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement