facebookmetapixel
Advertisement
अगर युद्ध एक महीने और जारी रहा तो दुनिया में खाद्य संकट संभव: मैट सिम्पसनहोर्मुज स्ट्रेट खुला लेकिन समुद्री बीमा प्रीमियम महंगा, शिपिंग लागत और जोखिम बढ़ेपश्चिम एशिया युद्ध का भारत पर गहरा असर, रियल्टी और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव मेंगर्मी का सीजन शुरू: ट्रैवल और होटल कंपनियों के ऑफर की बाढ़, यात्रियों को मिल रही भारी छूटबाजार में उतार-चढ़ाव से बदला फंडरेजिंग ट्रेंड, राइट्स इश्यू रिकॉर्ड स्तर पर, QIP में भारी गिरावटपश्चिम एशिया संकट: MSME को कर्ज भुगतान में राहत पर विचार, RBI से मॉरेटोरियम की मांग तेजRCB की बिक्री से शेयरहोल्डर्स की बल्ले-बल्ले! USL दे सकती है ₹196 तक का स्पेशल डिविडेंडतेल में बढ़त से शेयर और बॉन्ड में गिरावट; ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से इनकारगोल्डमैन सैक्स ने देसी शेयरों को किया डाउनग्रेड, निफ्टी का टारगेट भी घटायाकिधर जाएगा निफ्टीः 19,900 या 27,500; तेल और भू-राजनीति तनाव से तय होगा रुख

सामान्य से अधिक बारिश का मतलब कम महंगाई नहीं

Advertisement

1953 के बाद चौथी बार ऐसा होगा, जब लगातार 2 वर्ष ‘सामान्य’ या ‘सामान्य से अधिक’ बारिश होगी।

Last Updated- April 16, 2025 | 11:05 PM IST
Kharif sowing
प्रतीकात्मक तस्वीर

मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि 2025 में कुल मिलाकर देश में औसत बारिश ‘सामान्य से अधिक’ रहेगी। अगर यह अनुमान सही रहता है तो 1953 के बाद चौथी बार ऐसा होगा, जब लगातार 2 वर्ष ‘सामान्य’ या ‘सामान्य से अधिक’ बारिश होगी।

इसके पहले 2010 में ऐसा हुआ था, जब 2010 और 2013 के बीच भारत में दो बार लगातार दो साल तक सामान्य से अधिक और सामान्य बारिश हुई थी।

मौसम विभाग तब सामान्य बारिश मानता है, जब दीर्घावधि औसत (एलपीए) के 96 से 104 प्रतिशत के बीच बारिश होती है। जब एलपीए के 106 प्रतिशत से ज्यादा बारिश होती है तो उसे ‘सामान्य से अधिक’ के रूप मे वर्गीकृत किया जाता है। 2017 से 2020 के बीच जून से सितंबर के दौरान एलपीए 870 मिलीमीटर था।

2025 के लिए बारिश के मौसम विभाग के अनुमान से यह उम्मीद बढ़ी है कि खाद्य उत्पादन पर्याप्त रहने पर महंगाई नियंत्रण में रहेगी। हालांकि 10 साल से ज्यादा समय के आंकड़ों से पता चलता है कि कोई जरूरी नहीं है कि सामान्य मॉनसून के वर्षों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर कम रहे।

महंगाई दर कई वजहों से प्रभावित होती है, जिसमें स्थानीय मांग और आपूर्ति आदि शामिल है। इसके अलावा अगर देश में औसत बारिश किसी खास साल में सामान्य से ऊपर रहती है तो क्षेत्रवार इसमें बहुत अंतर होता है, जिसका असर कृषि उत्पादन पर पड़ता है। इस साल मौसम ने बिहार और तमिलनाडु में ‘सामान्य से कम’ बारिश का अनुमान
लगाया है।

Advertisement
First Published - April 16, 2025 | 10:40 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement