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चीनी जारी करने का ऐलान समय से पहले!

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Last Updated- December 07, 2022 | 9:44 PM IST

सरकार मिलों द्वारा खुले बाजार में बिक्री की जाने वाली चीनी की मात्रा के संबंध में घोषणा कुछ दिन पहले कर सकती है। उसके इस कदम से चीनी की बेहतर उपलब्धता होने की उम्मीद है।

सूत्रों ने बताया कि मिलों द्वारा खुले बाजार में हर माह कितनी मात्रा में चीनी की मात्रा को बेचा जाएगा इसका फैसला खाद्य मंत्रालय करता है जो अपने निर्णय को अक्तूबर से कुछ दिन पहले ही खिसका सकता है।

हर चीनी मिल के लिए मात्रा का आवंटन करने वाला रिलीज ऑर्डर हरेक माह की पहली तारीख को जारी किया जाता है। उसी के अनुसार चीनी कंपनियां खुले बाजार में चीनी की बिक्री करती हैं।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘हम गैर-लेवी वाले आवंटन की घोषणा महीने के पहले ही करने की योजना बना रहे हैं ताकि बाजार में चीनी की बेहतर उपलब्धता हो सके।’

उन्होंने कहा कि मिलों को भी गन्ने की पेराई के लिए अधिक समय मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि बाजार में चीनी की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता हो ताकि त्योहारों की जरूरत को पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि किसी तरह की कोई कमी नहीं है।

इस माह खुले बाजार में चीनी की उपलब्धता करीब 21 लाख टन थी जिसमें 12 लाख टन का मासिक कोटा और करीब नौ लाख टन का बफर स्टॉक शामिल है। पिछले सितंबर में चीनी की कुल उपलब्धता लगभग 13 लाख टन थी।

अगले माह जारी की जाने वाली मात्रा के बारे में पूछने पर अधिकारी ने कहा, ‘यह मांग पर निर्भर करेगा। बाजार का आकलन करने के  बाद ही रिलीज जारी किए जाते हैं।’

सरकारी अधिकारी ने कहा कि दो से 16 सितंबर के दौरान मुजफ्फरनगर में चीनी का मिल से बाहर का मूल्य 1,927 रुपये प्रति क्विंटल से घटाकर 1,815 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है तथा कोल्हापुर में इसे 1,820 रुपये के स्तर से घटाकर 1,680 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।

उत्तर प्रदेश का मुजफ्फरनगर और महाराष्ट्र का कोल्हापुर देश में चीनी के दो महत्वपूर्ण व्यापार केन्द्र है। इस बीच चीनी उद्योग ने सरकार से 12 लाख टन के मासिक खुले बाजार कोटा को बेचने के लिए समय-सीमा का विस्तार करने की अपील की है। नियमों के अनुसार गैर-लेवी वाले चीनी का बिना बिके हिस्से को लेवी में परिवर्तित कर दिया जाता है जिसे मिलों को सरकार को बेचना होता है।

लेवी चीनी की कीमत सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है जो बाजार दर से काफी कम होती है।



 

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First Published - September 18, 2008 | 10:25 PM IST

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