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बजट में बुनियादी ढांचे के खर्च पर होगा जोर

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Last Updated- December 10, 2022 | 2:12 AM IST

आगामी केंद्रीय बजट में आत्मनिर्भर पैकेजों पर जोर दिए जाने की उम्मीद है। सरकार ने आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिए 2020 में इन पैकेजों की घोषणा की थी। बुनियादी ढांचा संबंधी बजटीय घोषणाओं में कोई बड़ा फेरबदल होने की संभावना नहीं है। सड़क निर्माण, समुद्री और रेल संबंधी आर्थिक विकास पर जोर देते हुए इन पर खर्च को बढ़ाया जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अगले पांच वर्ष में अतिरिक्त 60,000 किलोमीटर सड़क के विकास का प्रस्ताव रखा है जिसमें से 2,500 किलोमीटर का एक्सप्रेसवे/पहुंच नियंत्रित राजमार्ग, 9,000 किलोमीटर का आर्थिक गलियारा, 2,000 किलोमीटर का अपतटीय और बंदरगाह संपर्क राजमार्ग और 2,000 किलोमीटर का सीमा सड़क/रणनीतिक राजमार्ग है। मंत्रालय की योजना 100 पर्यटन गंतव्यों के लिए संपर्क में सुधार लाने और पांच वर्ष में 45 कस्बों और शहरों के लिए बाइपासों के निर्माण की भी है।   
सरकार को कम से कम इसके खर्च का कुछ हिस्सा और अन्य बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने की आवश्यकता होगी, हालांकि इस क्षेत्र को अपने अधिकांश निवेश के लिए निजी क्षेत्र पर निर्भर रहना होगा। डेलॉयट इंडिया में सरकारी और सार्वजनिक सेवाओं के पार्टनर और लीडर अरिंदम गुहा ने कहा कि बुनियादी ढांचे पर केंद्र सरकार का अनुमानित बजटीय खर्च 2020-21 में 4.5 लाख करोड़ रुपये रह सकता है। सीमित राजकोषीय गुंजाइश को देखते हुए अगले तीन से चार साल तक सालाना आधार पर 10 फीसदी की वृद्घि के अलावा कोई बड़ी वृद्घि मुश्किल होगी। उन्होंने कहा, ‘लगभग 110 लाख करोड़ रुपये के कुल राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (एनआईपी) परिव्यय को देखते हुए, केंद्र सरकार का बजटीय खर्च 18-20 फीसदी के बीच रह सकता है जो कि एनआईपी की उम्मीदों के अनुरूप है।’
ईवाई एलएलपी में सरकारी अवसंरचना, रणनीति और सौदा के पार्टनर अभय कृष्ण अग्रवाल को भी लगता है कि आगामी बजट में सरकार की ओर से बुनियादी ढांचा में निवेश पर अधिक जोर दिया जाना जारी रहेगा क्योंकि इसके जरिये वैश्विक महामारी से हलाकान अर्थव्यवस्था को उबारने में मदद मिलती है।
अग्रवाल ने कहा, ‘राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (एनआईपी) के तहत चिन्हित क्षेत्रों में परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार फंड जुटाने में कामयाब रहेगी। हालांकि, बुनियादी ढांचे में राज्यों के योगदान में कमी आ सकती है क्योंकि कई राज्य उच्च राजकोषीय घाटा और तरलता संकट से जूझ रहे हैं। सरकार जल जीवन मिशन (जेजेएम) और अमरुत जैसी केंद्रीय योजनाओं में बुनियादी ढांचा निवेश में राज्यों की हिस्सेदारी को तार्किक बनाने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण अपना सकती है।’
अग्रवाल ने कहा कि सरकार बुनियादी ढांचा क्षेत्र में और अधिक निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए कुछ सुधारों की घोषणा कर सकती है। उन्होंने कहा, ‘सड़क निर्माण के लिए बीओटी मॉडल में टै्रफिक में बदलाव आने से परियोजनाओं के जोखिम को समाप्त किया जा सकता है जिससे परियोजनाओं को निजी क्षेत्र के लिए और अधिक व्यावहारिक बनाया जा सके। रेलवे में बड़े स्टेशनों सहित विभिन्न श्रेणियों के स्टेशनों के पुनर्विकास में तेजी लाई जाएगी। उच्च गति रेल (एचएसआर) और समर्पित मालवहन गलियारों में निवेशों को प्रमुखता दिए जाने की उम्मीद है।’
बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए एक विकास वित्त संस्थान की घोषणा की जा सकती है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने पिछले बजट में इस तरह की एक संस्था बनाने की घोषणा की थी लेकिन उस मोर्चे पर बहुत कुछ नहीं हो पाया है।
पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने सरकार को दिए अपने बजट पूर्व ज्ञापन में कहा, ‘सरकार को राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन के लिए एक विशेष उद्देश्य की कंपनी (एसपीवी) के जरिये विदेशी बॉन्ड जारी कर विदेश के बाजारों से उधारी लेकर निवेश फंड जुटाने पर विचार करना चाहिए। यह एसपीपी एक बड़े विकास वित्त संस्था (डीएफआई) के तौर पर काम कर सकती है।’

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First Published - January 6, 2021 | 9:18 PM IST

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