बजट

विनिवेश की रफ्तार से बनेगा राजस्व का रास्ता, बजट के बाद बोलीं निर्मला सीतारमण

बजट पेश करने के अगले दिन वित्त मंत्री ने वि​भिन्न पहलुओं पर की चर्चा

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रुचिका चित्रवंशी   
हर्ष कुमार   
मोनिका यादव   
Last Updated- February 02, 2026 | 10:59 PM IST

वित्त वर्ष 2027 का आम बजट पेश करने के एक दिन बाद आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि विनिवेश और परिसंप​त्ति मुद्रीकरण की गति और दिशा आने वाले वित्त वर्ष में राजस्व जुटाने का माहौल तैयार करेगी।

सीतारमण ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘विनिवेश की योजना में कोई बदलाव नहीं किया गया है। विनिवेश की गति और दिशा से राजस्व जुटाने का माहौल बनेगा। केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के ज्यादा से ज्यादा सार्वजनिक निर्गम लानेऔर परिसंप​त्तियों के मुद्रीकरण करके विनिवेश पर और अ​धिक ध्यान देना चाहिए। वित्त वर्ष 2027 के लिए विनिवेश से राजस्व प्रा​प्ति का जो लक्ष्य रखा गया है वह वाजिब हैं।’

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में विविध पूंजी प्रा​प्ति मद के तहत 80,000 करोड़ रुपये का बड़ा विनिवेश लक्ष्य रखा गया है, जिसमें केंद्रीय पीएसयू में शेयरों की बिक्री के साथ-साथ परिसंप​त्तियों का मुद्रीकरण भी शामिल है। हालांकि वित्त वर्ष 2026 के लिए सरकार ने बजट में विनिवेश से 47,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था मगर संशो​धित अनुमान से इसे घटाकर 33,837 करोड़ रुपये कर दिया गया। वित्त मंत्री ने कहा कि आईडीबीआई बैंक में सरकार की हिस्सेदारी की बिक्री होगी। मगर ऐसा कब तक होगा इसके बारे में उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी।

ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) संशोधन विधेयक पर सीतारमण ने कहा कि बजट सत्र के दूसरे हिस्से में यह विधेयक लाए जाने की उम्मीद है। संसद की प्रवर समिति ने दिसंबर में विधेयक पर अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी।

राजकोषीय सुदृढ़ीकरण पर वित्त मंत्री ने कहा कि यह हर साल की स्थिति पर निर्भर करेगा, जिसमें प्राथमिकता वृद्धि की गति बनाए रखने की होगी। उन्होंने आगे कहा, ‘मैं देखना चाहूंगी कि अगले साल यह कैसा रहता है।’

विशेष आ​र्थिक क्षेत्र को अपने उत्पाद घरेलू शुल्क क्षेत्र में बेचने की इजाजत देने के मुद्दे पर सीतारमण ने कहा कि यह एकबारगी और ‘अस्थायी’ उपाय है।
बजट में एमएसएमई को बढ़ावा देने के प्रस्ताव पर वित्त मंत्री ने कहा कि ज्यादार ध्यान मध्यम उपक्रमों पर रहेगा। उन्होंने कहा, ‘छोटे उपक्रमों को भी बड़ा होने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।’

सीतारमण ने कहा कि वै​श्विक अनिश्चितता के कारण सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव है और कई केंद्रीय बैंक सोने में निवेश कर रहे हैं, जिससे कीमतों में उथलपुथल देखी जा रही है।

First Published : February 2, 2026 | 10:53 PM IST