म्युचुअल फंड

बजट में बढ़ी बाजार उधारी से बॉन्ड यील्ड ऊपर, डेट म्युचुअल फंड निवेशकों को रणनीति बदलने की जरूरत

केंद्रीय बजट में जितना अनुमान लगाया गया था, उससे कहीं अधिक सकल बाजार उधारी की घोषणा हुई है। इससे ऋण बाजार में काम करने वाले लोग थोड़े निराश हैं

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हिमाली पटेल   
Last Updated- February 02, 2026 | 10:18 PM IST

केंद्रीय बजट में जितना अनुमान लगाया गया था, उससे कहीं अधिक सकल बाजार उधारी की घोषणा हुई है। इससे ऋण बाजार में काम करने वाले लोग थोड़े निराश हैं। 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड, जिन्हें जी-सेक भी कहते हैं, उनसे मिलने वाला रिटर्न बढ़ रहा है। मई 2022 में यह 6.2 प्रतिशत तक गिर गया था लेकिन अब यह 6.7 प्रतिशत से भी ऊपर चला गया है। ऐसे में जो लोग डेट म्युचुअल फंडों में निवेश करते हैं, उन्हें मौजूदा माहौल को देखते हुए अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत है।

राजकोष मजबूत करने की कोशिश जारी

अच्छी बात यह है कि बजट में राजकोषीय मजबूती पर ध्यान दिया गया है। ऐक्सिस म्युचुअल फंड की फिक्स्ड आमदनी के प्रमुख देवांग शाह का कहना है कि सरकार ने बजट में लक्ष्य रखा है कि वित्त वर्ष 2026-27 तक राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत होगा, जो वित्त वर्ष 2026 के संशोधित अनुमान से कम है। सरकार का लक्ष्य है कि 2031 तक ऋण-जीडीपी अनुपात को लगभग 50 प्रतिशत तक लाया जाए। इससे पता चलता है कि सरकार ऋण प्रबंधन पर ध्यान दे रही है।

कोटक महिंद्रा परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) में फिक्स्ड इनकम के प्रमुख अभिषेक बिसेन का कहना है, ‘राजकोषीय घाटे को कम करने की प्रतिबद्धता से लंबी अवधि के ब्याज दर के माहौल को समर्थन मिलता है और भारत की व्यापक स्थिरता में भरोसा बढ़ता है।’ बजट में कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को बढ़ाने के लिए भी कुछ कदमों की घोषणा की गई। अगर इन्हें अच्छी तरह से लागू किया जाए तो समय के साथ लिक्विडिटी, भागीदारी और मूल्य निर्धारण दक्षता में सुधार हो सकता है।

गैर-बजट से जुड़ा एक और घटनाक्रम जो ऋण बाजारों के लिए अच्छा संकेत है, वह यह है कि पेंशन फंड अपने परिसंपत्ति आवंटन में बदलाव कर रहे थे जिससे इस साल मांग प्रभावित हुई। यूटीआई एएमसी के वरिष्ठ कार्यकारी उपाध्यक्ष और प्रमुख (फिक्स्ड इनकम) अनुराग मित्तल का कहना है, ‘अब यह सामान्य बात है। पेंशन फंडों की मांग वित्त वर्ष 2027 में सार्थक रूप से बढ़नी चाहिए।’

नकारात्मक: अधिक सकल बाजार उधारी

बजट में वित्तीय वर्ष 2027 के लिए लगभग 17.2 लाख करोड़ रुपये की सकल बाजार उधारी का अनुमान लगाया गया है, जो बाजार की उम्मीदों से अधिक है जो लगभग 16-16.5 लाख करोड़ रुपये आंकी जा रही थी।

शाह का कहना है, ‘बढ़ी हुई संख्या से निकट अवधि में आपूर्ति का दबाव बढ़ता है, खासतौर पर तब जब इसे राज्य विकास ऋणों (एसडीएल) के बड़े निर्गम के साथ इसे जोड़ दिया जाए। इसने 10-वर्षीय सेगमेंट में यील्ड पर ऊपर की ओर दबाव बनाए रखा है।’
हालांकि, कुछ फंड प्रबंधक अंतिम उधार परिणाम को लेकर आशावादी हैं।

10 वर्षीय बॉन्ड की स्थिति

भू-राजनीतिक तनावों ने वैश्विक अनिश्चितता को बढ़ा दिया है। बिसेन का कहना है, ‘भारत पर लगाए गए टैरिफ ने रुपये पर दबाव डाला है। अधिक अनिश्चितता और मुद्रा के मूल्यह्रास के कारण भारतीय बॉन्ड की मांग कम हो गई है और रिटर्न बढ़ा है।’10 साल का बेंचमार्क रिटर्न 6.70-6.90 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है।

लंबी अवधि के फंडों में अस्थिरता

वित्त वर्ष 2027 में अधिक उधारी से बॉन्ड यील्ड पर दबाव बढ़ा है। आनंद राठी वेल्थ के संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) फिरोज अजीज का कहना है कि 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड का 6.7-6.75 प्रतिशत के आसपास होना आपूर्ति का दबाव दर्शाता है, जो उम्मीद से अधिक रह सकता है और लंबी अवधि के फंडों में अस्थिरता ला सकता है।

First Published : February 2, 2026 | 10:13 PM IST