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पूर्व सेना प्रमुख नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों पर हंगामा, लोकसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित केंद्रीय मंत्रियों ने विपक्ष के नेता के उक्त लेख का उल्लेख किए जाने का विरोध किया

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बीएस संवाददाता   
Last Updated- February 02, 2026 | 11:16 PM IST

लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा पूर्व सेना प्रमुख एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों के बारे में एक समाचार पत्रिका के लेख का बार-बार उल्लेख किए जाने के बाद सोमवार को सदन के दोपहर के सत्र को दो बार स्थगित करना पड़ा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित केंद्रीय मंत्रियों ने विपक्ष के नेता के उक्त लेख का उल्लेख किए जाने का विरोध किया। मगर गांधी के अपने रुख पर अड़े रहने के बाद लोक सभा की कार्यवाही शाम 4 बजे के बाद दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।

सोमवार को संसद के दोनों सदनों ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा की। लोक सभा में गांधी ने अपना भाषण यह कहते हुए शुरू किया कि वह सबसे पहले पिछले लोक सभा अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संसद सदस्य तेजस्वी सूर्य द्वारा कांग्रेस पर राष्ट्रवाद के आरोपों का जवाब देना चाहेंगे। गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे के ‘संस्मरण’ के उद्धरण के साथ शुरुआत की। इसमें नरवणे ने 2020 में भारत-चीन सैन्य संघर्ष का जिक्र किया है।

जैसे ही गांधी ने नरवणे की किताब का उल्लेख किया और लद्दाख में सीमा पर झड़पों में देश के शीर्ष नेतृत्व के साथ अपनी बातचीत के पूर्व सेना प्रमुख के संस्करण को पढ़ने की कोशिश की वैसे ही रक्षा मंत्री सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू और अन्य भाजपा सांसदों ने विरोध किया।

सिंह ने तर्क दिया कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है और गांधी के बयान का कोई ‘प्रामाणिक स्रोत’ नहीं है। गांधी ने तर्क दिया कि वह अप्रकाशित संस्मरणों के बारे में एक समाचार पत्रिका के लेख के आधार पर टिप्पणी कर रहे है। लोक सभा अध्यक्ष बिरला ने सदन की ‘कार्यविधि और कार्य संचालन नियम’ का हवाला देकर गांधी को इस विषय पर बोलने की अनुमति नहीं दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस समय सदन में मौजूद थे। लगभग 50 मिनट तक हंगामा जारी रहा जिस पर लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन की कार्यवाही से असंबंधित मामले पर किसी भी पुस्तक या समाचार पत्र की कतरन को उद्धृत नहीं किया जा सकता है। मगर गांधी ने जोर देकर कहा कि यह दस्तावेज प्रामाणिक है और वह इससे उद्धृत कर सकते हैं। सिंह ने पूछा कि अगर आरोप के अनुसार किताब प्रकाशित करने की अनुमति नहीं दी गई तो नरवणे ने अदालत का रुख क्यों नहीं किया। इसके बाद सदन की कार्यवाही 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर गांधी ने फिर से इस मुद्दे को उठाया जिसका सत्ता पक्ष ने विरोध किया। रीजीजू ने कहा कि गांधी को ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए जो सेना की गरिमा कम करती हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं ने उनका समर्थन किया। गतिरोध जारी रहने पर बिरला ने सदन को 4 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

शाम 4 बजे सदन फिर से शुरू हुआ जिसमें लोक सभा के चेयरपर्सन की समिति के सदस्य भाजपा सांसद जगदंबिका पाल (बिरला नहीं) कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे थे। गांधी ने जोर देकर कहा कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला उठा रहे हैं। उन्होंने कहा,‘मुझे समझ में आता है कि रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री के लिए यह असहज है। मैं राष्ट्रीय सुरक्षा को सबसे महत्त्वपूर्ण मुद्दा मानता हूं। अगर यह असहज नहीं होता तो वे मुझे बोलने देते मगर तथ्य यह है कि वे मुझे बोलने नहीं दे रहे हैं। यह दर्शाता है कि वे असहज हैं।’

इसके बाद अध्यक्ष ने सदन कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी। सदन से निकलने के बाद और संसद भवन परिसर में रीजीजू ने मीडिया से कहा कि गांधी ने लोक सभा अध्यक्ष के फैसले का उल्लंघन किया और सदन का समय बर्बाद किया। रीजीजू ने कहा कि अध्यक्ष स्पीकर बिरला ने सदन में फैसला दिया था कि केवल प्रामाणिक दस्तावेजों को ही उद्धृत किया जा सकता है।

दूसरी तरफ विपक्ष के नेता ने कहा कि उन्हें लोक सभा में पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक से कुछ बातों का उद्धृत करने की अनुमति नहीं दी जा रही है क्योंकि इसमें 2020 में चीन के साथ संघर्ष के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री सिंह पर सेना को ‘नीचा दिखाने’ का आरोप है। उन्होंने कहा कि सरकार एक वाक्य से डरी हुई है जिसे वह पूर्व सेना प्रमुख की किताब से उद्धृत करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह इसे सदन में बताएंगे।

गांधी ने कहा, ‘नरवणे जी ने अपनी किताब में प्रधानमंत्री और राजनाथ सिंह जी का स्पष्ट रूप से लिखा है जो एक लेख में प्रकाशित हुआ है। मैं उस लेख से उद्धृत कर रहा हूं। वे डरे हुए हैं क्योंकि अगर यह सामने आ गया तो नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह की हकीकत सामने आ जाएगी। जब चीन हमारे सामने था और आगे बढ़ रहा था तो 56 इंच की छाती का क्या हुआ?’ गांधी ने कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सेना प्रमुख को उनकी पुस्तक प्रकाशित करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। भाजपा प्रवक्ता अनिल बलूनी ने बाद में कहा कि गांधी ने संसद की गरिमा कम की है और लोक सभा में अपने झूठे आरोपों से भारतीय सैनिकों के मनोबल को ठेस पहुंचाई है।

First Published : February 2, 2026 | 11:10 PM IST