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STT बढ़ाकर ₹73,700 करोड़ जुटाने का लक्ष्य, लेकिन F&O वॉल्यूम घटने से अनुमान पर उठे सवाल

यह राशि वित्त वर्ष 2026 के 63,670 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से 16 प्रतिशत अधिक है

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समी मोडक   
Last Updated- February 02, 2026 | 10:15 PM IST

सरकार वित्त वर्ष 2027 में प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) से 73,700 करोड़ रुपये प्राप्त होने का अनुमान लगा रही है। यह राशि वित्त वर्ष 2026 के 63,670 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से 16 प्रतिशत अधिक है। लेकिन वायदा एवं विकल्प (एफऐंडओ) में एसटीटी में भारी बढोतरी की वजह से विश्लेषकों ने संदेह जताया है कि बजट के ये अनुमान हासिल किए जा सकेंगे या नहीं।

पिछले साल, सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए एसटीटी संग्रह में 78,000 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड अनुमान लगाया था। इस आंकड़े को ट्रेडिंग वॉल्यूम में भारी गिरावट के कारण 18 प्रतिशत तक घटा दिया गया है। वैश्विक बाजारों की तुलना में भारत का कमजोर प्रदर्शन के अलावा एफऐंडओ ट्रेडिंग को नियंत्रित करने वाले कड़े मानकों से कारोबार में गिरावट आई है। इसलिए एसटीटी संग्रह घटा है। कारोबारियों का कहना है कि आने वाले वर्ष में भी इसी तरह का रुझान रह सकता है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के चेयरमैन और सह-संस्थापक रामदेव अग्रवाल ने कहा, ‘हमें पूंजी बाजार पर एसटीटी के असर के बारे में यथार्थवादी होना चाहिए। एसटीटी में बढ़ोतरी और डिविडेंड से सेट्स-ऑफ खत्म करने से बाजारों के लिए मुश्किलें हो रही हैं। इस कारण कई हाई-फ्रीक्वेंसी और आर्बिट्राज ट्रेड अव्यावहारिक हो सकते हैं, जिनसे शॉर्ट टर्म में बाजार की तरलता कम हो जाएगी।’

1 अप्रैल से वायदा पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है, जबकि ऑप्शन में यह ऑप्शन प्रीमियम के 0.1 प्रतिशत से बढ़कर 0.15 प्रतिशत हो जाएगा। ऑप्शंस के सौदों पर कर को भी वैल्यू के 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत किया गया है। एसटीटी सरकार के प्रत्यक्ष कर संग्रह का हिस्सा है और मान्यताप्राप्त शेयर बाजारों में किए गए सभी प्रतिभूति कारोबारों पर लगाया जाता है, जिनमें इक्विटी, वायदा और विकल्प और इक्विटी-आधारित म्युचुअल फंड शामिल हैं।

इस कर से संग्रह आमतौर पर ट्रेडिंग वॉल्यूम के साथ-साथ बढ़ता है, जो सेकंडरी बाजार के प्रदर्शन से जुड़ा होता है। वर्ष 2024 के बाद एसटीटी में यह दूसरी बढ़ोतरी है।

जीरोधा के संस्थापक नितिन कामत ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘एसटीटी में लगातार बढ़ोतरी से अनिश्चितता के साथ दूसरी समस्या यह है कि किसी बिंदु पर आपको ट्रेडिंग वॉल्यूम पर प्रभाव दिखना शुरू हो जाएगा क्योंकि लेनदेन की लागत ट्रेडिंग को अव्यावहारिक बना देगी।’

बीएनपी पारिबा के एक नोट में कहा गया है, ‘उद्योग एसटीटी को तर्कसंगत बनाने की मांग करता रहा है, लेकिन इसके बजाय सरकार ने इसे बढ़ा दिया है। हमारा मानना है कि इससे वायदा एवं विकल्प वॉल्यूम पर असर पड़ सकता है।’

First Published : February 2, 2026 | 10:08 PM IST