facebookmetapixel
Advertisement
यूपी सरकार ने FY27 के लिए तय किया ₹71,278 करोड़ का भारी-भरकम आबकारी लक्ष्य, पहले तीन महीने में रिकॉर्ड कमाईअब उत्तर प्रदेश से सीधे विदेश जाएगा आम, हॉट वेपर ट्रीटमेंट की व्यवस्था राज्य में ही करने जा रही योगी सरकारउत्तर प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए कोल इंडिया और UPRVUNL के बीच हुआ बड़ा समझौताफार्मा कंपनियों को सरकार से बड़ी राहत, अब दवा की वास्तविक ओवरचार्जिंग पर ही होगी कार्रवाईभीषण गर्मी और लू का असर: IEX पर 32% महंगी हुई बिजली, दाम बढ़कर ₹5.2 प्रति यूनिट पर पहुंचाFY27 में निर्यात का नया रिकॉर्ड बनाने को तैयार भारत, डंपिंग पर लगेगी लगाम; बढ़ेगा घरेलू विनिर्माण: गोयलतेल कंपनियां फिर मुनाफे में, घटा राजस्व नुकसान; पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्यों है सरकार और ब्रोकरेज में रारभारत में जापानी कंपनियों के GCC का दबदबा, 2030 तक अर्थव्यवस्था में दिखेगा बड़ा असर: रिपोर्टबंपर सेल के चलते भीषण गर्मी में भी चमकी FMCG कंपनियां, Q1 में दो अंकों की ग्रोथ की उम्मीदराम मंदिर चढ़ावा विवाद पर RSS ने दिया पहला बयान, कहा: घटना दुर्भाग्यपूर्ण, दोषियों को मिले कड़ी सजा

कारोबारियों को रास नहीं आया बजट

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 9:27 PM IST

कारोबारियों को आम बजट रास नहीं आया है। कारोबारियों का कहना है कि बजट में फैक्टरी/ कंपनी प्रारूप वाले खासकर छोटे उद्यमियों को राहत पहुंचाने वाले कई अहम प्रावधान किए गए हैं। लेकिन फर्म /दुकान वाले कारोबारियों को बजट में खास राहत नहीं दी गई है, जबकि इन कारोबारियों को भी कोरोना के कारण काफी नुकसान हुआ है।
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के महामंत्री हेमंत गुप्ता ने कहा कि कोरोना काल में फैक्टरियां तो फिर भी खुली रहीं, लेकिन दुकानों पर सख्‍ती ज्यादा हुई इसलिए कोरोना की सबसे ज्यादा मार दुकान वाले कारोबारियों के कारोबार पर पड़ी। लिहाजा सरकार को इस आम बजट में इन कारोबारियों को सबसे ज्यादा ख्‍याल रखना चाहिए। लेकिन बजट में कारोबारियों को सीधे तौर पर कोई राहत नहीं दी गई। बजट में जिस तरह से आयकर रिटर्न में संशोधन करने के लिए दो साल तक की मोहलत दी है, उसी तर्ज पर अगर जीएसटी में संशोधन की मोहलत मिलती तो कारोबारियों को बड़ी राहत मिलती। दिल्ली व्यापार महासंघ के अध्यक्ष देवराज बवेजा कहते हैं कि फैक्टरी कंपनी वाले उद्यमियों को तो 22 फीसदी कॉरपोरेट कर देना पड़ता है, जबकि फर्म दुकान वाले कारोबारियों को 30 फीसदी की दर से कर देना होता है। इस विसंगति को सुधार कर कोरोना की मार झेल रहे कारोबारियों को राहत दी जा सकती थी। चैंबर ऑफ ट्रेड ऐंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कारोबारियों की मांग थी कि आयकर में 5 फीसदी और 20 फीसदी के बीच में 10 फीसदी का स्लैब भी होना चाहिए, जो बजट में पूरी नहीं हुई। बजट में कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए कई घोषणाएं की गई हैं, जबकि आम कारोबारियों पर ध्यान नहीं दिया।

कन्फेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स के महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि जीएसटी कर ढांचे के सरलीकरण और युक्तिकरण के संबंध में कुछ भी ठोस घोषणा नहीं की गई है जो ‘एक बाजार-एक कर’ के सिद्धांत के विपरीत है। हालांकि बजट में 5 लाख करोड़ रुपये के साथ आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) योजना के विस्तार, पीएलआई योजना को विभिन्न क्षेत्रों से जोडऩे सहित कई नई घोषणाओं से छोटी विनिर्माण इकाइयों को लाभ होगा।

Advertisement
First Published - February 2, 2022 | 11:55 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement