facebookmetapixel
Advertisement
भविष्य में ज्यादा प्रदूषण फैलाने पर खुद धीमी हो जाएगी दोपहिया की रफ्तार, मरम्मत के बाद ही होगी सामान्यकॉकरोच जनता पार्टी की सियासी दस्तक: व्यवस्था के भीतर नहीं, बाहर से बदलाव की नई कोशिशसाइबर हमलों की बाढ़ से निपटने के लिए भारत को तुरंत चाहिए मजबूत सुरक्षा ढांचानेपाल बाढ़ में 320 भारतीय लापता, 547 पहुंची मृतकों की संख्या; भारत ने भेजी राहत और बचाव टीमAGM टलने के बाद टाटा संस को कंपनी रजिस्ट्रार से मिली राहत, लेकिन साल के आखिर तक पूरी करनी होगी बैठकआगामी बजट की कवायद शुरू! वित्त मंत्रालय ने मंगवाए संशोधित अनुमान, 12 अक्टूबर से होंगी प्री-बजट बैठकें‘एस्सेल समूह ने 45,000 में से चुकाए 43,000 करोड़ रुपये का कर्ज’, आरोपों के बीच सुभाष चंद्रा ने किया दावाइंडिगो ने सर्वम AI में लगाया पैसा, विमानन क्षेत्र में बढ़ेगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमालक्या पटरी पर लौट आया वोडाफोन आइडिया? लगातार छठे महीने बढ़े ग्राहक, 20 करोड़ के करीब पहुंचा आंकड़ाहिमालय में नई झील का खतरा: नेपाल-तिब्बत सीमा पर बनी 20 हेक्टेयर की झील, निचले इलाकों पर अलर्ट

कारोबारियों को रास नहीं आया बजट

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 9:27 PM IST

कारोबारियों को आम बजट रास नहीं आया है। कारोबारियों का कहना है कि बजट में फैक्टरी/ कंपनी प्रारूप वाले खासकर छोटे उद्यमियों को राहत पहुंचाने वाले कई अहम प्रावधान किए गए हैं। लेकिन फर्म /दुकान वाले कारोबारियों को बजट में खास राहत नहीं दी गई है, जबकि इन कारोबारियों को भी कोरोना के कारण काफी नुकसान हुआ है।
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के महामंत्री हेमंत गुप्ता ने कहा कि कोरोना काल में फैक्टरियां तो फिर भी खुली रहीं, लेकिन दुकानों पर सख्‍ती ज्यादा हुई इसलिए कोरोना की सबसे ज्यादा मार दुकान वाले कारोबारियों के कारोबार पर पड़ी। लिहाजा सरकार को इस आम बजट में इन कारोबारियों को सबसे ज्यादा ख्‍याल रखना चाहिए। लेकिन बजट में कारोबारियों को सीधे तौर पर कोई राहत नहीं दी गई। बजट में जिस तरह से आयकर रिटर्न में संशोधन करने के लिए दो साल तक की मोहलत दी है, उसी तर्ज पर अगर जीएसटी में संशोधन की मोहलत मिलती तो कारोबारियों को बड़ी राहत मिलती। दिल्ली व्यापार महासंघ के अध्यक्ष देवराज बवेजा कहते हैं कि फैक्टरी कंपनी वाले उद्यमियों को तो 22 फीसदी कॉरपोरेट कर देना पड़ता है, जबकि फर्म दुकान वाले कारोबारियों को 30 फीसदी की दर से कर देना होता है। इस विसंगति को सुधार कर कोरोना की मार झेल रहे कारोबारियों को राहत दी जा सकती थी। चैंबर ऑफ ट्रेड ऐंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कारोबारियों की मांग थी कि आयकर में 5 फीसदी और 20 फीसदी के बीच में 10 फीसदी का स्लैब भी होना चाहिए, जो बजट में पूरी नहीं हुई। बजट में कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए कई घोषणाएं की गई हैं, जबकि आम कारोबारियों पर ध्यान नहीं दिया।

कन्फेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स के महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि जीएसटी कर ढांचे के सरलीकरण और युक्तिकरण के संबंध में कुछ भी ठोस घोषणा नहीं की गई है जो ‘एक बाजार-एक कर’ के सिद्धांत के विपरीत है। हालांकि बजट में 5 लाख करोड़ रुपये के साथ आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) योजना के विस्तार, पीएलआई योजना को विभिन्न क्षेत्रों से जोडऩे सहित कई नई घोषणाओं से छोटी विनिर्माण इकाइयों को लाभ होगा।

Advertisement
First Published - February 2, 2022 | 11:55 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement