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लेखक : राजेश कुमार

आज का अखबार, लेख

चीन की दीवार में मंदी की बढ़ती दरार

पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीओसी) ब्याज दरों में कमी करने के मामले में बड़े केंद्रीय बैंकों के बीच एक बड़ा अपवाद है। ज्यादातर केंद्रीय बैंक जहां मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के लिए जूझ रहे हैं, वहीं चीन का केंद्रीय बैंक कमजोर पड़ती विकास की संभावनाओं और गिरती कीमतें रोकने के लिए कदम उठा रहा है। हालांकि […]

आज का अखबार, लेख

अर्थतंत्र: स्थानीय मुद्रा में व्यापार की सीमाएं

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेन-देन में अमेरिकी मुद्रा डॉलर का दबदबा बदलती परिस्थितियों में कई देशों को असहज बना रहा है। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद यह असहजता और बढ़ गई है। अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी देशों ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली को रूस के लिए प्रतिकूल बना दिया है। स्पष्ट है, कोई भी […]

आज का अखबार, लेख

अर्थतंत्र: अमेरिका में ऋण सीमा पर विवाद एवं इसके आर्थिक परिणाम, बता रहे हैं एक्सपर्ट

राष्ट्रपति जो बाइडन और अमेरिकी संसद के प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष एवं रिपब्लिकन पार्टी के सांसद केविन मैकार्थी ऋण सीमा बढ़ाने पर ‘सैद्धांतिक रूप’ में सहमत हो गए है। अब इस सैद्धांतिक सहमति को 5 जून से पहले अमेरिकी संसद के दोनों सदनों सीनेट और प्रतिनिधि सभा में पारित कराना होगा। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के […]

आज का अखबार, लेख

लंबी है राजकोषीय मजबूती की राह

राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के लिए यह जरूरी है कि देश की राजकोषीय स्थिति की व्यापक समीक्षा करते हुए भविष्य की राह तलाश की जाए। बता रहे हैं राजेश कुमार केंद्रीय बजट से संबंधित टिप्पणियां आमतौर पर इस बात पर केंद्रित रहती हैं कि आर्थिक और वित्तीय बाजारों पर इसका क्या संभावित असर होगा। चूंकि अर्थव्यवस्था एक […]

आज का अखबार, लेख

बजट के तीन बिंदुओं पर रहेगा विशेष ध्यान

भारत के आर्थिक एवं नीतिगत ताने-बाने में केंद्रीय बजट सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कड़ी होती है। 1 फरवरी को प्रस्तुत होने वाला बजट कई दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण होने जा रहा है। कोविड महामारी के बाद कदाचित सामान्य परिस्थितियों में प्रस्तुत होने वाला यह पहला बजट होगा जिसमें निकट भविष्य के लिए अनुमान दिए जाएंगे। यह बजट इसलिए […]

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