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लेखक : एमएस श्रीराम

आज का अखबार, लेख

लीड बैंक स्कीम में अब सिर्फ छेड़छाड़ करने की नहीं, नए हालात के हिसाब से ढालने की जरूरत

जब भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने लीड-बैंक योजना (एलबीएस) के लिए नया मसौदा परिपत्र जारी किया तो कई समाचार पत्रों में ग्रामीण शाखाओं में ऋण-जमा (सीडी) अनुपात की बारीकी से निगरानी के प्रस्ताव से संबंधित खबरें छापी गईं। हालांकि, थोड़ी छानबीन करने पर पता चलता है कि ये चिंताएं नई नहीं हैं बल्कि पिछले साल […]

आज का अखबार, लेख

सहकारिता और बैंकिंग रिजर्व बैंक की चुनौतियां

सहकारी संस्थान भारतीय रिजर्व बैंक की वास्तविक दुविधा को हमारे सामने लाते हैं। रिजर्व बैंक पूर्ण रूप से एक केंद्रीय बैंक है। उसके तीन प्रमुख काम हैं: मौद्रिक नीति और सार्वजनिक ऋण का प्रबंधन करना, बैंकों और वित्तीय संस्थानों का विनियमन करना तथा विकास संबंधी भूमिका निभाना जो वित्तीय समावेशन तक सीमित नहीं है। सहकारी […]

आज का अखबार, लेख

स्मॉल फाइनेंस बैंकों को लेकर नवाचार की है दरकार

लघु वित्त बैंक यानी एसएफबी को लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू हुए एक दशक से अधिक वक्त बीत चुका है। स्थायित्व और अस्तित्व की दृष्टि से, लघु वित्त बैंकों ने अन्य बैंकों की तुलना में कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। वर्ष 1991 के सुधारों के बाद, भारतीय रिजर्व बैंक निजी क्षेत्र के बैंकों को लाइसेंस […]

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