facebookmetapixel
Advertisement
ओपनएआई का AI एजेंट टेस्टिंग में बेकाबू, हैकिंग घटना ने साइबर सुरक्षा पर बढ़ाई चिंताAI स्किल्स को IT कंपनियों में सबसे ज्यादा तवज्जो, कैंपस भर्ती और वेतन रणनीति में बड़ा बदलावRBI Economy Report: विदेशी निवेश में लौटा भरोसा, मजबूत मांग से भारतीय अर्थव्यवस्था को सहाराट्रंप के जेनेरिक दवा शुल्क प्रस्ताव से भारतीय फार्मा पर दबाव, उत्पादन अमेरिका ले जाना आसान नहींMutual Fund लाइसेंस की कतार बढ़ी, तीन नए आवेदक; SEBI की मंजूरी का इंतजार कर रहीं 9 कंपनियांकमजोर डॉलर से सोने में जोरदार तेजी, दो हफ्ते के हाई पर पहुंचा भाव 3 अगस्त से बदलेगा शेयर बाजार का क्लोजिंग सिस्टम, Closing Auction के लिए एक्सचेंज तैयारQ1 नतीजों के बाद Bandhan Bank पर दबाव, शेयर 17% टूटे; कमजोर RoA गाइडेंस से निवेशकों को झटकापश्चिम एशिया संकट गहराया, कच्चा तेल 2% की बढ़त के साथ छह हफ्ते के हाई पर दो महीने के निचले स्तर के करीब रुपया, डॉलर के मुकाबले 96.57 के स्तर पर फिसला

लेखक : एमएस श्रीराम

आज का अखबार, लेख

गरीबों के लिए औपचारिक डिजिटल बचत योजना: NPCI और RBI इनोवेशन हब की अगली बड़ी पहल

नई पहल या नए सुधार कार्यक्रमों में बचत एक ऐसा पहलू है जिस पर खास ध्यान देने की आवश्यकता है। लंबे समय से नीति निर्माताओं और बाजार, दोनों ने गरीब तबके को कर्ज के बोझ से दबे एक ऐसे समूह के तौर पर देखा है जिन्हें साहूकारों के चंगुल से बाहर निकालने की जरूरत है। […]

आज का अखबार, लेख

माइक्रोफाइनेंस में अब नई सोच जरूरी: मौजूदा मॉडल ठीक है, लेकिन विकास दर सीमित बनी हुई है

देश में सूक्ष्म वित्त का वाणिज्यिक मॉडल बांग्लादेश ग्रामीण बैंक से प्रेरित है और इसे ‘संयुक्त जवाबदेही समूह’ मॉडल कहा जाता है। यह मॉडल महिलाओं पर केंद्रित है जिन्हें समूहों में संगठित किया जाता है ताकि वे बिना किसी जमानत (गिरवी) के ऋण प्राप्त कर सकें और साप्ताहिक या मासिक बैठक में व्यापारिक लेन-देन कर […]

आज का अखबार, लेख

RBI की नीतियों में कहां रह गई कमी? पेमेंट और क्षेत्रीय बैंकों के फेल होने के पीछे ‘डिजाइन’ दोषी

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा पेटीएम पेमेंट्स बैंक का लाइसेंस रद्द करने के निर्णय के साथ ही हमारे लिए यह आवश्यक हो गया है कि हम रिजर्व बैंक की विभिन्न पहलों पर नजर डालें, इस पहल के इरादे को परखें और देखें कि इसे कैसे डिजाइन किया गया था। यह हमें यह समझने का अवसर देगा […]

आज का अखबार, लेख

फोड़े के इलाज के लिए जानलेवा इंजेक्शन? FCRA संशोधन बिल को लेकर चिंता क्या वाकई सही है

विदेशी अंशदान नियामक अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधनों ने सामाजिक नागरिक संगठनों (सीएसओ) के बीच चिंता के हालात बना दिए हैं। यह चिंता बेवजह नहीं है और हमें राज्य के इस अतिक्रमण पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इससे पहले कि हम इस तर्क के सही-गलत होने पर विचार करें, हमें यह समझना होगा कि […]

आज का अखबार, लेख

लीड बैंक स्कीम में अब सिर्फ छेड़छाड़ करने की नहीं, नए हालात के हिसाब से ढालने की जरूरत

जब भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने लीड-बैंक योजना (एलबीएस) के लिए नया मसौदा परिपत्र जारी किया तो कई समाचार पत्रों में ग्रामीण शाखाओं में ऋण-जमा (सीडी) अनुपात की बारीकी से निगरानी के प्रस्ताव से संबंधित खबरें छापी गईं। हालांकि, थोड़ी छानबीन करने पर पता चलता है कि ये चिंताएं नई नहीं हैं बल्कि पिछले साल […]

आज का अखबार, लेख

सहकारिता और बैंकिंग रिजर्व बैंक की चुनौतियां

सहकारी संस्थान भारतीय रिजर्व बैंक की वास्तविक दुविधा को हमारे सामने लाते हैं। रिजर्व बैंक पूर्ण रूप से एक केंद्रीय बैंक है। उसके तीन प्रमुख काम हैं: मौद्रिक नीति और सार्वजनिक ऋण का प्रबंधन करना, बैंकों और वित्तीय संस्थानों का विनियमन करना तथा विकास संबंधी भूमिका निभाना जो वित्तीय समावेशन तक सीमित नहीं है। सहकारी […]

आज का अखबार, लेख

स्मॉल फाइनेंस बैंकों को लेकर नवाचार की है दरकार

लघु वित्त बैंक यानी एसएफबी को लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू हुए एक दशक से अधिक वक्त बीत चुका है। स्थायित्व और अस्तित्व की दृष्टि से, लघु वित्त बैंकों ने अन्य बैंकों की तुलना में कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। वर्ष 1991 के सुधारों के बाद, भारतीय रिजर्व बैंक निजी क्षेत्र के बैंकों को लाइसेंस […]

Advertisement
Advertisement