यहां आज जारी विश्वासघात के पांच महीने, सांसत में सुशासन नामक रिपोर्ट को पेश करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आरोप लगाया कि भाजपा के सत्ता में शामिल रहने के दौरान बिहार की चर्चा सुशासन और विकास जैसे सकारात्मक बातों को लेकर होती थी।
उन्होंने कहा कि भाजपा-जदयू के गठबंधन के टूटने के करीब साढे पांच महीने ही हुए हैं। मगर इन थोडे दिनों में ही बिहार की चर्चा नकारात्मक बातों को लेकर होने लगी है।
सुशील ने जदयू सरकार पर शिथिलता का शिकार होने जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस सरकार के कार्यकाल के दौरान विकास कार्य ठप है तथा प्रशासन तंत्र पंगु और यह सरकार राजनीतिक अनिर्णय का शिकार है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सुशासन के कार्यक्रम जो पहली बार राजग सरकार के गठन के बाद तय किए गए थे अब हाशिए पर चले गए हैं।
सुशील ने दावा किया कि मुख्यमंत्री शहरी विकास योजना, मुख्यमंत्री सडक निर्माण, सांसद विकास निधि के कार्यावन्यन और सम विकास आदि अनेक योजनाओं के काम ठप है।
उन्हांेने आरोप लगाया कि राज्य के अधिकारियों का एक तबका जहां हताश है, वहीं दूसरा तबका मनमानी करने पर उतारू है तथा जनता की समस्याओं का अधिकारियों के स्तर पर निराकरण नहीं हो रहा है।