Search BS HindiWeb         Follow us on 
Business Standard
Friday, June 23, 2017 12:24 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम अर्थव्यवस्था खबर

नई परिभाषा जगाएगी आशा!
शेख जोएब सलीम /  July 01, 2012

अति सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) की हर श्रेणी में निवेश की सीमा बढ़ाने के लिए इनकी परिभाषा में संशोधन किया जा सकता है। इसका यह अर्थ होगा कि परिभाषा में बदलाव आने के बाद इन उपक्रमों में मौजूदा स्तर से ज्यादा रकम निवेश की जा सकेगी।

एमएसएमई की नई परिभाषा गढऩे के घटकों में कर्मचारियों की संख्या और उपक्रमों के कारोबार के आकार को भी शामिल किया जा सकता है।

विनिर्माण क्षेत्र के उपक्रमों के मौजूदा वर्गीकरण के मुताबिक संयंत्र और मशीनों में 25 लाख रुपये तक के निवेश से तैयार उपक्रम अति सूक्ष्म, 5 करोड़ रुपये तक के निवेश वाली कंपनी लघु और 10 करोड़ रुपये तक के निवेश से स्थापित उपक्रम मझोली श्रेणी के होते हैं। इसी तरह सेवा क्षेत्र में 10 लाख रुपये तक के निवेश से बनाई गई कंपनी अति सूक्ष्म श्रेणी की होती है, जबकि 2 करोड़ रुपये की कंपनी लघु और 5 करोड़ रुपये तक की कंपनी मझोली श्रेणी की होती है।

एमएसएमई मंत्रालय ऐसी कंपनियों की परिभाषा में तब्दीली लाने की योजना पर काम कर रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों की बदली हुई सूरत और मुद्रास्फीति की समग्र स्थिति को देखते हुए ऐसा करना जरूरी माना जा रहा है।

इसके अलावा मंत्रालय एक ऐसी प्रणाली भी विकसित करना चाहती है जिसकी मदद से भविष्य में एमएसएमई की परिभाषा एवं उनमें निवेश की सीमा से संबंधित संशोधन मंत्रालय खुद अपने स्तर कर सके और इसके लिए संसद जाने की जरूरत न रह जाए।

एमएसएमई मंत्रालय के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'मुद्रास्फीति की सालाना दर समेत विभिन्न घटकों को नजर में रखते हुए समय-समय पर निवेश की सीमा संशोधित की जानी चाहिए।' लघु एवं मझोले उपक्रमों की परिभाषा और उनमें निवेश की सीमा संबंधी पिछला संशोधन वर्ष 2006 में किया गया था, जब एमएसएमई अधिनियम, 2006 अस्तित्व में आया था। इस कानून के जरिये एमएसएमई क्षेत्र को परिभाषित किया गया था और लघु उद्योगों की अवधारणा खत्म की गई थी।

इस क्षेत्र के विश्लेषक और सरकारी अधिकारियों ने कहा कि भारत में इस श्रेणी की कंपनियों की परिभाषा अंतरराष्ट्रीय परिपाटी के अनुकूल नहीं है। भारत में जहां एमएसएमई अधिनियम के तहत इस क्षेत्र के उपक्रमों की परिभाषा संयंत्र की मशीनों और उपकरणों पर निवेश के आधार पर गढ़ी गई है, वहीं कई दूसरे देशों में इनकी परिभाषा कारोबार के आकार और कर्मचारियों की संख्या के आधार पर बनाई जाती है।

Keyword: MSME, Definition,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
  आपका मत
 क्या दूरसंचार क्षेत्र के कर्ज बोझ से बैंकों की बढ़ेगी मुश्किल?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.