facebookmetapixel
Suzlon Q3 Results: ₹445 करोड़ का मुनाफा, कमाई बढ़कर ₹4228 करोड़; फिर भी शेयर ने क्यों लगाया 4% का गोता ?भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर तेजी, मिड-मार्च तक औपचारिक समझौते का लक्ष्य: पीयूष गोयलBudget 2026 का टैक्स झटका, डिविडेंड और म्युचुअल फंड निवेश अब महंगे क्यों?₹200 तक जाएगा फर्टिलाइजर कंपनी का शेयर! हाई से 44% नीचे, ब्रोकरेज ने कहा – लॉन्ग टर्म ग्रोथ आउटलुक मजबूतशेयर, सोना, डेट और रियल्टी… ​कहां-कितना लगाएं पैसा? मोतीलाल ओसवाल वेल्थ ने बताई स्ट्रैटेजीStock market outlook: बजट के बाद किन सेक्टर्स में करें निवेश? एक्सपर्ट्स ने बताए नामTata Stock: नतीजों के बाद टाटा स्टॉक पर BUY की सलाह, गुजरात सरकार के साथ डील बन सकती है गेम चेंजरFractal Analytics IPO: 9 फरवरी को खुलेगा AI स्टार्टअप का आईपीओ, प्राइस बैंड ₹857–900 तय; GMP दे रहा पॉजिटिव सिग्नलसोना खरीदने का सही समय! ग्लोबल ब्रोकरेज बोले- 6,200 डॉलर प्रति औंस तक जाएगा भावभारतीय IT कंपनियों के लिए राहत या चेतावनी? Cognizant के रिजल्ट ने दिए संकेत

स्पैम से परेशान लोगों के लिए आएगा समाधान!

विभाग इस बात की भी योजना बना रहा है कि दूरसंचार कंपनियों के लिए डीसीए प्लेटफॉर्म को लागू करना अनिवार्य बनाया जाए।

Last Updated- May 07, 2024 | 11:17 PM IST
spam calls

देश में आम या खास, हर तरह के लोग बढ़ती स्पैम कॉल और टेक्स्ट मैसेज की समस्या से परेशान हैं। अब इस पर अंकुश के लिए दूरसंचार विभाग (डीओटी) नई सरकार गठन के बाद पहले 100 दिन के एजेंडे में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। कुछ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उनका कहना है कि कई तरह के दखल के जरिए विभाग इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने की कोशिश करेगा।

उन्होंने बताया कि विभाग स्पैम पर रोक के लिए एक अंतर मंत्रालय समिति बनाने, चक्षु पोर्टल को अपडेट करने और दूरसंचार कंपनियों के लिए एआई आधारित डिजिटल सहमति हासिल करने (डीसीए) की तकनीक को अनिवार्य बनाने जैसे कई कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।

इस साल मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों से कहा था कि वे अगली सरकार के पहले 100 दिन के कार्यकाल के लिए अपने मंत्रालयों के प्रमुख आपूर्ति विषयों और रोडमैप का मसौदा तैयार करें।

आमतौर पर अपंजीकृत टेलीमार्केटर्स (यूटीएम) द्वारा भेजे जाने वाले ‘अनचाहे वाणिज्यिक संचार’ (यूसीसीएस) के रूप में वर्गीकृत, स्पैम को मुख्य फोकस के रूप में चिह्नित किया गया है। यानी विभाग इस समस्या से निपटने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहा है। स्पैम पर अंकुश के लिए एक नई समिति बनाए जाने की उम्मीद है ताकि बेहतर समन्वय हो सके। इस समिति में दूरसंचार विभाग, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण को शामिल किया जा सकता है।

अधिकारियों ने बताया कि यह समिति इंटरनेट से होने वाले फोन कॉल और व्हाट्सऐप के लिए प्रारूप दिशानिर्देश तैयार करने पर काम करेगी, जो कि चिंता का एक प्रमुख क्षेत्र है। इसमें दूरसंचार ऑपरेटरों को भी शामिल किया जा सकता है।

विभाग इस बात की भी योजना बना रहा है कि उसके चक्षु पोर्टल को लगातार अपडेट किया जाए। इस पोर्टल के जरिए लोगों को यह सुविधा मिलती है कि वे फर्जी संचार की आशंका वाले फोन कॉल या एसएमएस के मोबाइल नंबर या व्हाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया से मिले ऐसे संचार के बारे में शिकायत दर्ज करा सकें।

एक अधिकारी ने बताया, ‘यह प्लेटफॉर्म किसी तरह की चूक से परे है, लेकिन कुछ लोगों ने सवाल उठाए हैं कि क्या अवांछिततत्व इसका भी दुरुपयोग कर सकते हैं? इसलिए आगे चलकर पोर्टल को अपडेट किया जाएगा ताकि न सिर्फ जालसाजी पर बल्कि कुछ नंबरों से आने वाले बड़े मात्रा के स्पैम पर भी निगरानी सख्त की जा सके।’

विभाग इस बात की भी योजना बना रहा है कि दूरसंचार कंपनियों के लिए डीसीए प्लेटफॉर्म को लागू करना अनिवार्य बनाया जाए। ट्राई ने स्पैम और बड़ी मात्रा में होने वाले टेली कॉलिंग पर अंकुश के लिए इस प्लेटफॉर्म को लागू करने का निर्देश दिया था।

डीसीए किसी कंपनी, कारोबार से वाणिज्यिक संचार प्राप्त करने के लिए ग्राहकों द्वारा दी गई सहमति प्राप्त करने, उसे बनाए रखने और रद्द करने के लिए एक एकीकृत मंच है। इसे इसलिए लाया गया है ताकि आम उपभोक्ता के पास यह नियंत्रण रहे कि कौन उसे संदेश भेज सकता है और कौन नहीं भेज सकता है।

हालांकि ट्राई ने इस मामले में रिलायंस जियो, भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और बीएसएनएल द्वारा अपने सिस्टम में निजी व्यवसायों को जोड़ने को लेकर धीमी चाल पर सवाल उठाया है। लेकिन ऑपरेटरों का कहना है कि उन्हें इस मामले में उद्योग से ही सुस्त प्रतिक्रिया मिल रही है।

अभी तक ग्राहकों को कोई ऐसी एकीकृत प्रणाली नहीं मिल पाई है जिसके जरिये वे सहमति दे या उसे निरस्त कर सकें। पहले व्यवस्था यह थी कि ग्राहक की मंजूरी को हासिल करने या बनाए रखने की जिम्मेदारी व्यवसायों की ही है।

अक्सर समस्या यह होती है कि कंपनियां या व्यवसाय किसी टेलीमार्केटर से थोक में भेजे जाने वाली शॉर्ट मैसेजिंग सेवाएं (एसएमएस) खरीद लेते हैं और उनके जरिये ग्राहकों या आम लोगों को एमएसएस भेजते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि एक्सेस प्रोवाइडर (एपी) जैसे दूरसंचार सेवा प्रदाता सहमति की सत्यता की जांच नहीं कर पाते।

First Published - May 7, 2024 | 11:03 PM IST

संबंधित पोस्ट