facebookmetapixel
Advertisement
नेपाल में दोबारा विनाशकारी बाढ़ का खतरा! उपग्रह तस्वीरों में दिखी 20.25 हेक्टेयर की नई झीलनौकरी छोड़ते ही खत्म हो जाएगा आपका कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस? इस्तीफे से पहले समझ लें ये बेहद जरूरी बातेंबेहतर सड़कें, तेज माल ढुलाई: फ्लीट मालिकों के लिए खुल रहे नए कारोबारी मौकेहोर्मुज संकट से भारत को लगी बड़ी चपत! ईंधन आयात पर ₹2 लाख करोड़ का अतिरिक्त बोझएफडी पर 7.20% तक ब्याज, एचडीएफसी बैंक और फेडरल बैंक ने बदलीं दरें2030 तक 36.7 अरब डॉलर का होगा भारत का मीडिया-मनोरंजन बाजार, डिजिटल ऐड और OTT से मिलेगी रफ्तारUS में 20 साल चला म्युचुअल फंड बूम, क्या अब है भारत की बारी? इन आंकड़ों ने बढ़ाई उम्मीद₹900 करोड़ के बायबैक का ऐलान, 3% से ज्यादा चढ़ा ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग का शेयरSBI के मजबूत नेटवर्क का मिलेगा फायदा! जेफरीज को इस शेयर में 26% तेजी की उम्मीदNBFC शेयरों में शुरू होगी तेजी? मुनाफे में 24% ग्रोथ का अनुमान, ये 4 शेयर ब्रोकरेज को पसंद

शुरुआती उत्साह के बाद नरम पड़े सरकारी बॉन्ड

Advertisement

कारोबारियों द्वारा मुनाफे में बॉन्ड बिकवाली शुरू करने से पहले प्रतिफल 7.12 प्रतिशत के साथ दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया था।

Last Updated- September 22, 2023 | 11:10 PM IST
Bonds

जेपी मॉर्गन द्वारा भारतीय बॉन्डों को अपने वै​श्विक सूचकांक में शामिल किए जाने की खबरों के बाद सरकारी बॉन्डों में आई शुरुआती तेजी
आ​​खिर में थम गई, क्योंकि डीलरों की मानें तो बाजार में इस घटनाक्रम का असर पहले ही दिख चुका है।

इसके अलावा, इसे लेकर चिंताएं हैं कि वास्तविक निवेश प्रवाह अगले साल जून में शुरू होगा, जिससे बाजार कारोबारियों का उत्साह ठंडा पड़ता दिख रहा है।

10 वर्षीय बॉन्ड पर प्रतिफल 7.19 प्रतिशत पर बंद हुआ, जो गुरुवार को 7.16 प्रतिशत था। कारोबारियों द्वारा मुनाफे में बॉन्ड बिकवाली शुरू करने से पहले प्रतिफल 7.12 प्रतिशत के साथ दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया था।

एक सरकारी बैंक के डीलर ने कहा, ‘कारोबारी सुबह के कारोबार में बहुत ज्यादा उत्साहित हो गए थे, उन्हें बैंकों से कुछ भागीदारी की उम्मीद थी, लेकिन हम दूरी बनाए रहे।’

उन्होंने कहा, ‘बाजार में इसे लेकर उम्मीद थी कि भारतीय बॉन्ड के जेपी मॉर्गन के सूचकांक में शामिल होने के 2-3 महीने बाद निवेश प्रवाह शुरू हो जाएगा, लेकिन यह जून 2024 तक ही शुरू हो पाएगा।’

बाजार कारोबारियों का मानना है कि भारत को शामिल करने के लिए जेपी मॉर्गन के निर्णय के बाद और सूचकांकों को भी शामिल किया जा सकता है।

Advertisement
First Published - September 22, 2023 | 10:52 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement