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कर मामलों का ई-सत्यापन

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एआईएस करदाता के वित्तीय लेन-देन का समग्र ब्योरा होता है, इसमें बैंक जमा, शेयर लेनदेन आदि शामिल होता है

Last Updated- March 14, 2023 | 9:25 AM IST
Income Tax

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन नितिन गुप्ता ने सोमवार को कहा कि आयकर विभाग ने ई-सत्यापन के लिए ‘ज्यादा मूल्य के’ लेनदेन के 68,000 मामले चुने हैं, जिन्होंने वित्त वर्ष 20 के कर रिटर्न में सही सूचना नहीं दी थी।
ये लेनदेन व्यक्तिगत और कॉर्पोरेट दोनों के हैं। इस अवधि के दौरान इनके सालाना सूचना स्टेटमेंट (एआईएस) और दाखिल किए गए आयकर रिटर्न में अंतर पाया गया।

एआईएस करदाता के वित्तीय लेन-देन का समग्र ब्योरा होता है। इसमें बैंक जमा, शेयर लेनदेन आदि शामिल होता है।

ई-सत्यापन योजना सितंबर 2022 में शुरू हुई थी। इसका मकसद रिपोर्ट करने वाली विभिन्न वित्तीय इकाइयों के ब्योरे के साथ करदाताओं द्वारा दाखिल किए गए आईटीआर का मिलान कराना था। आयकर विभाग ई-सत्यापन योजना के अंतर्गत करदाताओं को वित्तीय लेनदेन और भरे गए आईटी रिटर्न के बारे में वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस) में असमानता के बारे में बताता है।

करदाताओं को अगर लगता है कि ई-सत्यापन में बताई गई असमानता सही है तो वह इसके लिए स्पष्टीकरण देते हुए कर विभाग को जवाब भेज सकते हैं। इस योजना के तहत अगर करदाताओं को लगता है कि ई-सत्यापन नोटिस सही है तो वे अद्यतन रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। जिन मामलों में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, कर विभाग एक पुष्टि रिपोर्ट तैयार करता है जिससे आगे जोखिम आकलन हो सकता है और दाखिल रिटर्न को फिर से कर आकलन हेतु लिया जा सकता है। अद्यतन आयकर रिटर्न दाखिल करने की तिथि 31 मार्च 2023 रखी गई है, जो आकलन वर्ष 2020-21 के लिए है। ई-सत्यापन हेतु लिए गए मामलों के बारे में कर विभाग करदाता को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सूचना देता है और उन्हें आयकर विभाग को सूचना देने के लिए 15 दिन वक्त देता है।

सीबीडीटी के पास ई-सत्यापन के तहत मामले के लिए 90 से 120 दिन का वक्त होता है। सीबीडीटी के प्रमुख ने कहा, ‘विभाग ने शुरुआती तौर पर तय जोखिम प्रबंधन मानकों के आधार पर वित्त वर्ष 2019-20 के लगभग 68,000 मामले ई-सत्यापन के लिए उठाए हैं। इनमें से 35,000 मामलों (56 प्रतिशत) में करदाता पहले से ही संतोषजनक जवाब भेज चुके हैं या संशोधित आईटीआर भर दिया है।’

दाखिल किए गए संशोधित रिटर्न के बारे में उन्होंने बताया कि अब तक कुल 15 लाख संशोधित आईटीआर भरे जा चुके हैं और कर के रूप में 1,250 रुपये एकत्रित हो चुके हैं।

2022 के वित्त अधिनियम में नए आईटीआर दाखिले की यह सुविधा पेश की गई थी, जिसे संधोशित रिटर्न के रूप में जाना जाता है। इस मकसद के लिए आयकर विभाग की धारा 139 में एक उपधारा 8 (ए) जोड़ी गई। यह योदना 1 अप्रैल, 2022 को शुरू हुई।

यह नई धारा आयकरदाताओं को 2 साल के भीतर संशोधित आईटीआर दाखिल करने का मौका देती है। अगर कोई व्यक्ति त्रुटि करता है या आय के मूल रिटर्न के ब्योरे में कुछ आय दिखाता है या देरी से रिटर्न दाखिल करता है, या संशोधित रिटर्न दाखिल करता है वह अद्यतन रिटर्न दाखिल कर सकता है। दो साल की गणना मूल रिटर्न दाखिल करने वाले साल के बाद से की जाती है। गुप्ता ने कहा, ‘ई-सत्यापन योजना में मिलान न होने पर करदाताओं को अद्यतन रिटर्न दाखिल करने का मौका मिलता है।

यह पारदर्शी और मानवीय हस्तक्षेप से इतर व्यवस्था है। इसमें स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहन दिया जाता है, जिससे याचिकाओं में कमी लाने में मदद मिल सकती है।’उल्लेखनीय है कि अगर करदाता के खिलाफ कोई तलाशी या सर्वे या दंडात्मक कार्रवाई चल रही हो तो वह अद्यतन रिटर्न दाखिल नहीं कर सकता है।

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First Published - March 14, 2023 | 9:22 AM IST

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