facebookmetapixel
Advertisement
वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद रफ्तार पकड़ेगा देश का टू-व्हीलर निर्यात, हीरो-बजाज और TVS ने साफ की स्थितिUpcoming IPO: रेलवे के लिए उपकरण बनाने वाली कंपनी का IPO 30 जुलाई को खुलेगा, जानें डिटेल्सदिल्ली में आज छाए रहेंगे बादल, पर देश के कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट; असम में बाढ़ से 66 की मौतअमेरिका-ईरान जंग में नया मोड़: 13 दिनों की बमबारी के बाद थमे एयरस्ट्राइक, क्या रुकेगी 5 महीने पुरानी जंग?छात्रों के विरोध के आगे झुकी सरकार! कैसे PM मोदी के 12 साल के कार्यकाल में इस्तीफा देने वाले दूसरे केंद्रीय मंत्री बने प्रधानपश्चिम एशिया संकट व तेल की बढ़ती कीमतों के बीच अगले हफ्ते कैसा रहेगा शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट का हाल?नीट पेपर लीक, परीक्षा रद्द, आंदोलन और अब शिक्षा मंत्री का इस्तीफा…..3 मई से लेकर अब तक क्या-क्या हुआ?शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, खुद अपने पोस्ट में लेटर जारी करके दी जानकारीफ्लैट खरीदने के बाद पुराने मेंटेनेंस बकाया का आ गया बिल? जानिए क्या कहता है कानून और क्या करें नए खरीदार360% का मोटा डिविडेंड! IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी का निवेशकों को तोहफा, रिकॉर्ड डेट फिक्स

COP28: भारत की जलवायु एजेंडा आगे बढ़ाने के साथ जैव ईंधन पर भी चर्चा की तैयारी

Advertisement

अधिकारियों ने बताया कि कॉप28 में सरकार अपने वैश्विक जैव ईंधन गठजोड़ (जीबीए) को विकासशील देशों के एक बड़े समूह के सामने रखेगी।

Last Updated- November 28, 2023 | 11:25 PM IST
COP28

दुबई में होने वाले 28वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन (COP28) में भारत जलवायु एजेंडा आगे बढ़ाने के साथ कच्चे तेल और जैव ईंधन पर भी चर्चा की तैयारी कर रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि कॉप28 में सरकार अपने वैश्विक जैव ईंधन गठजोड़ (जीबीए) को विकासशील देशों के एक बड़े समूह के सामने रखेगी। मगर उस दौरान कच्चे तेल की आपूर्ति पर पश्चिम एशिया के भागीदारों के संग बातचीत की भी उम्मीद है।

कॉप28 शिखर बैठक गुरुवार से दुबई में शुरू होगी और 12 दिसंबर तक चलेगी। यह बैठक तब हो रही है, जब तमाम देशों में इस बात पर मतभेद बढ़ रहा है कि वैश्विक तापमान में 2050 तक 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक वृद्धि नहीं होने देने के लिए तेल एवं गैस की मांग कैसे कम की जाए।

इस बीच वैश्विक तेल उद्योग के तमाम शीर्ष अधिकारी दुबई पहुंचने के लिए तैयार हैं। एक साल से अधिक समय तक रूस से कच्चा तेल खरीदने के बाद भारत पश्चिम एशिया के अपने पुराने व्यापार भागीदारों के साथ नए सिरे से आपूर्ति शुरू करना चाहता है।

मामले की जानकारी रखने वाले विभिन्न लोगों ने बताया कि सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों के शीर्ष अधिकारी भी इस शिखर सम्मेलन के लिए दुबई पहुंचेंगे। इस दौरान वे अन्य प्रमुख वैश्विक तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे।

एक अधिकारी ने कहा, ‘ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन व्यापार वार्ता के लिए प्रमुख मंच उपलब्ध कराते हैं। यह साल भी अपवाद नहीं है। इसलिए हमारी कंपनियों से अपेक्षा है कि वे सुरक्षित आपूर्ति के लिए नए अवसरों की तलाश में रहें।’

लंदन की कमोडिटी डेटा एनालिटिक्स फर्म वोर्टेक्सा के आकलन से पता चलता है कि सितंबर तक भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 38 फीसदी थी, जो 42 फीसदी की रिकॉर्ड ऊंचाई से कम है। वोर्टेक्सा आयात का हिसाब लगाने के लिए जहाजों की आवाजारी पर नजर रखती है। पिछले कुछ महीनों में भारत के तेल आयात में सऊदी अरब और इराक की हिस्सेदारी बढ़ी है।

तेल एवं गैस जैसे पारंपरिक हाइड्रोकार्बन में निवेश भी जलवायु वार्ता में गतिरोध का बड़ा मसला है। पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने कहा था कि तेल एवं गैस की आपूर्ति में निवेश अब भी जरूरी है। घटती मांग की भरपाई के लिए आदर्श परिस्थिति में 2030 तक 800 अरब डॉलर सालाना की मौजूदा दर को दोगुना करना होगा।

मगर भारत शायद अपने पुराने रुख पर कायम रहेगा कि कार्बन मुक्त विकल्पों की खोज के साथ तेल एवं गैस संसाधनों के विकास एवं उत्पादन में निवेश की आवश्यकता है। 2023 में वैश्विक तेल मांग में भारत की हिस्सेदारी 5.5 फीसदी रही है, जो अमेरिका की 20 फीसदी और चीन की 16.1 फीसदी हिस्सेदारी से काफी कम है। मगर इसमें तेजी से वृद्धि हो रही है और अगले 5 साल में वह 6.6 फीसदी के पार पहुंच सकती है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने यह भी बताया है कि स्वच्छ ऊर्जा के लिए वैश्विक निवेश में तेल एवं गैस उद्योग की हिस्सेदारी महज 1 फीसदी है और इसमें करीब 60 फीसदी निवेश महज 4 कंपनियों ने किया है। इसलिए निवेश का दायरा बढ़ाने और पूरे क्षेत्र को इसके लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है।

Advertisement
First Published - November 28, 2023 | 11:20 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement