facebookmetapixel
Advertisement
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हुआ तो भारत की GDP को लगेगा 0.5% का झटका! जानिए पूरा मामलाIran-Israel War: मिडिल ईस्ट संकट गहराया, Nasscom ने आईटी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का दिया निर्देशयह सिर्फ युद्ध नहीं, रुपये और महंगाई की अग्नि परीक्षा हैउत्तर प्रदेश को 30 कंपनियों से 1400 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलेइंडोनेशिया ने रद्द कर दिया 70,000 वाहनों का ऑर्डर? टाटा मोटर्स सीवी का आया बयान, अटकलों पर लगाया विरामChandra Grahan 2026: साल का पहला चंद्र ग्रहण आज, जानें सूतक काल और भारत में दिखने का समयUS–Iran टकराव बढ़ा तो क्या होगा सेंसेक्स-निफ्टी का हाल? इन सेक्टर्स को सबसे ज़्यादा जोखिममोटापा घटाने वाली दवाएं: फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक कंपनियों के लिए खतरा या मौका?Aviation sector: इंडिगो की वापसी, लेकिन पश्चिम एशिया संकट और महंगा ईंधन बना खतराUS Israel-Iran War: सुरक्षा चेतावनी! अमेरिका ने 14 देशों से नागरिकों को तुरंत बाहर निकलने का निर्देश दिया

नीति आयोग की रिपोर्ट पर छिड़ा संग्राम: टाटा, महिंद्रा और JSW MG ने कैफे-3 मानदंडों का किया विरोध

Advertisement

नीति आयोग की नई रिपोर्ट पर टाटा, महिंद्रा और एमजी ने कड़ी आपत्ति जताई है। कंपनियों का मानना है कि ये सुझाव पर्यावरण लक्ष्यों को कमजोर कर सकते हैं

Last Updated- March 02, 2026 | 10:29 PM IST
NITI Aayog
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

देश की तीन कार निर्माता कंपनियों टाटा मोटर्स, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा और जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया ने नीति आयोग की 10 फरवरी की रिपोर्ट का विरोध किया है, जिसमें सुझाव दिया गया है कि आगामी कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (कैफे-3) मानदंड छोटी कारों के पक्ष में होने चाहिए। कंपनियों का कहना है कि इस तरह की सिफारिशें बाजार को पेट्रोल-डीजल इंजन वाले वाहनों की ओर झुका सकती हैं और दीर्घकालिक उत्सर्जन लक्ष्यों को कमजोर कर सकती हैं।

बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के अनुसार, इन तीनों कंपनियों ने नीति आयोग को ईमेल या पत्रों के माध्यम से रिपोर्ट में फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल्स (एफएफवी) और कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) व्हीकल्स को जीरो एमिशन व्हीकल्स (जेडईवी) के रूप में वर्गीकृत किए जाने पर आपत्ति जताई है।

इसके अलावा, टाटा मोटर्स और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने भी रिपोर्ट में खुद को सहयोगी या विशेषज्ञ बताए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि हितधारकों के साथ हुई चर्चाओं में उनकी भागीदारी का मतलब रिपोर्ट की सिफारिशों का पूर्ण समर्थन नहीं है। जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया ने कहा कि रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले उनसे कोई परामर्श नहीं लिया गया था। न सिर्फ कार निर्माता बल्कि गैर-लाभकारी अनुसंधान संगठन इंटरनैशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (आईसीसीटी) ने भी जीईवी वाहनों की परिभाषा का विरोध किया है।

रिपोर्ट में नीति आयोग ने स्पष्ट किया है कि दावे, व्याख्याएं और निष्कर्ष लेखकों के हैं और जरूरी नहीं कि ये नीति आयोग या भारत सरकार के विचारों को दर्शाते हों। साथ ही यह भी कहा है कि आयोग दस्तावेज में दिए गए विशिष्ट नीतिगत सुझावों का समर्थन या पुष्टि नहीं करता है।

इस बारे में जानकारी के लिए नीति आयोग, टाटा मोटर्स, एमऐंडएम और जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर को भेजे गए प्रश्नों का जवाब नहीं मिला।

छोटी कारें और कैफे नियम

कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (कैफे) मानदंडों के अनुसार कार निर्माताओं को प्रति साल अपने पूरे बेड़े के लिए कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का औसत लक्ष्य (ग्राम प्रति किलोमीटर में) पूरा करना होता है। ऐसा न करने पर उन्हें जुर्माना भरना पड़ता है। कैफे-3 के प्रारूपण के दौरान छोटे (909 किलोग्राम से कम) पेट्रोल हैचबैक कारों के लिए लक्ष्यों में ढील देने या उन्हें राहत देने के प्रस्तावों ने उद्योग जगत में तीखा विवाद खड़ा कर दिया है।

आयोग की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि कैफे मानदंडों से हल्के, छोटे एंट्री-लेवल वाहनों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए। एमऐंडएम ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि कैफे मानदंडों में छोटी कारों को विशेष सुविधाएं देने का कोई तार्किक औचित्य नहीं है।

इसी तरह टाटा मोटर्स ने भी कहा कि कैफे के माध्यम से छोटी पेट्रोल-डीजल कारों को बढ़ावा देना हरित प्रौद्योगिकियों की ओर संक्रमण के सिद्धांत के खिलाफ जाता है और संभावित रूप से आईसी प्रौद्योगिकियों को जारी रखने के लिए एक खामी मुहैया कराता है।

जेएसडब्ल्यू एमजी ने भी नीति की सिफारिश का विरोध करते हुए कहा कि किसी विशिष्ट वाहन (909 किलोग्राम से कम वजन वाली कारें) के लिए कोई भी प्रोत्साहन प्रतिस्पर्धी विकृति पैदा करेगा, विशेष रूप से ऐसे सेगमेंट में, जहां एक ओईएम लगभग 90 फीसदी बाजार हिस्सेदारी पर कब्जा रखता है।

केंद्र में जेडईवी की परिभाषा

विवाद का एक प्रमुख बिंदु रिपोर्ट में ईंधन-चालित वाहनों (एफएफवी) और कार्बन-चालित वाहन (सीबीजी) को शून्य-उत्सर्जन वाहन (जेडईवी) की श्रेणी में रखना है। एफएफवी  पेट्रोल-डीजल इंजन वाले वाहन हैं, जो उच्च एथेनॉल मिश्रण पर चल सकते हैं जबकि कार्बन-चालित वाहन (सीबीजी) बायो-गैस पर चलते हैं। दोनों ईंधन जलाते हैं, इसलिए टेलपाइप उत्सर्जन करते हैं।

एमऐंडएम ने कहा कि ऐसे वाहनों को जेडईवी की श्रेणी में रखना तकनीकी रूप से सही नहीं है क्योंकि एफएफवी और सीबीजी से चलने वाली कारें आंतरिक दहन इंजन से ऊर्जा प्राप्त करती हैं, जिसमें दहन के परिणामस्वरूप टेलपाइप उत्सर्जन अनिवार्य रूप से होता है।

कंपनी ने कहा, हम यह भी बताना चाहेंगे कि इन वाहनों को किसी भी देश द्वारा जेडईवी के रूप में मान्यता नहीं दी गई है और न ही भारत सरकार या राज्य सरकारों के किसी नीति दस्तावेज में इन्हें इस श्रेणी में रखा गया है।

टाटा मोटर्स ने कहा कि एफएफ‍वी और सीबीजी वाहनों को एक एकीकृत जेडईवी ढांचे के तहत शामिल करना किसी भी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानक के तहत मान्यता प्राप्त नहीं कर पाएगा।

Advertisement
First Published - March 2, 2026 | 10:29 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement