Chandra Grahan 2026: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण आज लग रहा है। खगोलशास्त्र के अनुसार, चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इस दौरान चंद्रमा का रंग हल्का लाल या तांबे जैसा दिखाई देता है, इसलिए इसे सामान्यतः ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस बार का चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार, ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों और व्यक्तियों पर पड़ता है। ग्रहण के समय भगवान का स्मरण करना, मंत्र जाप करना और पूजा-पाठ करना शुभ होता है। वहीं इस समय भोजन बनाना, खाना खाना और कोई शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण से पहले सूतक काल आरंभ होता है। इसे अशुभ समय माना जाता है, जिसमें विशेष सावधानी बरतने और भगवान का नाम लेने की सलाह दी जाती है। सूतक काल के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए और बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।
भारत में यह चंद्र ग्रहण अधिकांश शहरों में देखा जा सकेगा। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, कोलकाता, चेन्नई, मुंबई और हैदराबाद में इसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। इसके अलावा गुवाहाटी और ईटानगर में भी ग्रहण का प्रभाव दिखाई देगा। ज्योतिषीय दृष्टि से यह ग्रहण केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया, ऑस्ट्रेलिया, पैसिफिक द्वीपों और उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका में देखा जा सकेगा।
इस बार चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा का रंग गहरा लाल और नीला दिखाई देगा। सामान्यतः चांद सफेद दिखाई देता है, लेकिन ग्रहण के समय इसकी रोशनी बदल जाती है। इस वजह से आकाश में ब्लड मून का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। यह दृश्य देश और दुनिया के कई हिस्सों में देखने योग्य होगा।
भारतीय मानक समय के अनुसार, इस चंद्र ग्रहण का क्रम इस प्रकार है:
प्रारंभ: दोपहर 3 बजकर 20 मिनट
खग्रास प्रारंभ: शाम 4 बजकर 34 मिनट
ग्रहण का मध्य: दोपहर 5 बजकर 33 मिनट
समाप्ति: शाम 6 बजकर 47 मिनट
हालांकि भारत में चंद्रमा का उदय शाम 6:26 से 6:32 बजे के बीच होगा, इस समय ग्रहण का अंतिम चरण चल रहा होगा। इस कारण भारत में यह ग्रहण केवल 15 से 20 मिनट के लिए ही दिखाई देगा।
ग्रहण के समय पूजा और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है।
ग्रहण के दौरान और तुरंत बाद भोजन बनाना या खाना वर्जित है।
बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
ग्रहण के पश्चात किसी भी कार्य की शुरुआत करने से पहले स्नान और शुद्धिकरण करना उत्तम माना जाता है।
इस बार का चंद्र ग्रहण अपने लाल रंग के कारण लोगों के लिए एक अद्भुत खगोलीय दृश्य भी लेकर आया है। यह नजारा न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि खगोलशास्त्र के दृष्टिकोण से भी देखने योग्य है।