भारत और ग्लोबल साउथ के अन्य देशों (विकासशील एवं उभरते देशों) को ओपन-सोर्स आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल बनाने, देसी कंपनियों से और अधिक खरीदारी करने तथा स्थानीय प्रतिभाओं को काम पर रखने के संबंध में ध्यान देना चाहिए। यह कहना है मोजिला फाउंडेशन के अध्यक्ष मार्क सुरमन का।
सुरमन ने कहा, ‘यह (एआई) संप्रभुता का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है, जो निर्माण करना और आपकी अपनी कंपनियों से खरीद करना है। अगर आपको इस बात की जरूरत है कि कंपनियां और ज्यादा निर्माण करें, तो देशों को उनमें निवेश करना चाहिए। यह ऐसा नहीं होना चाहिए कि आपको कहीं और से विशेषज्ञों को बुलाना पड़े।’ वे हाल ही में नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेने आए थे।
सुरमन ने कहा कि हालांकि कई अग्रणी तकनीकी कंपनियों के पास ऐसे ओपन-वेट एआई मॉडल हैं, जिनका उपयोग उत्पादों के निर्माण के लिए किया जा सकता है, लेकिन वे भारत और ग्लोबल साउथ के अन्य देशों की कंपनियों के लिए पूरी तरह से उपयोगी नहीं हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन एआई मॉडलों का निर्माण करने वाली कंपनियां शायद ही कभी विवरण साझा करेंगी, जैसे कि इन मॉडलों के प्रशिक्षण से पहले का विवरण, उपयोग किए गए डेटा सेट वैगरह।
उन्होंने कहा कि ऐसे परिदृश्य में भारत जैसे देशों को वास्तव में ओपन-सोर्स एआई मॉडल निर्मित करने चाहिए, ताकि उनसे सभी को लाभ मिले। उन्होंने यह भी कहा कि खर्च किया गया समूचा सार्वजनिक धन ऐसे उत्पादों के निर्माण में जाना चाहिए जो जनता को लाभ पहुंचाएं, न कि कंपनियों को। हालांकि किसी अग्रणी एआई मॉडल का विकास करने का यह मतलब नहीं है कि शुरू से ही उसकी शुरुआत की जाए।