Indian Economy: फिच ग्रुप की कंपनी BMI ने कहा है कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष भारत में निवेश को कम कर सकता है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है। बीएमआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत ही रहने का अनुमान रखा है। हालांकि कंपनी ने कहा कि आगे जोखिम बढ़ सकते हैं और हालात पर नजर रखी जा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च से हालात ज्यादा अनिश्चित हो सकते हैं। पश्चिम एशिया के तनाव के कारण निवेशक सावधानी बरत सकते हैं। इससे ईयू और अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों से मिलने वाला फायदा कम हो सकता है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल दागे। दुबई जैसे बड़े कारोबारी शहर को भी निशाना बनाया गया।
बीएमआई ने चेतावनी दी है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होता है, तो ऊर्जा की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी। इससे भारत की जीडीपी में 0.5 प्रतिशत अंक तक की कमी आ सकती है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज 33 किलोमीटर चौड़ा समुद्री रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान की धमकी के बाद कई बीमा कंपनियों ने जहाजों को बीमा देना बंद कर दिया है, जिससे तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है। भारत अपनी 88 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है। अगर तेल महंगा होता है, तो देश का आयात बिल बढ़ेगा और महंगाई भी बढ़ सकती है।
बीएमआई ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते से अर्थव्यवस्था को फायदा हो सकता है। पिछले महीने दोनों देशों ने एक अंतरिम समझौते का ढांचा तैयार किया था। इसके तहत अमेरिका शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत करेगा।
फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए कई देशों पर शुल्क को गैरकानूनी बताया था। इसके बाद अमेरिका ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया। ट्रंप ने इसे 15 प्रतिशत करने की बात कही है, लेकिन अभी तक आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।
जनवरी में भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर सहमति बनी थी। कानूनी मंजूरी के बाद इसे एक साल के भीतर लागू किया जाएगा। (PTI के इनपुट के साथ)