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AI ट्रेनिंग में इस्तेमाल कंटेंट पर सरकार बोली: कंपनियां क्रिएटरों को रॉयल्टी देने के लिए हों तैयार

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सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि ऐसी कंपनियों को कंटेंट क्रिएटर को यह रकम सरकार या न्यायालय द्वारा निर्धारित दर पर देनी चाहिए

Last Updated- December 09, 2025 | 10:00 PM IST
artificial intelligence
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सरकार ने कहा है कि जो तकनीकी कंपनियां अपने आर्टफिशल इंटेलिजेंस (एआई) और लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) के प्रशिक्षण के लिए सामग्री तैयार करने वाले लोगों एवं इकाइयों (कंटेंट क्रिएटर) की विषय-वस्तु का इस्तेमाल करती हैं उन्हें रॉयल्टी का भुगतान करना चाहिए। सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि ऐसी कंपनियों को कंटेंट क्रिएटर को यह रकम सरकार या न्यायालय द्वारा निर्धारित दर पर देनी चाहिए।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाले उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा प्रस्तावित नए प्रारूप में कहा गया है कि इस लाइसेंस के लिए भुगतान एक एकीकृत औद्योगिक संस्था द्वारा लिया जाना चाहिए। डीपीआईआईटी ने कहा कि यह संस्था कंटेंट क्रिएटर के बीच यह राशि वितरित कर देगी।  

डीपीआईआईटी ने सोमवार रात को एक कार्यशील पत्र के हिस्से के तौर ये दिशानिर्देश जारी किए हैं। संबंधित पक्षों को इस प्रस्ताव पर 30 दिनों के भीतर सुझाव देने के लिए कहा गया है।

डीपीआईआईटी ने मसौदा पत्र में स्वैच्छिक लाइसेंसिंग ढांचा अस्वीकार कर दिया। इसने कहा कि ‘चर्चा से जुड़ी पेचीदगी और संबंधित अनिश्चितताओं के कारण ऐसा कोई ढांचा लाइसेंस की चाह रखने वाली इकाइयों पर अनुपालन शर्तों का भारी भरकम बोझ डाल देगा।’

सरकार या न्यायालय द्वारा तय और सांविधिक लाइसेंसिंग ढांचा खर्च कम करने में मददगार होगा और इसके साथ ही ‘लाइसेंसधारकों के लिए सहज एवं स्पष्ट माहौल भी तैयार करेगा’।

डीपीआईआईटी की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘यह प्रारूप कॉपीराइट धारकों से लाइसेंस देने से मना करने या शुल्क पर बातचीत करने का अधिकार ले लेता है मगर उनके लिए एक उचित रकम का भी प्रावधान करता है।’

सांविधिक लाइसेंसिंग ढांचे से यह भी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि एआई मॉडल बिना किसी पूर्वग्रह या मतिभ्रम के प्रशिक्षित हो रहे हैं। मसौदा पत्र में कहा गया है कि अधिकतर सामग्री उचित मूल्य पर उन सभी कंपनियों के लिए उपलब्ध होगी जो एआई मॉडल और एलएलएम को प्रशिक्षित करती हैं।

इस पत्र में सुझाव दिया गया है कि यह ढांचा एआई और एलएलएम को प्रशिक्षित करने वाली सभी कंपनियों और सभी प्रकार के कंटेंट क्रिएटर को निर्धारित शुल्क की समीक्षा के लिए किसी न्यायिक मंच के समक्ष अपील करने का अधिकार देगा।

हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इस बात में दम नजर नहीं आ रहा है कि एक अनिवार्य संग्रह ढांचे के अंतर्गत कंटेंट क्रिएटर के लिए उचित मुआवजे का प्रावधान उन कंपनियों की तरफ से संभव हो पाएगा।

तकनीक नीति के हक में काम करने वाली संस्था द डायलॉग की सहायक निदेशक जमीला साहिबा ने कहा, ‘लाइसेंसिंग आवंटन करने की प्रक्रिया सरल करने और एआई डेवलपर के लिए लागत कम करने के लिए प्रस्तावित ढांचा रॉयल्टी भुगतान के चरण में स्थिति जटिल बना देगा। समकालीन जेनेरेटिव एआई सिस्टम बड़े स्तर पर विविध सूचना भंडारों का पुनरावर्ती और गैर-नियतिवादी तरीकों से प्रसंस्करण करती है। इससे कार्यों से जुड़ी सभी जानकारियां या योगदान संरक्षित नहीं हो पाती हैं।’

एआईइंश्योर्ड की सह-संस्थापक एवं मुख्य परिचालन अधिकारी नीलिमा वोबुगरी ने कहा कि हाइब्रिड मॉडल शुरू में कंपनियों के लिए अनुपालन खर्च बढ़ा सकता है मगर इससे विवरण रखना आसान एवं बेहतर हो जाएगा और डेटा के स्रोत का पता लगाने का एक मानक तय हो जाएगा।

हालांकि, दूसरे विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के इस प्रस्ताव के पीछे मंशा तो ठीक लगती है मगर मौजूदा स्वरूप में क्रियान्वित किए जाने पर कई तरह की जटिलताएं आ सकती हैं।

शॉर्टहिल्स एआई के सह-संस्थापक पवन प्रभात ने कहा, ‘इस प्रस्ताव से नियामकीय दबाव काफी बढ़ जाएगा। एक केंद्रीय एजेंसी से अनुरोध प्रबंधित करने, दावों का सत्यापन करने और रॉयल्टी निर्धारित करना और एक मध्यस्थ के रूप में काम करना आसान नहीं होगा और इन सभी कार्यों के प्रबंधन में झमेला भी काफी होगा। न्यायिक समीक्षा का भी विकल्प खुला है ऐसे में कौन जोखिम लेना चाहेगा?’

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First Published - December 9, 2025 | 9:57 PM IST

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