भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकिंग व्यवस्था में नकदी बढ़ाने और सरकार के खर्च बढ़ने के बाद ऋण जुटाने के कम अवधि के साधनों पर ब्याज गिरने के बाद वाणिज्यिक बैंकों ने फरवरी के शुरुआती 10 दिनों में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट जारी किए हैं।
प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों से पता चलता है कि बैंकों ने फरवरी में अब तक 1.21 लाख करोड़ रुपये के सीडी जारी किए हैं, जबकि जनवरी में पूरे माह के दौरान 1.48 लाख करोड़ रुपये सीडी से जुटाए गए थे। रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि सीडी पर बकाया राशि 31 जनवरी को समाप्त पखवाड़े के दौरान 5.8 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई थी।
एक सरकारी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘चौथी तिमाही के दौरान सामान्यतया जमा में वृद्धि पीछे रही है और ऋण देने की रफ्तार तेज रही है। इसके कारण बैंकों पर धन जुटाने का दबाव था। पहले के महीनों की तुलना में फरवरी में कम अवधि के लिए धन जुटाने की दरें कम रही हैं, जिससे सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट धन जुटाने के लिए ज्यादा आकर्षक बन गया। इसकी वजह से बैंकों ने सीडी जारी करने की दिशा में कदम बढ़ाए, जिससे ऋण वृद्धि और जमा आकर्षित करने के बीच पैदा हुए अंतर की भरपाई की जा सके।’
एक माह की सीडी दर फरवरी में अब तक 51 आधार अंक कम हुई है, जबकि 3 महीने की सीडी दर इस अवधि के दौरान 26 आधार अंक कम हुई है। वहीं 6 महीने और 12 महीने की सीडी दरें क्रमशः 13 आधार अंक और 15 आधार अंक कम हुई हैं।
बाजार हिस्सेदारों ने कहा कि अतिरिक्त नकदी सामान्यतया वैरिएबल रेट रिवर्स रीपो (वीआरआरआर) नीलामी के माध्यम से कम की जाती है, जबकि केंद्रीय बैंक हाल के समय में इस तरह की नीलामी से जानबूझकर दूर रहा है। पिछली बार रिजर्व बैंक ने 5 दिसंबर, 2024 को वीआरआर नीलामी कराई थी।
इक्रा में वीपी और फाइनैंशियल सर्विस रेटिंग के को-हेड अनिल गुप्त ने कहा, ‘सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट जारी करने की धारणा मार्च तक जारी रह सकती है, क्योंकि व्यस्त सीजन में बढ़ती ऋण जरूरतों की भरपाई की कवायद करेंगे। बहरहाल मार्च के बाद जारी करने की रफ्तार और आउटस्टैंडिंग वॉल्यूम में कमी आ सकती है।’