भारत के प्रमुख ऋणदाताओं के कॉरपोरेट बही खाते में मामूली वृद्धि के दौर के बाद अब जबरदस्त वृद्धि नजर आ रही है। आर्थिक गतिविधियों ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में सुधार के बाद जोर पकड़ा और इससे कंपनियों को अधिक कार्यशीली पूंजी की जरूरत पड़ी। ऐसी स्थिति में कंपनियों ने बैंकों की ओर रुख किया। इसका कारण यह भी था कि कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट उच्च स्तर पर कायम है।
देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने होलसेल ऋण में सालाना आधार पर 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की थी। इसका मुख्य कारण सेवा क्षेत्र, पेट्रोलियम व पेट्रोकेमिकल्स क्षेत्र व अन्य क्षेत्रों में वृद्धि थी। इसके अलावा स्टेट बैंक का मजबूत कॉरपोरेट ऋण 7.9 लाख करोड़़ रुपये था। इसमें वह ऋण भी शामिल था जो मंजूर हो गया है लेकिन इसे लिया या स्वीकार नहीं किया गया है।
एसबीआई के चेयरमैन सीएस शेट्टी के अनुसार आर्थिक गतिविधियों ने वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में जीएसटी सुधार के कारण जोर पकड़ा। इससे कार्यशील पूंजी के ऋण का बेहतर इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा, ‘एसबीआई बदलती परिस्थितियों का लाभ लेने की स्थिति में है।’
बैंक ऑफ बड़ौदा की होलसेल बुक में सालाना आधार पर 8.1 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 4.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। बैंक का लक्ष्य होलसेल बुक में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत की वृद्धि को हासिल करना है। बैंक ऑफ बड़ौदा के एमडी व सीईओ देबदत्त चंद के अनुसार बैंक के 75,000 करोड़ रुपये के ऋण पाइप लाइन में हैं। बैंक ऑफ इंडिया का कॉरपोरेट बुक सालाना आधार पर 11 प्रतिशत बढ़ा है। बैंक की कॉरपोरेट पाइप लाइन में 65,000 करोड़ रुपये हैं।
बैंक ऑफ महाराष्ट्र की कॉरपोरेट बुक में तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर 14.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। बैंक ऑफ महाराष्ट्र के एमडी व सीईओ निधु सक्सेना ने बताया, ‘हमने हरित फाइनैंसिंग, नवीकरणीय ऊर्जा की परियोजनाओं पर पर्याप्त कार्य किया है।’
इसके अलावा निजी क्षेत्र के बैंकों में एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, कोटक महिन्द्रा और अन्य की कॉरपोरेट बुक में तेजी से वृद्धि हुई।