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कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में लौटी रौनक: सिडबी, नैबफिड और हडको ने एक दिन में जुटाए ₹12,000 करोड़

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सूत्रों ने कहा कि नकदी की स्थिति में सुधार और दरों में हो रही चौतरफा कमी के बीच उन्होंने कम दरों पर धन जुटाया है

Last Updated- February 12, 2026 | 4:48 AM IST
Bond
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार की बहाली के शुरुआती अनुमान मिलने लगे हैं। भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी), नैशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐंड डेवलपमेंट (नैबफिड), और हाउसिंग ऐंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (हडको) ने बुधवार को तय 13,500 करोड़ रुपये के मुकाबले ऋण पूंजी बाजारों से लगभग 12,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं। सूत्रों ने कहा कि नकदी की स्थिति में सुधार और दरों में हो रही चौतरफा कमी के बीच उन्होंने कम दरों पर धन जुटाया है। 

 इसके अलावा राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीम विकास बैंक (नाबार्ड)  और सरकारी कंपनी पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) भी आने वाले दिनों में 10,000 करोड़ रुपये या इससे कुछ अधिक जुटाने के लिए बॉन्ड बाजार में उतरने की तैयारी में हैं। 

 बाजार के प्रतिभागियों ने कुछ समय के ठहराव के बाद इस तरह की कंपनियों की ओर से इश्यू आ रहे हैं। इसकी वजह से मांग बेहतर रही है और मूल्य आकर्षक रहे हैं।  हालांकि, बाजार अभी भी आपूर्ति के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि निवेशकों की खरीद की क्षमता से अधिक बॉन्ड जारी होते हैं तो मूल्य निर्धारण पर दबाव पड़ सकता है। इससे जारीकर्ताओं के लिए अनुकूल यील्ड प्राप्त करना अधिक कठिन हो जाएगा।

नकदी अधिशेष की स्थिति के कारण कम अवधि की दरों में तेज गिरावट आई है। साथ ही बेंचमार्क 10 साल के सरकारी बॉन्ड का यील्ड भी बजट के बाद के 6.77 प्रतिशत के शीर्ष स्तर से करीब 6 आधार अंक कम हुआ है। रिजर्व बैंक के हाल के ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) और फॉरेक्स स्वैप ऑपरेशन (एफएसओ) से व्यवस्था में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की टिकाऊ नकदी आई  है। बैंकिंग व्यवस्था में नकदी अधिशेष 3 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जिसका पता नकदी समायोजन सुविधा विंडों में बैंकों द्वारा जमा धन से चलता है। 

वित्त वर्ष 2026 में कॉरपोरेट बॉन्ड के माध्यम से धन जुटाने की रफ्तार तुलनात्मक रूप से सुस्त रही है। इस पर बढ़ी यील्ड और भू राजनीतिक दबाव का असर रहा, जिससे जारीकर्ताओं की धारणा सुस्त रही। 2025-26 के शुरुआती 9 महीनों (अप्रैल-दिसंबर) में इस माध्यम से धन जुटाने की रफ्तार सालाना आधार पर 6 प्रतिशत घटकर 6.76 लाख करोड़ रुपये रह गई, जबकि एक साल पहले 7.19 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए थे। 

कैलेंडर वर्ष 2025 में 10.08 लाख करोड़ रुपये के कॉरपोरेट बॉन्ड जारी हुए, जबकि 2024 में 10.09 लाख करोड़ रुपये के जारी हुए थे। 

सिडबी ने बॉन्ड के माध्यम से 7.22 प्रतिशत ब्याज दर पर  7,866 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जिसकी मेच्योरिटी अवधि 3 साल से कुछ अधिक है। बैंक ने 8,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई थी, जिसमें बेस इश्यू 2000 करोड़ रुपये और ग्रीन शू ऑफ्शन 6,000 करोड़ रुपये था। 

नैबफिड ने 10 साल के बॉन्ड के माध्यम से 2,553.50 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जिसकी ब्याज दर 7.45 प्रतिशत है। इसने 4,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई थी, जिसमें बेस इश्यू 1,000 करोड़ रुपये और ग्रीन शू ऑप्शन 3,000 करोड़ रुपये का था। 

वहीं हडको ने 7.87 प्रतिशत ब्याज दर पर परपेचुअल बॉन्ड के माध्यम से 1,442 करोड़ रुपये जुटाए। इसने  10 वर्षों के बाद कॉल ऑप्शन के साथ परपेचुअल बॉन्ड के माध्यम से 500 करोड़ रुपये का बेस इश्यू और 1,000 करोड़ रुपये का ग्रीन शू विकल्प सहित 1,500 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई थी। परपेचुअल बॉन्ड में मैच्योरिटी की तिथि नहीं होती है। 

रॉकफील्ड फिनकैप के संस्थापक वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा कि उतार चढ़ाव और केंद्र व राज्य सरकारों के बढ़े बॉन्ड यील्ड के बावजूद उच्च गुणवत्ता वाले जारीकर्ता प्रतिस्पर्धी स्तर पर बॉन्ड बाजार में अपनी पहुंच बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि सिडबी के धन जुटाने से संकेत मिलता है कि मांग अब कमी की ओर है, जबकि नैबफिड ने पहले की तुलना में कम दर पर धन हासिल किया है। 

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First Published - February 12, 2026 | 4:48 AM IST

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