उल्लेखनीय है कि इस केंद्रीय योजना को प्रायोगिक मौसम आधारित फसल बीमा योजना :डब्ल्यूबीसीआईएस:, संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना :एमएनएआईएस: तथा नारियल पाम बीमा योजना को मिला कर बनाया गया है।
कृषि मंत्रालय ने इस बारे में राज्य सरकारों को निर्देश जारी किया है। इसमें कहा गया है, े सिफारिशों व विभिन्न फसल बीमा योजनाओं के कार्यान्वयन से मिले अनुभव व भागीदारों के विचारों के आधार पर घटक-योजनाओं में अनेक सुधार किए गए हैं ताकि उन्हें अधिक से अधिक किसान अनुकूल बनाया जा सके। े
रिणी यानी कर्जदार किसान एनसीआईपी की उस घटक योजना के दायरे में अनिवार्य रूप से आएंगे जिसे संबद्ध राज्य सरकार ने अधिसूचित किया हो। वहीं गैर कर्जदार किसानों को एमएनएआईएस या डब्ल्यूबीसीआईएस घटक में से किसी को चुनना होगा।
इसके अनुसार एनसीआईपी 2013-14 फसल वर्ष के रबी :सर्दी: सीजन से तत्काल प्रभावी हो जाएगी। इस सीजन के लिए पहले जानी प्रशासनिक दिशा निर्देश अब निष्प्रभावी होंगे।
इसमें कहा गया है कि चूंकि कुछ राज्यों में विधानसभा चुनावों के चलते आचार संहिता लागू है इसलिए सम्बद्ध राज्य यह सुनिश्चित करेंगे कि इस बारे में कोई प्रचार प्रसार नहीं किया जाए।